(मौखिक)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
निष्पादन वाद संख्या-03/2011
मै0 आई0एस0ई0 कार्ड्स इण्डिया लि0
बनाम
कार्पोरेशन बैंक तथा एक अन्य
समक्ष:-
1. माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष।
2. माननीय श्री सुशील कुमार, सदस्य।
निष्पादनकर्ता की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
विपक्षी की ओर से उपस्थित : श्री आशीष सिन्हा,
विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक : 16.06.2023
माननीय न्यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्यक्ष द्वारा उदघोषित
निर्णय
डिक्रीहोल्डर की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। विपक्षी बैंक की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री आशीष सिन्हा उपस्थित हैं।
प्रस्तुत निष्पादन वाद, इस न्यायालय के सम्मुख डिक्री होल्डर/परिवादी द्वारा इस न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 28.4.2015 परिवाद संख्या-35/2008 का अनुपालन विपक्षी बैंक द्वारा सुनिश्चित न किए जाने के कारण योजित किया गया है।
इस न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 28.4.2015 के विरूद्ध विपक्षी बैंक द्वारा माननीय राष्ट्रीय आयोग के सम्मुख प्रथम अपील संख्या-450/2015 योजित की गई, जो माननीय राष्ट्रीय आयोग द्वारा उभय पक्ष को सुनने के उपरांत अंतिम रूप से दिनांक 20.4.2018 को निर्णीत की गई। माननीय राष्ट्रीय आयोग द्वारा निर्णीत प्रथम अपील में निम्न आदेश पारित किया गया :-
'' Based on the above discussion, the appeal is allowed. The order dated 28.04.2015 passed by the State Commission is set aside and it is held that the appellant bank is entitled to get back total amount of cheque from the complainant. On the other hand, complainant is entitled to get a compensation of Rs.3,00,000/- from the appellant bank. Accordingly, after making adjustment of Rs.3,00,000/- the appellant bank is entitled to recover Rs.21,67,747/- from complainant. Accordingly, bank can take the remaining amount in the current account of the complainant and the complainant is also directed to deposit remaining amount in his current account so that the bank can recover a total amount of Rs.21,67,747/-. Both the parties to comply with this order within a period of 45 days.''
उपरोक्त आदेश के परिशीलन से यह स्पष्ट पाया जाता है वास्तव में डिक्री होल्डर/परिवादी के विरूद्ध माननीय राष्ट्रीय आयोग द्वारा आदेश पारित किया गया है, जिसका अनुपालन डिक्री होल्डर/परिवादी द्वारा सुनिश्चित किया जाना है न कि विपक्षी बैंक द्वारा। अत: जब तक डिक्री होल्डर द्वारा उपरोक्त आदेश का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जाता तब उस स्थिति में प्रस्तुत निष्पादन वाद को लम्बित रखने का कोई उद्देश्य नहीं है, अतएव प्रस्तुत निष्पादन वाद अंतिम रूप से निरस्त किया जाता है।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दे।
(न्यायमूर्ति अशोक कुमार) (सुशील कुमार)
अध्यक्ष सदस्य
लक्ष्मन, आशु0,
कोर्ट-1