Uttar Pradesh

StateCommission

A/739/2019

L.I.C. Of India - Complainant(s)

Versus

Brijesh Pal - Opp.Party(s)

Arvind Tilhari

01 Feb 2023

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/739/2019
( Date of Filing : 10 Jun 2019 )
(Arisen out of Order Dated 27/04/2019 in Case No. CC/72/2014 of District Mathura)
 
1. L.I.C. Of India
Lucknow
Lucknow
up
...........Appellant(s)
Versus
1. Brijesh Pal
Mathura
Mathura
up
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR PRESIDENT
 
PRESENT:
 
Dated : 01 Feb 2023
Final Order / Judgement

( मौखिक )

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ।

 

अपील संख्‍या :739/2019

 

    लाइफ इंश्‍योरेंस कार्पोरेशन आफ इण्डिया ब्रांच आफिस-नं0-2, डैम्‍पीयर नगर संग्रहालय के पास, जिला-मथुरा, द्वारा सेक्रेटरी (लीगल), जोनल आफिस लीगल सेल, 6th  फ्लोर, जीवन भवन, फेज-।।, हजरतगंज, लखनऊ।

    डिवीजनल मैनेजर, एल0आई0सी0 आफ इण्डिया जीवन प्रकाश, मसूदाबाद , जी0टी0 रोड, अलीगढ़ द्वारा सेक्रेटरी (लीगल) जोनल आफिस लीगल सेल, 6th  फ्लोर, जीवन भवन, फेज-।।, हजरतगंज, लखनऊ।

                          अपीलार्थी/विपक्षी

                 

ब्रजेश पाल ऊर्फ विजय कुमार पुत्र श्री कुमर पाल निवासी-पाली पोस्‍ट भरनकला, जिला मथुरा।

प्रत्‍यर्थी/परिवादी

समक्ष  :-

     1-मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार,       अध्‍यक्ष।

     उपस्थिति :

     अपीलार्थी  की ओर से उपस्थित-   श्री अरविन्‍द तिलहरी।

     प्रत्‍यर्थी  की ओर से उपस्थित-         श्री विपिन कुमार मिश्रा।

दिनांक :01-02-2023

मा0 न्‍यायमूर्ति श्री अशोक कुमार, अध्‍यक्ष  द्वारा उदघोषित निर्णय

     परिवाद संख्‍या-72/2014 ब्रजेश पाल ऊर्फ विजय कुमार बनाम प्रबन्‍धक महोदय, भारतीय जीवन बीमा निगम व एक अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता आयोग, मथुरा द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनां‍क 27-04-2019 के विरूद्ध प्रस्‍तुत अपील उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत इस न्‍यायालय के सम्‍मुख प्रस्‍तुत की गयी है।

 

 

-2-

     आक्षेपित निर्णय एवं आदेश के द्वारा विद्धान जिला आयोग ने परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार करते हुए निम्‍न आदेश पारित किया है :-

     ‘’ परिवादी का परिवाद अंशत: विपक्षी भारतीय जीवन बीमा निगम के विरूद्ध स्‍वीकृत किया जाता है। विपक्षी भारतीय जीवन बीमा निगम को आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्‍नगत पालिसी बीमा गोल्‍ड से संबंधित विद्यमानता हितलाभ का भुगतान समय-समय पर नियमानुसार करें, एवं परिपक्‍वता अवधि में नियमानुसार देय धनराशि लायल्‍टी एडिशन सहित अदा की जावे।

     प्रश्‍नगत बीमा पालिसी की शर्तों के अनुसार स्‍थायी अपंगता के परिप्रेक्ष्‍य में धनराशि का भुगतान नियमत: मासिक आधार पर फोरम के निर्णय की तिथि से 30 दिन में किया जाना सुनिश्चित करें।

     विपक्षी भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा परिवादी को मु0 5,000/- मानसिक क्षति व मु0 5,000/- वाद व्‍यय के रूप में भी अदा किये जायेंगे।

     आदेश की प्रति उभयपक्ष को नियमानुसार नि:शुल्‍क प्रदान की जावे।‘’

     विद्धान जिला आयोग के आक्षेपित निर्णय व आदेश से क्षुब्‍ध होकर परिवाद के विपक्षी बीमा कम्‍पनी की ओर से यह अपील प्रस्‍तुत की गयी है।

     अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार है कि परिवादी ने विपक्षीगण से मु0 10,00,000/-रू0 की दुर्घटना हित लाभ सहित दिनांक 28-06-2009 को पालिसी ली थी जिसकी त्रैमासिक किश्‍त मु0 9025/-रू0 थी। परिवादी दिनांक 28-12-2012 को सायं 6.15 बजे सड़क के किनारे पटरी पर खड़े होकर वाहन का इन्‍तजार कर रहा था कि तभी मथुरा की तरफ से आती हुई मोटर साईकिल के चालक ने तेजी व लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते

 

-3-

हुए परिवादी को टक्‍कर मार दी, जिससे परिवादी गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे अस्‍पताल में भर्ती कराया गया किन्‍तु परिवादी की दोनों ऑंखों की रोशनी चली गयी और सी0एम0ओर0 मथुरा द्वारा उसे 100 प्रतिशत विकलांगता का प्रमाण पत्र भी जारी किया गया। समस्‍त औपचारिकताऍं पूर्ण करते हुए बीमा कम्‍पनी के यहॉं बीमा क्‍लेम प्रस्‍तुत किया गया किन्‍तु बीमा कम्‍पनी द्वारा क्‍लेम की धनराशि अदा नहीं की गयी। परिवादी द्वारा अधिवक्‍ता के माध्‍यम से विधिक नोटिस भेजी गयी जिसका कोई उत्‍तर विपक्षीगण द्वारा नहीं दिया गया और न ही बीमा क्‍लेम की धनराशि ही अदा की गयी। अत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद जिला आयोग के समक्ष योजित किया है।

     विपक्षीगण की ओर से संयुक्‍त प्रतिवाद पत्र प्रस्‍तुत करते हुए कथन किया गया कि परिवादी को मु0 10,00,000/-रू0 की पालिसी दिनांक 28-06-2009 को जारी की गयी थी तथा शेष कथनों का अस्‍वीकार करते हुए कहा गया कि पालिसी लैप्‍स थी अत: विधिक रूप से इसकी अदायगी नहीं की जा सकती है। विपक्षीगण की ओर से यह भी कथन किया गया कि दुर्घटना के समय परिवादी अत्‍यधिक शराब का सेवन किये हुए था इस प्रकार स्‍वयं पालिसी शर्तों का उल्‍लंघन किया गया है। परिवादी उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है तथा इस फोरम को परिवाद की सुनवाई का क्षेत्राधिकार नहीं है।

     विद्धान जिला आयोग द्वारा उभयपक्ष के विद्धान अधिवक्‍तागण को विस्‍तार से सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों का भली-भॉंति परिशीलन करने के उपरान्‍त विपक्षी बीमा कम्‍पनी की सेवा में कमी पाते हुए प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश पारित किया है जिसका उल्‍लेख ऊपर किया जा चुका है।  

 

 

-4-

     अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी की ओर से विद्धान अधिवक्‍ता श्री  अरविन्‍द तिलहरी उपस्थित। प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्धान अधिवक्‍ता श्री विपिन कुमार मिश्रा उपस्थित।

     अपीलार्थी की विद्धान अधिवक्‍ता का तर्क है कि विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश साक्ष्‍य एवं विधि के विरूद्ध है। अत: अपील स्‍वीकार करते हुए जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश को निरस्‍त किया जावे।

     प्रत्‍यर्थी के विद्धान अधिवक्‍ता का तर्क है कि विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश साक्ष्‍य एवं विधि के अनुसार है जिसमें हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है। तदनुसार अपील निरस्‍त की जावे।

     मेरे द्वारा उभयपक्ष के विद्धान अधिवक्‍ता के तर्क को विस्‍तारपूर्वक सुना गया तथा पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रपत्रों एवं जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश का भली-भॉंति परिशीलन एवं परीक्षण किया गया।

     उभयपक्ष के विद्धान अधिवक्‍तागण को सुनने तथा पत्रावली के परिशीलनोंपरान्‍त मेरे विचार से विद्धान जिला आयोग द्वारा समस्‍त बिन्‍दुओं पर गहनतापूर्वक विचार करते हुए विधि अनुसार निर्णय पारित किया गया है, जिसमें हस्‍तक्षेप हेतु उचित आधार नहीं है। तदनुसार अपील निरस्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश

     अपील निरस्‍त की जाती है। विद्धान जिला आयोग द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश की पुष्टि जाती है।

 

-5-

 

     अपीलार्थी बीमा कम्‍पनी को आदेशित किया जाता है कि वह इस निर्णय एवं आदेश का अनुपालन निर्णय से 30 दिन की अवधि में किया जाना सुनिश्चित करें।

     अपील में उभयपक्ष अपना अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

     आशुलिपिक से अपेक्षा की जाती है कि वह इस निर्णय/आदेश को आयोग की वेबसाइट पर नियमानुसार यथाशीघ्र अपलोड कर दें।

    

 

(न्‍यायमूर्ति अशोक कुमार)

                             अध्‍यक्ष                                     

प्रदीप मिश्रा , आशु0 कोर्ट नं0-1

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE ASHOK KUMAR]
PRESIDENT
 

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