(सुरक्षित)
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ
अपील सं0- 2522/2013
1. Reliance General Insurance Company Ltd. Office in front of Sardar Patel Hindu Inter College (Old Building), Katiya Tola, Shahjahanpur.
2. Reliance General Insurance Company Ltd, 122/167 First Floor, Purana PMG Office, Civil Lines, Bareilly.
3. Reliance General Insurance Company Ltd. 570 Naigaum Cross Road, Next to Royal Industrial Estate, Wadala (w) Mumbai 400031.
4. Reliance General Insurance Company Ltd., H Block First Floor, Dhirubhai Ambani Knowledge City Navi Mumbai, Maharashtra.
All through its Manager Legal, Rohit House 1, Shahnjaf Road, Hazratganj, Lucknow.
…………Appellants
Versus
1. Chandraveer Gupta S/o Late Sriram Gupta R/o C/0 Rama Medical Store, Sadar Bazar, Shahjahanpur.
2. Paramount Health Services (TPA) Pvt. Limited D 39 Okhla Industrial Area, Phaze-1 New Delhi.
3. Paramount Health Services (TPA) Pvt. Limited Elite Auto House, A-54 First Floor, M Vasanzi Road, Andheri, Kurula Road, Chhakala, Andheri (E), Mumbai.
………..Respondents
समक्ष:-
1. माननीय श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
2. माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से : श्री महेन्द्र कुमार मिश्रा,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी सं0- 1 की ओर से : श्री शरद कुमार वैश,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थीगण सं0- 2 व 3 की ओर से : कोई नहीं।
एवं
अपील सं0- 1240/2014
1. Reliance General Insurance Company Ltd. Office in front of Sardar Patel Hindu Inter College (Old Building), Katiya Tola, Shahjahanpur.
2. Reliance General Insurance Company Ltd, 122/167 First Floor, Purana PMG Office, Civil Lines, Bareilly through Branch Manager.
3. Reliance General Insurance Company Ltd. 570 Naigaum Cross Road, Next to Royal Industrial Estate, Wadala (w) Mumbai 400031, Through Branch Manager.
4. Reliance General Insurance Company Ltd., H Block First Floor, Dhirubhai Ambani Knowledge City Navi Mumbai, Maharashtra, through Branch Manager.
All through its Manager Legal, Rohit House 1, Shahnjaf Road, Hazratganj, Lucknow.
…………Appellants
Versus
1. Chandraveer Gupta S/o Late Sriram Gupta R/o C/0 Rama Medical Store, Sadar Bazar, Shahjahanpur.
………..Respondent
समक्ष:-
1. माननीय श्री राजेन्द्र सिंह, सदस्य।
2. माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से : श्री महेन्द्र कुमार मिश्रा,
विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से : श्री शरद कुमार वैश,
विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक:- 14.07.2022
माननीय श्री विकास सक्सेना, सदस्य द्वारा उद्घोषित
निर्णय
1. अपील सं0- 2522/2013 जिला उपभोक्ता आयोग, शाहजहांपुर द्वारा परिवाद सं0- 176/2011 चन्द्रवीर गुप्ता बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 व 05 अन्य में पारित निर्णय व आदेश दि0 10.10.2013 के विरुद्ध धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य आयोग के समक्ष योजित की गई है।
2. प्रश्नगत निर्णय व आदेश के माध्यम से अपीलार्थीगण/विपक्षी को निर्देश दिए गए कि वे परिवादी को 88,993/-रू0 मय 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्रदान करें।
3. अपील सं0- 1240/2014 जिला उपभोक्ता आयोग, शाहजहांपुर द्वारा निष्पादनवाद सं0- 06/2014 चन्द्रवीर गुप्ता बनाम रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 आदि में पारित आदेश दि0 29.05.2014 के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अंतर्गत राज्य आयोग के समक्ष योजित की गई है, जिसमें उक्त निर्णय के आदेश का अनुपालन न किए जाने के कारण अंतर्गत धारा 27 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 अपीलार्थी/विपक्षी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 को कारावास एवं दो-दो हजार रूपये प्रत्येक को अर्थदण्ड के निर्देश दिए गए, चूँकि निष्पादनवाद उपरोक्त निर्णय से सबन्धित है, अत: दोनों पत्रावलियों का निर्णय एक साथ किया जा रहा है।
4. मामले के तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी ने परिवाद इन अभिकथनों के साथ प्रस्तुत किया कि अवधि दि0 02.02.2010 से दि0 01.02.2011 तक के लिए चिकित्सीय सुविधा हेतु चिकित्सा बीमा विपक्षी से लिया था। परिवादी इस अवधि में अस्वस्थ हुआ और गुरूनानक अस्पताल एण्ड लैप्रोस्कोपी सेन्टर में दि0 21.10.2010 से दि0 23.10.2010 तक भर्ती रहा, जहां उसका बांये तरफ का इंफैक्टेड हाइड्रोसील का इलाज व ऑपरेशन हुआ। परिवादी के अनुसार उसके इस शल्य क्रिया में 88,993.50/-रू0 खर्च हुए। परिवादी ने चिकित्सा पर हुए व्यय को प्राप्त करने के लिए सभी औपचारिकतायें पूर्ण करते हुए क्लेम फार्म प्रस्तुत किया तथा अन्य औपचारिकतायें पूरी करने के बावजूद धनराशि प्रदान नहीं की गई जिससे व्यथित होकर परिवादी ने यह परिवाद प्रस्तुत किया है।
5. विपक्षी की ओर से वादोत्तर दाखिल किया गया जिसमें उन्होनें क्लेम सम्बन्धी सभी कागजात प्राप्त होना स्वीकार किया एवं यह भी कहा कि बीमा पालिसी की शर्तों का पालन करना परिवादी का कर्तव्य था जो उसने नहीं किया। परिवादी का यह भी कथन आया था कि उसके अचानक चोट लग गई थी तथा उसने डॉ0 परविन्दर सिंह को दि0 13.08.2010 को दिखाया था। पुन: दर्द होने पर डॉ0 के0पी0 गुप्ता को दिखाया, जिन्होंने कुछ टेस्ट दिल्ली से करवाने व ऑपरेशन की सलाह दी। परिवादी टेस्ट दिल्ली में नहीं कराया, बल्कि एस्कार्ट फोर्टिस अस्पताल में होल बाडी चेक-अप करवाया जिसका बिल 7500/-रू0 परिवादी द्वारा अपने क्लेम के साथ प्रस्तुत किया गया है जो बीमा पालिसी में कवर नहीं है। परिवादी ने बढ़ा-चढ़ाकर क्लेम मांगा है तथा इंजेक्शन Zovirox का सेवन करना बताया गया है। मरीज का इलाज करने के लिए ऐसी कोई बीमारी परिवादी को नहीं है। स्वयं परिवादी की थोक व रिटेल दवा बेचने की दुकान है। अत: उसने अपने ही मेडिकल स्टोर से फर्जी बिल तैयार किया है। इन आधारों पर बीमे का क्लेम खारिज किया गया है। उभयपक्ष के अभिवचनों व साक्ष्यों के उपरांत परिवादी का परिवाद रू0 88,993/- के लिए आज्ञप्त किया गया जिससे व्यथित होकर यह अपील प्रस्तुत की गई है।
6. अपील के मेमों में मुख्य रूप से आधार यह लिए गए हैं कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया गया है। स्वयं परिवादी ने स्वीकार किया है कि गुरूनानक अस्पताल में 02 दिन दि0 21.01.2010 से दि0 23.01.2010 तक भर्ती रहा जब कि उसकी डिस्चार्ज समरी दि0 09.03.2011 की बनायी गई है। परिवादी द्वारा Zovirox नाम की दवा का सेवन दि0 09.03.2011 से पूर्व से किए जाने का वर्णन है। परिवादी का इलाज करने वाले सर्जन द्वारा ई-मेल दि0 22.05.2011 में यह स्वीकार किया गया है कि उसे इंजेक्शन Montaz दिया गया था न कि Zovirox दिया गया था। लिपिकीय त्रुटि के कारण इसको Zovirox लिख दिया गया था जिस कारण दवाओं के पर्चों के सम्बन्ध में गम्भीर संदेह उत्पन्न होता है। इस तथ्य को विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने अपने संज्ञान में नहीं लिया है। परिस्थितियों से स्पष्ट होता है कि परिवादी ने झूठा क्लेम बनाकर एवं गलत दवायें दर्शाकर बीमे का क्लेम लेने का प्रयत्न किया है। अत: बीमे का क्लेम अस्वीकार एवं निरस्त किए जाने योग्य है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने गलत प्रकार से बीमे की धनराशि प्रदान की है, अत: प्रश्नगत निर्णय व आदेश अपास्त होने योग्य एवं अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
7. विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी की ओर से मांगी गई धनराशि जो परिवादी के कथनानुसार उसने चिकित्सीय व्यय हेतु रू0 88,993/- परिवादी को दिलाये जाने का आदेश दिया है जो परिवादी की ओर से प्रस्तुत की गई रसीदों के आधार पर है। 8. अपील में एक बिन्दु यह लिया गया है कि बीमा कम्पनी को Zovirox इंजेक्शन प्रयोग करने की रिपोर्ट दी है जब कि यह इंजेक्शन हरपीस या चेचक के मरीज को दी जाती है। परिवादी को ऐसी कोई बीमारी नहीं थी। इस सम्बन्ध में यह तथ्य उल्लेखनीय है कि परिवादी ने ऑपरेशन के लिए दवाओं के धनराशि की मांग की है जो दवा Zovirox के सम्बन्ध में w.w.w.medicin.com में प्रदान किया गया है कि उपरोक्त दवा वायरस के इंफेक्शन के लिए दी जाती है। परिवादी द्वारा यह कहा गया है कि उसका हाइड्रोसील का ऑपरेशन हुआ था। अत: उक्त दवा ऑपरेशन के समय वायरस का इंफेक्शन हो जाने में दिया जाना सम्भव है। बिना किसी चिकित्सीय आख्या के यह मान लेना उचित नहीं है कि परिवादी को गलत दवा दी गई अथवा परिवादी ने फर्जी रूप से उक्त दवा के पर्चे दाखिल किए हैं।
9. अपील में एक आधार यह भी लिया गया है कि परिवादी ने गुरूनानक हॉस्पिटल में दि0 21.01.2010 से दि0 23.01.2010 तक भर्ती होना बताया है जब कि उसके द्वारा दि0 09.03.2011 की डिस्चार्ज समरी प्रस्तुत की गई है तथा दि0 09.03.2011 को उक्त दवा Zovirox लिया जाना परिलक्षित होता है, किन्तु दवाओं के पर्चों की प्रतिलिपियां जो संलग्नक 03 के रूप में प्रस्तुत की गई हैं इन सब के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि ये दवायें दि0 16.09.2010 से लेकर दि0 25.11.2010 के मध्य लिया जाना परिलक्षित है। वर्ष 2011 का कोई कैशमेमो अभिलेख पर उपलब्ध नहीं है, न ही विपक्षी द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
10. विपक्षी की ओर से एक तर्क यह भी प्रस्तुत किया गया कि इंवेस्टीगेटर को इलाज करने वाले सर्जन ने लिखकर तथा टेलीफोन से सूचित किया था कि Zovirox के स्थान पर वास्तव में इंजेक्शन Montaz दिया गया था और दवा Zovirox लिपिकीय त्रुटि के कारण लिखी गई। विपक्षी का यह मात्र अभिकथन है। इसके सम्बन्ध में कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। विपक्षी की ओर से एक कथन यह भी प्रस्तुत किया गया कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग को परिवाद निर्णीत करने का कोई स्थानीय क्षेत्राधिकार नहीं है, किन्तु यह तर्क भी उचित नहीं है। विपक्षी सं0- 1 रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 कटिया टोला, शाहजहांपुर के द्वारा बीमा पालिसी दिया जाना परिवादी ने कथन किया है, अत: बीमा शाहजहांपुर की शाखा द्वारा किए जाने के कारण स्थानीय क्षेत्राधिकार जिला उपभोक्ता आयोग, शाहजहांपुर को है। विपक्षी की ओर से एक तर्क यह भी प्रस्तुत किया गया है कि परिवादी ने चिकित्सीय व्यय का कोई प्रमाण नहीं दिया है। अत: उक्त धनराशि प्रदान किया जाना उचित नहीं है। इस सम्बन्ध में विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग के निर्णय पृष्ठ 03 के पांचवें प्रस्तर में यह अंकित है कि परिवादी ने डॉ0 के0पी0 गुप्ता एवं गुरूनानक हॉस्पिटल तथा एस्कार्ट इंस्टीट्यूट द्वारा जारी सभी प्रपत्रों की छायाप्रतियां साक्ष्य के रूप में दाखिल की हैं। उक्त प्रस्तर में विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने परिवादी द्वारा चिकित्सीय व्यय के विवरण की पुष्टि की है जो 88,993/-रू0 होती है। अत: विपक्षी का यह तर्क भी चलने योग्य नहीं है। चिकित्सीय व्यय का विवरण परिवादी की ओर से नहीं दिया गया।
11. उपरोक्त विवरण के आधार पर अपील में उठाये गए बिन्दु बलहीन हैं, अत: अपील सं0- 2522/2013 निरस्त किए जाने योग्य एवं प्रश्नगत निर्णय व आदेश दि0 10.10.2013 पुष्ट किए जाने योग्य है।
12. अपील सं0- 1240/2014 के माध्यम से निष्पादनवाद सं0- 06/2014 में पारित आदेश दि0 29.05.2014 को चुनौती दी गई है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 को कारावास एवं अर्थदण्ड के रूप में दो-दो हजार रूपये दिलवाये जाने के निर्देश दिए हैं। उक्त अपील के सम्बन्ध में यह तर्क प्रस्तुत किए गए हैं कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने विपक्षी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 को कारावास एवं जुर्माने के दण्डादेश दिए हैं जब कि धारा 27ए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार किसी व्यावसायिक (Trader) अथवा किसी (Person) व्यक्ति को सदैव जुर्माना किया जा सकता है, अत: आदेश गलत है। विपक्षी रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कम्पनी को इस सम्बन्ध में नोटिस प्रेषित किए गए थे, किन्तु उन्हें कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुए हैं। अत: निष्पादन प्रक्रिया में उन्हें गलत प्रकार से कारावास एवं दण्डादेश के आदेश दिए गए हैं।
13. विपक्षी बीमा कम्पनी द्वारा यह भी कथन किया गया है कि प्रश्नगत आदेश के निष्पादन के साथ-साथ अपील भी संस्थित की गई थी। अपील संस्थित हो जाने से यह उपधारणा ली जा सकती है कि आदेश का अनुपालन किया जाना अपील के लम्बित रहते न्यायोचित नहीं है। अपील के लम्बित रहने को नजरंदाज करते हुए विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने दण्डादेश का आदेश पारित किया है, अत: प्रश्नगत आदेश दि0 29.05.2014 अपास्त किए जाने योग्य है।
14. हमने परिवादी के विद्वान अधिवक्ता श्री शरद कुमार वैश एवं विपक्षीगण रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 के विद्वान अधिवक्ता श्री महेन्द्र कुमार मिश्रा को सुना। प्रश्नगत निर्णय व आदेश तथा पत्रावली पर उपलब्ध अभिलेखों का सम्यक परिशीलन किया गया।
15. प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग ने प्रश्नगत आदेश में अंकित किया है कि विपक्षीगण को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा के अंतर्गत नोटिस जारी किए गए थे। रजिस्टर्ड डाक द्वारा नोटिस भेजे जाने के बावजूद भी विपक्षी बीमा कम्पनी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ और न ही निर्णय का अनुपालन किया गया।
16. विपक्षी बीमा कम्पनी की ओर से कथन किया गया है कि उनको विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा प्रेषित की गई नोटिस प्राप्त नहीं हुई थी, अत: उन्हें सुनवाई का कोई अवसर नहीं दिया गया। उक्त तर्क के सम्बन्ध में मा0 उच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय गाजियाबाद डेवलपमेंट अथारिटी बनाम यूनियन आफ इंडिया तथा अन्य प्रकाशित 2003(4) A.W.C. पृष्ठ 3078 इस सम्बन्ध में दिशा-निर्देशन देता है, जिसमें मा0 उच्च न्यायालय द्वारा प्रस्तर 22 में यह निर्णय पारित किया गया है कि-
''The proceedings under Section 27, as stated above, are really in the nature of civil contempt proceeding. Hence, the only procedure required in these proceedings is that the principles of natural justice should be complied with."
17. मा0 उच्च न्यायालय के उपरोक्त निर्णय से स्पष्ट है कि विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग दण्डादेश पारित करने के पूर्व सुनवाई का अवसर विपक्षी को दिया जाना था जो नहीं दिया गया, अत: इस स्तर पर प्रश्नगत आदेश दि0 29.05.2014 अपास्त होने योग्य है एवं अपील स्वीकार किए जाने योग्य है।
18. उपरोक्त विवेचना के आधार पर अपील सं0- 1240/2014 स्वीकार किए जाने योग्य एवं सम्बन्धित अपील सं0- 2522/2013 निरस्त किए जाने योग्य है।
आदेश
19. अपील सं0- 2522/2013 निरस्त की जाती है तथा सम्बन्धित अपील सं0- 1240/2014 स्वीकार की जाती है एवं प्रश्नगत आदेश दिनांकित 29.05.2014 जो निष्पादनवाद सं0- 06/2014 में पारित किया गया है उसे अपास्त किया जाता है। विद्वान जिला उपभोक्ता आयोग को निर्देशित किया जाता है कि वे निष्पादनवाद सं0- 06/2014 के विपक्षीगण रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कम्पनी आदि को सुनवाई का अवसर देते हुए इस सम्बन्ध में पुन: आदेश पारित करें।
अपील में उभयपक्ष अपना-अपना व्यय स्वयं वहन करेंगे।
प्रस्तुत अपील सं0- 2522/2013 रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कं0लि0 व 03 अन्य बनाम चन्द्रवीर गुप्ता में धारा 15 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अपीलार्थीगण द्वारा जमा धनराशि अर्जित ब्याज सहित इस निर्णय व आदेश के अनुसार जिला उपभोक्ता आयोग को निस्तारण हेतु प्रेषित की जावे।
इस निर्णय व आदेश की मूल प्रति अपील सं0- 2522/2013 में रखी जाए एवं इसकी प्रमाणित प्रतिलिपि सम्बन्धित अपील सं0- 1240/2014 में रखी जाए।
आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय व आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।
(राजेन्द्र सिंह) (विकास सक्सेना)
सदस्य सदस्य
निर्णय आज खुले न्यायालय में हस्ताक्षरित, दिनांकित होकर उद्घोषित किया गया।
(राजेन्द्र सिंह) (विकास सक्सेना)
सदस्य सदस्य
शेर सिंह, आशु0,
कोर्ट नं0-3