राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
मौखिक
अपील संख्या-04/2019
(जिला उपभोक्ता फोरम, अमरोहा द्वारा परिवाद संख्या 87/2018 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 07.12.2018 के विरूद्ध)
1.एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0
इलेक्ट्रिकसिटी डिस्ट्रीब्यूशन डिवीजन, गजरौला अमरोहा।
2.मैनेजिंग डायरेक्टर, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लि0
मेरठ। ......अपीलार्थीगण/विपक्षीगण
बनाम्
चेतराम सिंह पुत्र श्री शिव चरन सिंह निवासी ग्राम देहरा घनश्याम
पोस्ट, महेशरा तहसील धनौरा जनपद अमरोहा। ..............प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1. मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य।
2. मा0 श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : श्री इसार हुसैन, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री आर0डी0 क्रान्ति, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक 16.12.2020
मा0 श्री सुशील कुमार, सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
1. परिवाद संख्या 87/2018 चेतराम सिंह बनाम अधिशासी अभियंता पश्चिमांचल विद्युत एवं एक अन्य में पारित निर्णय व आदेश दि. 07.12.2018 के विरूद्ध यह अपील उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15 के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है। विद्वान जिला उपभोक्ता मंच/आयोग द्वारा निम्नलिखित आदेश पारित किया गया है:-
''परिवादी का परिवाद अंशत: एकपक्षीय रूप से विपक्षीगण के विरूद्ध 3000/- रूपये(रूपये तीन हजार मात्र) परिवाद व्यय सहित स्वीकार करते हुए विपक्षीगण को आदेश दिया जाता है कि विपक्षीगण परिवादी को आज निर्णय से 30 दिन के अंदर नया बिल माह अगस्त 2014 से 18-2-18 तक वास्तविक रीडिंग के आधार पर बनाकर देवे एवं परिवादी से 139263/- की
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वसूली न करे। परिवादी को हुई आर्थिक, मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति हेतु 2000/- रूपये का भुगतान करें। आदेश का अनुपालन 30 दिन में करने पर समस्त धनराशि पर 6 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज आज निर्णय से अदायगी तक देय होगी। पूर्ण बिल की राशि एवं निर्धारित शुल्क अदा हो जाने पर पुन: विद्युत लाइन को जोड़ दिया जाये।''
2. परिवाद पत्र के अनुसार परिवादी ने दि. 20.01.2005 को रू. 1125/- विपक्षी संख्या 1 के कार्यालय में जमा कर विद्युत कनेक्शन संख्या 035997 प्राप्त किया। किशोरी के खेत में एक ट्रांसफार्मर जो 93 मीटर दूर से सर्वे मैप बनाया गया और रू. 15732/- का स्टीमेट बनाया गया। दि. 17.11.2006 को अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस तथा दि. 11.07.18 को जिलाधिकारी के समक्ष दिए गए प्रार्थना पत्र के पश्चात विपक्षीगण ने विद्युत लाइन की सामग्री दी, परन्तु विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने किशोरी के खेत के पास लगे ट्रांसफार्मर से विद्युत लाइन कनेक्शन न जोड़कर 257 मीटर दूर पोल से एक तार जोड़ दिया और लाइन अधूरी छोड़ दी। जिधर से तार खींचा गया उधर का ट्रांसफार्मर परिवादी के कनेक्शन से 700 मीटर दूर था और उसके बाद कहा कि लाइन सामग्री समाप्त हो गई है, क्योंकि सर्वे केवल 93 मीटर का किया गया था। अगस्त 2014 में सुखबीर सिंह के खेत में रखे 63 एच.पी. के ट्रांसफार्मर से देवेन्द्र, रणवीर, चम्पत, परम आदि के लिए विद्युत लाइन खींची गई, उस समय भी परिवादी की विद्युत लाइन सर्वे के अनुसार नहीं खींची गई। लो वोल्टेज की समस्या से विद्युत नलकूप पानी नहीं उठा सकी तब पुन: रू. 35000/- का स्टीमेट बनवाया गा और 100 एच.पी. का ट्रांसफार्मर लगवाया गया, परन्तु
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परिवादी को अंकन रू. 35000/- की रसीद उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद परिवादी का विद्युत कनेक्शन विच्छेदित कर दि. 18.12.2018 को अंकन रू. 139263/- बकाए का नोटिस दिया, जबकि परिवादी पर उपरोक्त वर्णित राशि का बिल नहीं बनता है। इस प्रकार परिवाद पत्र प्रस्तुत करते हुए अनुरोध किया गया कि अंकन रू. 139263/- निरस्त कर अगस्त 2014 से 18.02.2018 तक नया बिल बनवाया जाए और परिवादी का विद्युत कनेक्शन संयोजित करवाया जाए तथा सेवा में कमी के कारण आर्थिक, मानसिक, शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए दो लाख रूपये की मांग की गई। अंकन रू. 35000/- का स्टीमेट रसीद प्राप्त करने की मांग भी की गई तथा परिवाद व्यय अंकन रू. 15000/- का अनुतोष मांगा गया।
3. केवल परिवादी के साक्ष्य पर विचार करने के पश्चात विद्वान जिला मंच द्वारा उपरोक्त वर्णित एकपक्षीय आदेश पारित किया गया ।
4. उपरोक्त आदेश को इन आधारों पर चुनौती दी गई है कि परिवादी द्वारा एक काल्पनिक कहानी दि. 18.02.2018 का नोटिस प्राप्त करने के पश्चात तैयार की गई, जिस पर विद्वान जिला उपभोक्ता मंच द्वारा अवैध अनुचित तथा मनमाना निर्णय पारित किया गया। यह निर्णय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। अपील के ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि दि. 07.12.2006 को परिवादी ने विद्युत कनेक्शन प्राप्त करने के लिए एक करार किया था और इस करार के आधार पर विद्युत आपूर्ति न करने की एक झूठी कहानी तैयार की गई, जबकि परिवादी द्वारा विद्युत का उपभोग किया गया। अपील के ज्ञापन में उल्लिखित है कि दि. 01.08.2009 से विद्युत आपूर्ति का बिल तैयार किया गया और तबसे
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परिवादी अबाधित विद्युत आपूर्ति प्राप्त करता रहा है, क्योंकि राम मनोहर लोहिया स्कीम के अंतर्गत आने के कारण ग्राम देहरा में नई लाइन बिछाई गई। नया ट्रांसफार्मर लगाया गया, परन्तु परिवादी जानबूझकर उपभोग किए गए विद्युत बिल का भुगतान नहीं कर रहा है। एक झूठी कहानी तैयार कर परिवाद प्रस्तुत कर दिया गया है।
5. दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ता को सुना गया एवं प्रश्नगत निर्णय व साक्ष्य का अवलोकन किया गया।
6. अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्ता का यह तर्क है कि स्वयं परिवादी ने परिवाद पत्र के पैरा संख्या 5 में स्वीकार किया है कि वर्ष 2008 में विद्युत आपूर्ति कर दी गई है। परिवाद पत्र के पैरा नं0 5 के अवलोकन से जाहिर होता है कि इसमे केवल यह उल्लेख किया गया है कि 257 मीटर दूर स्थित पोल से एक तार खींचा गया और बाद में कहा गया कि लाइन सामग्री खत्म हो गई है, इसलिए यह तर्क तथ्यों के विपरीत है कि परिवादी ने स्वयं स्वीकार किया कि वर्ष 2008 में विद्युत आपूर्ति प्रारंभ हो चुकी थी।
7. अपील के ज्ञापन में उल्लेख है और दोनों पक्षों को स्वीकार है कि परिवादी द्वारा दि. 07.12.2006 को अंकन रू. 15732/- जमा कराए। एक ग्रामीण परिवेश के कृषक द्वारा दि. 06.12.2006 को अंकन रू. 15732/- की मूल्यवान राशि जमा कराने के बावजूद स्वयं अपील के ज्ञापन में वर्णित तथ्य के अुनसार दि. 01.08.2009 से विद्युत बिल बनना प्रारंभ किया गया, यानी अपीलार्थी को स्वीकार है कि दि. 31.07.2009 तक परिवादी को विद्युत की आपूर्ति नहीं की गई थी, क्योंकि स्वयं उनके द्वारा इस तथ्य का उल्लेख किया गया है कि दि. 01.08.2009 को बिल बनना प्रारंभ किया गया।
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8. परिवाद पत्र में उल्लेख है कि अगस्त 2014 में पुन: रू. 35000/- का एक स्टीमेट बनाया गया और इसकी कोई रसीद परिवादी को नहीं दी गई। इस तथ्य का कोई खंडन लिखित कथन प्रस्तुत करते हुए नहीं किया गया है। परिवाद पत्र के समर्थन में जो शपथपत्र प्रस्तुत किया गया है, उसके अनुसार अगस्त 2014 से 18.02.2018 की अवधि का नया बिल प्राप्त करने की मांग की गइ। परिवादी द्वारा दिए गए शपथपत्र का कोई खंडन भी नहीं किया गया। इस अवधि से पूर्व उसे यथार्थ में बिजली की आपूर्ति नहीं की गई। इस तथ्य का भी खंडन नहीं किया गया है कि परिवादी ने अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस दिलाया। जिलाधिकारी को शिकायत की गई कि वर्ष 2006 अंकन रू. 15732/- जमा करने के बावजूद स्वयं अपील के ज्ञापन के अनुसार जुलाई 2009 तक विद्युत आपूर्ति जारी नहीं की गई, अत: उपरोक्त वर्णित सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि विद्युत विभाग द्वारा एक गरीब किसान के प्रति अत्यधिक लापरवाहीपूर्ण कृत्य किया गया और वर्ष 2006 में एक गरीब किसान से अंकन रू. 15732/- भारी राशि जमा कराने के बावजूद उसके खेतों की सिंचाई की व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। अत: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत परिवाद प्रस्तुत करते हुए वांछित अनुतोष मांगने के लिए परिवादी पूर्णतया अधिकृत था, परन्तु विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा पारित आदेश के अवलोकन से ज्ञात होता है कि यह आदेश इस बिन्दु पर भ्रामक है कि वास्तविक रीडिंग के अनुसार अगस्त 2014 से 18.02.2018 तक का बिल बनाया जाए। चूंकि कृषि कार्य के लिए प्रदत्त विद्युत कनेक्शन के लिए मीटर उपलब्ध नहीं कराया जाता, इसलिए कोई रीडिंग नहीं बल्कि टैरिफ के अनुसार विद्युत
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बिल की राशि वसूल की जाती है, इसलिए यह आदेश इस रूप में परिवर्तित किए जाने योग्य है कि अगस्त 2014 से 18.02.2018 तक टैरिफ के अनुसार विद्युत बिल जारी किया जाए और इस बिल के जारी होने के पश्चात परिवादी द्वारा एक माह के अंदर बिल राशि जमा की जाए। इस बिल राशि के जमा होने के पश्चात परिवादी के पक्ष में विद्युत कनेक्शन अपीलार्थी/प्रत्यर्थी द्वारा जारी कर दिया जाए।
आदेश
9. अपील आंशिक रूप से इस सीमा तक स्वीकार की जाती है कि अगस्त 2014 से 18.02.2018 तक टैरिफ के अनुसार विद्युत बिल जारी किया जाए और इस बिल के जारी होने के पश्चात परिवादी द्वारा एक माह के अंदर बिल राशि जमा की जाए। इस बिल राशि के जमा होने के पश्चात परिवादी के पक्ष में विद्युत कनेक्शन अपीलार्थी/प्रत्यर्थी द्वारा जारी कर दिया जाए। प्रतिकर राशि पर ब्याज अदा करने का आदेश अपास्त किया जाता है।
उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे।
निर्णय की प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार उपलब्ध कराई जाए।
(विकास सक्सेना) (सुशील कुमार) सदस्य सदस्य
राकेश, पी0ए0-2
कोर्ट-1