Uttar Pradesh

StateCommission

C/2010/119

Madhuri Devi - Complainant(s)

Versus

D S M Oman Air - Opp.Party(s)

Yogeeta Chandra And Adeel Ahmad

31 Jul 2017

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Complaint Case No. C/2010/119
 
1. Madhuri Devi
a
...........Complainant(s)
Versus
1. D S M Oman Air
a
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MRS. Smt Balkumari MEMBER
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
Dated : 31 Jul 2017
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित

परिवाद सं0-११९/२०१०

 

श्रीमती माधुरी देवी पत्‍नी श्री राम सेवक निवासी मोहल्‍ला साउथ जहानाबाद कैपरगंज, निकट खोया मण्‍डी, थाना कोतवाली, जिला रायबरेली-२२९००१       

                                                     ...................     परिवादिनी।

बनाम

डी0एस0एम0 ओमान एयर, चिन्‍तल्‍स हाउस, फर्स्‍ट फ्लोर, स्‍टेशन रोड, लखनऊ।

                                                      ...................       विपक्षी।

समक्ष:-

१.मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य ।

२.मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्‍य।

 

परिवादिनी की ओर से उपस्थित   :- श्री अदील अहमद विद्वान अधिवक्‍ता।

विपक्षी की ओर से उपस्थित      :- कोई नहीं।

 

दिनांक : ०८-०८-२०१७.

 

मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

 

निर्णय

 

      प्रस्‍तुत परिवाद क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु योजित किया गया है।

      संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार हैं कि परिवादिनी के कथनानुसार उसके पति जनपद रायबरेली निवासी भारतीय नागरिक हैं। परिवादिनी के पति के पास वैध पासपोर्ट तथा वीसा था। परिवादिनी के पति दुबई में वर्ष १९९० से धोबी का कार्य करते थे तथा प्राय: भारत आते रहते थे। दिनांक    २१-०६-२००७ को परिवादिनी के पति छुट्टियों में भारत आये थे तथा दुबई जाने के लिए लखनऊ से दिनांक २१-०६-२००७ को फ्लाइट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ०८६६ (लखनऊ-मस्‍कट-दुबई) में ओमान एयर से हवाई यात्रा हेतु बैठे थे किन्‍तु वह दुबई नहीं पहुँचे तथा गायब हो गये। उसके उपरान्‍त परिवादिनी के पति के भाई श्री रामस्‍वरूप ने विपक्षी से अपने भाई का पता लगाने का हर सम्‍भव प्रयास किया तथा विभिन्‍न अधिकारियों को प्रत्‍यावेदन प्रेषित किए किन्‍तु कोई ध्‍यान नहीं दिया गया। परिवादिनी के पति परिवार में अकेले आय अर्जित करने वाले सदस्‍य थे। प्रति माह १० से १५ हजार रू० परिवार को भेजते थे किन्‍तु वर्ष २००७ से परिवादिनी अपने ०३ बच्‍चों

 

 

 

-२-

के साथ आर्थिक अभाव में जीवनयापन कर रही है। दिनांक २५-०६-२००७ को ओमान डायरेक्‍ट्रेट के डायरेक्‍टर आफ पेसेन्‍ट एण्‍ड पब्लिक रिलेशन का एक पत्र परिवादिनी को प्राप्‍त हुआ जिसके द्वारा सूचित किया गया कि दिनांक २१-०६-२००७ को वह आकस्मिक विभाग में भर्ती किए गये थे। दिनांक २३-०६-२००७ को वह अस्‍पताल से चले गये जिसकी सूचना पुलिस स्‍टेशन बुशार को भी दी गई। परिवादी के कथनानुसार एयर लाइन्‍स का यह दायित्‍व है कि वह यात्रियों को उनके गन्‍तव्‍य स्‍थान तक सकुशल पहुँचाये किन्‍तु परिवादिनी के पति को विपक्षी एयर लाइन्‍स द्वारा गन्‍तव्‍य तक सकुशल नहीं पहुँचाया गया और उनकी कोई जानकारी उपलब्‍ध नहीं करायी गई।

      विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत किया गया। विपक्षी के कथनानुसार परिवाद का‍लबाधित है तथा उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत पोषणीय नहीं है। विपक्षी ने अपने प्रतिवाद पत्र में श्री रामसेवक नाम के व्‍यक्ति का लखनऊ से दुबई मस्‍कट होते हुए दिनांक   २१-०६-२००७ को फ्लाइट नम्‍बर डब्‍ल्‍यू वाई ८६६ से यात्रा करना स्‍वीकार किया है। इस यात्रा के अन्‍तर्गत लखनऊ मस्‍कट जाना था उसके उपरान्‍त दुबई के लिए कनैक्टिंग फ्लाटट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ६११ लेनी थी। रामसेवक फ्लाइट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ८६६ से लखनऊ से २.३० बजे दोपहर दिनांक २१-०६-२००७ को मस्‍कट पहुँचा। वहॉं उसने दुबई के लिए कनैक्टिंग फ्लाइट पकड़ी जो ३.३० बजे अपरान्‍ह जानी थी। यात्रा हेतु वायुयान में बैठने के थोड़ी देर बाद ही श्री रामसेवक गिर पड़े। उनके स्‍वास्‍थ्‍य की चिन्‍तनीय स्थिति को ध्‍यान में रखते हुए फ्लाइट में चिकित्‍सक को बुलाया गया। उन्‍होंने परीक्षण के उपरान्‍त यह बताया कि श्री रामसेवक मिर्गी के रोग से पीडि़त हैं, अत: वह यात्रा करने योग्‍य नहीं हैं। डॉक्‍टर की राय के अनुसार श्री रामसेवक को एयरपोर्ट मेडिकल सेण्‍टर ले जाया गया। दिनांक २१-०६-२००७ को श्री रामसेवक को सायंकाल यात्रा करने योग्‍य पाया गया। अत: दुबई जाने वाली फ्लाइट सं0-डब्‍ल्‍यू वाई ६२५ में यात्रा करने हेतु वह बैठे। यह फ्लाइट रात्रि ८.३० बजे जानी थी। लगभग ७-४५ बजे रामसेवक को वही समस्‍या पुन: हो गई। अत: डॉक्‍टरों ने उन्‍हें यात्रा करने योग्‍य नहीं माना। श्री रामसेवक के स्‍वास्‍थ्‍य की स्थिति को देखते हुए उन्‍हें रॉयल अस्‍पताल में चिकित्‍सा हेतु भर्ती किया गया। चिकित्‍सा का व्‍यय विपक्षी द्वारा उठाया गया। दिनांक २३-०६-२००७ को रॉयल अस्‍पताल ने मस्‍कट इण्‍टरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों को यह सूचित किया कि यात्री बिना किसी सूचना के चला

 

 

 

-३-

गया। श्री रामसेवक का मूल पासपोर्ट ओमान इमीग्रेशन आफिस को सौंप दिया गया। दिनांक   २५-०६-२००७ को रॉयल अस्‍पताल से स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ओमान डायरेक्‍ट्रेट के डायरेक्‍टर आफ पेसेन्‍ट एण्‍ड पब्लिक रिलेशन का यह पत्र प्राप्‍त हुआ कि रामसेवक अस्‍पताल के डाक्‍टरों की बिना स्‍वीकृति एवं सहमति के अस्‍पताल से चला गया जिसकी सूचना अस्‍पताल के अधिकारियों ने पुलिस अधिकारियों को दी थी। विपक्षी द्वारा यात्री रामसेवक की यात्रा के सन्‍दर्भ में सेवा में कोई कमी नहीं की गई।

      परिवादिनी ने अपने कथन के समर्थन में अपना शपथ पत्र तथा अपने पति रामसेवक की हवाई टिकट की रसीद की फोटोप्रति, रामसेवक के भाई रामस्‍वरूप द्वारा डी0एस0एम0 ओमान एयर को भेजे गये पत्र की फोटोप्रति, ओमान स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा रामसेवक को प्रेषित पत्र दिनांकित २५-०६-२००७ की फोटोप्रति दाखिल की है।

      विपक्षी की ओर से श्री गणेश शेट्टीगर, विपक्षी की सहायक एजेन्‍सी के मैनेजर का शपथ पत्र, यात्री रामसेवक के बोर्डिंग पास की फोटोप्रति तथा सिक पैसेन्‍जर ट्रान्‍सफर फार्म की फोटोप्रति, विपक्षी द्वारा रायल अस्‍पताल को प्रेषित पत्र दिनांक २१-०६-२००७ की फोटोप्रति तथा रॉयल अस्‍पताल द्वारा प्रेषित पत्र दिनांक २७-०६-२००७ की फोटोप्रति तथा इसके अतिरिक्‍त शपथ पत्र के साथ संलग्‍नक – ई, एफ, जी भी दाखिल किए हैं।

      हमने परिवादिनी के विद्वान अधिवक्‍ता श्री अदील अहमद के तर्क सुने तथा अभिलेखों का अवलोकन किया। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्‍तुत करने हेतु कोई उपस्थित नहीं हुआ।

      प्रस्‍तुत मामले के सन्‍दर्भ में महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न यह है कि क्‍या विपक्षी ओमान एयर द्वारा परिवादिनी के पति द्वारा दिनांक २१-०६-२००७ को की गई हवाई यात्रा में सेवा में कोई त्रुटि की गई ?

      यह तथ्‍य निर्विवाद है कि दिनांक २१-०६-२००७ को परिवादिनी के पति श्री रामसेवक ने लखनऊ से दुबई, मस्‍कट के रास्‍ते हवाई यात्रा हेतु फ्लाइट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ८६६ से यात्रा लखनऊ से मस्‍कट तक के लिए की। मस्‍कट से दुबई के लिए कनैक्टिंग फ्लाइट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ८६६ दोपहर ३.३० बजे पकड़नी थी। परिवादिनी के कथनानुसार उसके पति को विपक्षी द्वारा गन्‍तव्‍य स्‍थान तक नहीं पहुँचाया गया बल्कि उनके पति की उपलब्‍धता के विषय में कोई जानकारी

 

 

 

-४-

विपक्षी द्वारा प्राप्‍त नहीं कराई गई।

      उल्‍लेखनीय है कि विपक्षी के कथनानुसार परिवादिनी के पति श्री रामसेवक की लखनऊ से मस्‍कट के लिए फ्लाइट सं0-डब्‍ल्‍यू वाई ८६६ लगभग २.३० बजे दोपहर दिनांक २१-०६-२००७ को मस्‍कट पहुँची। मस्‍कट में परिवादिनी के पति ने अपरान्‍ह ३.३० बजे दुबई जाने के लिए कनैक्टिंग फ्लाइट पकड़ी किन्‍तु इस फ्लाइट के उड़ान भरने के पहले ही परिवादिनी के पति वायुयान में ही गिर गये। उनकी हालत गम्‍भीर होने पर फ्लाइट में ही डॉक्‍टर बुलाए गये जिन्‍होंने यह मत व्‍यक्‍त किया कि रामसेवक मिर्गी की बीमारी से ग्रसित हैं, यात्रा करने योग्‍य नहीं हैं। अत: चिकित्‍सीय राय के अनुसार श्री रामसेवक को यान से उतार लिया गया तथा उन्‍हें एयरपोर्ट मेडिकल सेण्‍टर में चिकित्‍सा हेतु भर्ती किया गया। दिनांक २१-०६-२००७ की सायंकाल श्री रामसेवक को यात्रा हेतु स्‍वस्‍थ बताया गया। अत: दुबई जाने के लिए फ्लाइट नं0-डब्‍ल्‍यू वाई ६२५ में सवार हुए। यह फ्लाइट रात्रि ८.३० बजे उड़नी थी किन्‍तु इससे पूर्व ६.४५ बजे सायं श्री रामसेवक को स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी पूर्व समस्‍या पुन: उत्‍पन्‍न हो गई। अत: उन्‍हें यात्रा के लिए उपयुक्‍त न पाते हुए डॉक्‍टरों की सलाह पर रॉयल अस्‍पताल में इलाज हेतु भर्ती किया गया। दिनांक २३-०६-२००७ को रॉयल अस्‍पताल द्वारा मस्‍कट इण्‍टरनेशनल एयरपोर्ट के अधिकारियों को यह सूचित किया कि यात्री रामसेवक अस्‍पताल के चिकित्‍सकों को बिना सूचित किए और उनकी बिना सहमति लिए अस्‍पताल से चला गया। अपने इस कथन के समर्थन में विपक्षी ने रॉयल अस्‍पताल, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ओमान के डायरेक्‍ट्रेट के पत्र दिनांकित २५-०६-२००७ की प्रति भी दाखिल की है जिसके अवलोकन से विपक्षी के इस कथन की पुष्टि हो रही है।

      परिवादी का यह कथन निर्विवाद रूप से सत्‍य है कि विपक्षी का यह दायित्‍व है कि यात्रियों को सकुशल उनके गन्‍तव्‍य स्‍थान तक पहुँचाया जाय किन्‍तु जहॉं तक प्रस्‍तुत मामले का प्रश्‍न है पत्रावली पर उपलब्‍ध अभिलेखों से यह विदित होता है कि परिवादिनी के पति मस्‍कट से दुबई की हवाई यात्रा प्रारम्‍भ करने से पूर्व मिर्गी रोग से ग्रसित होने के कारण एवं यात्रा के लिए पूर्णत: उपयुक्‍त न होने के कारण आगे की यात्रा नहीं कर सके। उनकी चिकित्‍सा का प्रबन्‍ध अपने खर्चे पर विपक्षी द्वारा किया गया किन्‍तु चिकित्‍सा के दौरान् सम्‍बन्धित अस्‍पताल, रॉयल अस्‍पताल से चिकित्‍सकों की बिना अनुमति अथवा सहमति के परिवादिनी के पति अस्‍पताल

 

 

 

-५-

छोड़कर चले गये जिसकी रिपोर्ट अस्‍पताल द्वारा पुलिस में भी की गई।  

      स्‍वयं परिवादिनी का यह भी कथन है कि प्रश्‍नगत मामले में उसने मा0 उच्‍च न्‍यायालय में रिट याचिका भी योजित की थी जहॉं से उसे कोई अनुतोष प्रदान नहीं किया गया।

      मामले के तथ्‍यों एवं परिस्थितियों के आलोक में हमारे विचार से विपक्षी द्वारा सेवा में कोई त्रुटि किया जाना प्रमाणित नहीं हो रहा है। अत: परिवाद निरस्‍त किए जाने योग्‍य है।     

आदेश

            प्रस्‍तुत परिवाद निरस्‍त किया जाता है।

      परिवाद व्‍यय उभय पक्ष अपना-अपना स्‍वयं वहन करेंगे।

पक्षकारों को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाय।

 

                                             (उदय शंकर अवस्‍थी)

                                               पीठासीन सदस्‍य

 

                                                                                                                

                                                (बाल कुमारी)

                                                   सदस्‍य

 

 

 

प्रमोद कुमार

वैय0सहा0ग्रेड-१,

कोर्ट-२.

 

 

 

           

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MRS. Smt Balkumari]
MEMBER

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