Uttar Pradesh

StateCommission

A/359/2019

Ex. Engineer Dakshinanchal Vidyut Vitran Nigam Ltd - Complainant(s)

Versus

Deewan Singh - Opp.Party(s)

Isar Husain

01 Nov 2022

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/359/2019
( Date of Filing : 12 Mar 2019 )
(Arisen out of Order Dated 05/01/2019 in Case No. C/02/2015 of District Agra-II)
 
1. Ex. Engineer Dakshinanchal Vidyut Vitran Nigam Ltd
Vidyut Vitran Khand Kheragarh Agra
...........Appellant(s)
Versus
1. Deewan Singh
S/O Late Sri kishori Lal R/O Nagla Udaiya Tehsil and Thana Kheragarh Distt. Agra
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT
 
PRESENT:
 
Dated : 01 Nov 2022
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(मौखिक)                                                                                  

अपील संख्‍या:-359/2019

(जिला उपभोक्‍ता आयोग, दि्वतीय आगरा द्धारा परिवाद सं0-02/2015 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 05.01.2019 के विरूद्ध)

1-    अधिशासी अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लि0, विद्युत वितरण खण्‍ड, खेरागढ़ जिला आगरा।

2-    एस0डी0ओ0 विद्युत वितरण खण्‍ड-दि्वतीय, खेरागढ़ जिला आगरा।

                                              ........... अपीलार्थी/विपक्षीगण

बनाम          

श्री दीवान सिंह पुत्र स्‍व0 श्री किशोरी लाल, निवासी नगला उदैया, तहसील व थाना खेरागढ़, जिला आगरा।

…….. प्रत्‍यर्थी/परिवादी

समक्ष :-

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष            

अपीलार्थीगण के अधिवक्‍ता     : श्री इसार हुसैन

प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता          : श्री दीवान सिंह, व्‍यक्तिगत रूप से उपस्थित

दिनांक :- 01.11.2022

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित

निर्णय

प्रस्‍तुत अपील, अपीलार्थीगण/ अधिशासी अभियंता, दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा इस आयोग के सम्‍मुख धारा-15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अन्‍तर्गत जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, दि्वतीय आगरा द्वारा परिवाद सं0-02/2015 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 05.01.2019 के विरूद्ध योजित की गई है।

संक्षेप में वाद के तथ्‍य इस प्रकार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी के नाम खेत की सिंचाई हेतु ट्यूबेल विद्युत कनेक्‍शन सं0-014749 है, जिसकी बुक सं0-9125 है एवं जोकि 10 किलोवाट का है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी के उक्‍त टयूबेल के बोरिंग का जल स्‍तर नीचा हो जाने के कारण बोरिंग ने पानी देना बंद कर दिया एवं बोरिंग पूरी तरह से फेल हो गई। बोरिंग फेल हो जाने के कारण प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने

-2-

टयूबेल का विद्युत कनेक्‍शन अस्‍थाई विच्‍छेदन करा दिया। विद्युत विभाग द्वारा टयूबेल विद्युत कनेक्‍शन के अस्‍थाई विच्‍छेदन की सूचना पत्र क्रमांक सं0-1327 दिनांक 11.3.2010 द्वारा प्रत्‍यर्थी/परिवादी को दी गई। उक्‍त पत्र में स्‍पष्‍ट उल्‍लेख किया गया कि आपको सूचित किया जाता है कि निम्‍नलिखित कारणों से आपकी उपरोक्‍त संदर्भित आपूर्ति अस्‍थाई रूप से दिनांक 11.3.2010 से विच्‍छेदित कर दी गई है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी पर रू0 13,565.00 बकाया भी दर्शाया गया। दिनांक 13.3.2010 को प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा मु0 6,000.00 रू0 पुस्‍तक सं0-ए-071284/08-09  रसीद सं0-24 द्वारा जमा करा दिये और प्रत्‍यर्थी/परिवादी का विद्युत बिल का शेष 7,565.00 रू0 बकाया रहा। प्रत्‍यर्थी/परिवादी का प्रश्‍नगत विद्युत कनेक्‍शन अस्‍थाई विच्‍छेदन होने के कारण भी दिनांक 22.7.2013 को डिमांड नोटिस भेजा गया, जिसमें माह जून 2013 तक बकाया धनराशि मु0 88,030.00 रू0 व नाटिस व्‍यय मु0 25.00 रू0 कुल 88,055.00 रू0 भेजा गया, जो गलत है, क्‍योंकि प्रत्‍यर्थी/परिवादी का टयूबेल कनेक्‍शन दिनांक 11.3.2010 से अस्‍थाई रूप से कटा हुआ है एवं उसके बाद प्रत्‍यर्थी/परिवादी ने विद्युत का कोई उपभोग नहीं किया है तथा प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा अपने अधिवक्‍ता के माध्‍यम से रजिस्‍टर्ड डाक द्वारा नोटिस भिजवाया, परन्‍तु अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा कोई उत्‍तर नहीं दिया गया। अपीलार्थी/विपक्षीगण द्वारा मनमाने तरीके से अधिक रूपया लगाकर बिल भेजते रहे तथा अपीलार्थी/विपक्षी द्वारा दिनांक 17.12.2014 को जारी बिल में मु0 1,50,113.00 रू0 का गलत दर्शाया गया, अत्एव विवश होकर प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा गलत एवं अधिक बिल को निरस्‍त किये जाने एवं क्षतिपूर्ति का अनुतोष अपीलार्थी/विपक्षीगण से दिलाये जाने हेतु परिवाद जिला उपभोक्‍ता आयोग के सम्‍मुख प्रस्‍तुत किया गया।

 

 

-3-

अपीलार्थी/विपक्षीगण की ओर से जिला उपभोक्‍ता आयोग के सम्‍मुख प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत कर परिवाद पत्र के कथनों का विरोध किया गया एवं परिवाद को निरस्‍त करने की प्रार्थना की गई है।

विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा अपने प्रश्‍नगत आदेश में समस्‍त विवरण अंकित करते हुए यह तथ्‍य स्‍पष्‍ट रूप से उल्लिखित किया कि प्रत्‍यर्थी/परिवादी का अस्‍थाई विद्युत विच्‍छेदन अपीलार्थी/विद्युत विभाग द्वारा दिनांक 11.3.2010 को किया गया, जिसकी सूचना पत्रांक क्रमांक सं0-1327 के माध्‍यम से प्रेषित की गई। दिनांक 11.3.2010 को अस्‍थाई विच्‍छेदन की तिथि पर प्रत्‍यर्थी/परिवादी पर कुल धनराशि रू0 13,565.00 रू0 बकाया दर्शित किया था, जिसके विरूद्ध दिनांक 13.3.2010 को प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा 6,000.00 रू0 जमा किया गया अर्थात बाकी की देय शेष धनराशि 7,565.00 रू0 प्रत्‍यर्थी/परिवादी पर बकाया रही। समस्‍त तथ्‍यों को दृष्टिगत रखते हुए विद्वान जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा निम्‍न आदेश पारित किया गया:-

''परिवाद उपरोक्‍तानुसार स्‍वीकार किया जाता है। परिवादी को आदेश दिया जाता है कि वह एक माह के अन्‍दर मु0 7,565.00 रू0 तथा 15 माह के मु0 720.00 रू0 की दर से मु0 10,800.00 रू0 कुल मु0 18,365.00 रू0 विपक्षी के पास जमा करेगा। परिवादी द्वारा उक्‍त धनराशि जमा कराने के बाद विपक्षीगण परिवादी से कोई भी अन्‍य धनराशि इस बोरिंग के संबंध में वसूल करने के अधिकारी नहीं होंगे। यदि परिवादी यह धनराशि जमा नहीं करता है, तो परिवाद निरस्‍त समझा जायेगा।''

उक्‍त आदेश में किसी प्रकार के कोई अनुचित तथ्‍य, न तो उल्लिखित किये गये, न ही अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा मेरे समक्ष स्‍पष्‍ट किया जा सके। जहॉ तक बाकी की देय धनराशि रू0 7,565.00 की देयता का प्रश्‍न है, वह 15 माह के मु0 720.00 रू0 की दर से कुल धनराशि 10,800.00 रू0 अर्थात

-4-

कुल धनराशि रू0 18,365.00 की देयता का प्रश्‍न है, प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा उपरोक्‍त धनराशि जिला उपभोक्‍ता आयोग के निर्णय/आदेश के अनुपालन में जिला उपभोक्‍ता आयोग के बैंक खाते में हस्‍तानांतरित/जमा करायी जा चुकी है, जिससे सम्‍बन्धित विवरण पत्रांक सं0-7413 दिनांकित 08.3.2022 जारी द्वारा कार्यालय अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खण्‍ड-खेरागढ़ दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, खेरागढ़, जिला-आगरा से स्‍पष्‍ट पाया गया।

चूंकि उपरोक्‍त धनराशि रू0 18,365.00 प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा जिला उपभोक्‍ता आयोग के सम्‍मुख जमा करायी गयी है, जबकि उपरोक्‍त धनराशि को जमा करने का आदेश जिला उपभोक्‍ता आयोग द्वारा अपीलार्थी विद्युत वितरण खण्‍ड-खेरागढ़, जिला आगरा हेतु था, अत्एव प्रस्‍तुत अपील को अंतिम रूप से निस्‍तारित करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया जाता है, अर्थात यह कि अपीलार्थी/विद्युत विभाग खेरागढ़ के अधिशासी अभियंता जिला उपभोक्‍ता आयोग दि्वतीय आगरा के सम्‍मुख समस्‍त प्रपत्र प्रस्‍तुत करते हुए अर्थात प्रत्‍यर्थी/परिवादी द्वारा जमा धनराशि से सम्‍बन्धित प्रपत्र प्रत्‍यर्थी/परिवादी से प्राप्‍त कर, उपरोक्‍त प्रपत्रों को प्रस्‍तुत कर जमा धनराशि मय अर्जित ब्‍याज 02 माह की अवधि में प्राप्‍त करें।

तद्नुसार प्रस्‍तुत अपील अंतिम रूप से निस्‍तारित की जाती है। प्रत्‍यर्थी/परिवादी के विरूद्ध किसी प्रकार की कोई उत्‍पीड़ात्‍मक कार्यवाही नहीं की जावेगी।

आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।

 

 

                                            (न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)              

                                             अध्‍यक्ष                                                                                                             

हरीश, पी0ए0 ग्रेड-2, कोर्ट नं0-1

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]
PRESIDENT
 

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