श्रीमती रागिनी सारस्वत पत्नी श्री अमित सारस्वत निवासी 8/117 शिवपुरी, अलीगढ
बनाम
शाखा प्रबन्धक, दि न्यू इण्डिया इन्श्योरेस कम्पनी लिमिटेड, शाखा कार्यालय 32/301 आकाशदीप बिल्डिग, समद रोड, अलीगढ।
उपस्थिति
श्री हसनैन कुरैशी, अध्यक्ष
श्री आलोक उपाध्याय, सदस्य
निर्णय
1.परिवादी ने विपक्षीगण के विरुद्ध बीमित गाय की कीमत 60000/रु मय 18 प्रतिशत ब्याज के, मानसिक कष्ट के रु. 30000 व वाद व्यय के रु.10000 रूपये प्राप्त करने हेतु वाद दायर किया है।
2.. संक्षेप में परिवादी का कथन है कि वादी ने स्वरोजगार व भरण पोषण हेतु दो गाय कीमती रू. 120000 सरकारी अनुदान लेकर खरीदी थी जिसमे प्रत्येक गाय की कीमत रू.60000 थी। जिनका बीमा 1 वर्ष, के लिये विपक्षी के यहाँ कराया । विपक्षी ने पालिसी सं.1261 जारी कर दी पालिसी में स्थान पशु चिकित्सा अधिकारी अहमदपूर लिखा गया गाय जिसका का टैग एन. आई. ए. 33140 व एन. आई. ए. 33141आवटित किया गया था। गाय जिसका का टैग न. एन. एल. आई. ए. 33141 था, की मृत्यु दि.02.08.2014 को हो गयी। जिसकी सूचना विपक्षी को समय से दी गयी जिनके स्रवेयर ने पोस्टमार्टम गाय के फोटो, पोस्टमार्टम रिर्पोट की प्रति गाय का टैग एन. आई. ए. 33141 था का क्लेम इस आधार पर निरस्त कर दिया कि मृत गाय का हुलिया बीमित गाय से नहीं मिल रहा है। और क्लेम दि. 21.01.2015 को नौ क्लेम करके फाइल बंद कर दी।और परिवादिनी ने वाद दायर किया।
3. विपक्षी ने अपने प्रतिवाद पत्र में मुख्य रुप से कथन किया है कि परिवादिनी ने झूठे तथ्य प्रस्तुत किये है। मृत गाय का हुलिया बीमित गाय से मेल नहीं खाता है। परिवादी ने काली गाय का बीमा कराया था जबकि मृत गाय का रंग काला व सफेद शा। वादी ने झूठा वाद दायर किया है।
4. पक्षकारो ने अपने-अपने केस के समर्थन में शपथ पत्र एवं प्रलेख दाखिल किये है।
5. पक्षकारो की ओर से तर्क सुने गये तथा पत्रावली का अवलोकन किया।
6 पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि परिवादिनी ने सरकारी अनुदान लेकर दो गाय रु. 120000 में खरीदी थी । दोनो गाय का बीमा विपक्षी से कराया था । परिवादिनी की गाय जिसका टैग न. एन. आई. ए. 33141 की मृत्यु दि. 2.8.2014 को हो गयी। जितकी सूचना पशु चिकित्सा अधिकारी अहमदपुर, अलीगढ द्वारा विपक्षी बीमा कम्पनी को दे दी गयी। पत्रावली पर उपलब्ध विपक्षी के पत्र दि. 21.1.2015 के अनुसार क्लेम इस आधार पर निरस्त किया गया कि मृत गाय का हुलिया बीमित गाय से नही मिल रहा है।
विपक्षी द्वारा इस आधार पर परिवादिनी का क्लेम निरस्त करना गलत है कि मृत गाय का हुलिया बीमित गाय से नही मिल रहा है। उपरोक्त विवेचन के आधार पर परिवादिनी का परिवाद आंशिक रुप से स्वीकार किया जाता है।
12. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह परिवादिनी को निर्णय के दिनांक से एक माह के अन्दर गाय की कीमत रु. 60000 मय 7 प्रतिशत ब्याज के वाद दायर करने की तिथि से भुगतान किये जाने की तिथि तक ब्याज सहित भुगतान करे। अन्यथा आदेश का अनुपालन ना किये जाने की दशा में उसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 के अंर्तगत कारावास अथवा अर्थदंड से दण्डित किया जा सकता है।
13. परिवाद में यदि कोई प्रार्थना पत्र लम्बित है तब निर्णय के अनुसार निस्तारित किया जाता है।
14. निर्णय की प्रति पक्षकारो को निशुल्क प्राप्त करायी जाये और आयोग की वेबसाइट पर पक्षकारो के अवलोकनार्थ निर्णय को तुरंत पलोड किया जाये।
15. पत्रावली को निर्णय की प्रति सहित अभिलेखागार भेजा जाये।