Uttar Pradesh

StateCommission

A/2001/1476

Ram Nives Yadave - Complainant(s)

Versus

Brijesh Kunwar Singh - Opp.Party(s)

B K Updhyay

04 Nov 2015

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2001/1476
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Ram Nives Yadave
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Brijesh Kunwar Singh
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Jugul Kishor PRESIDING MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
ORDER

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

मौखिक

अपील संख्‍या-1476/2001

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, कुशीनगर द्वारा परिवाद सं0-380/2001 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 07.07.2001 के विरूद्ध)

 

रामनिवास यादव, ग्राम प्रधान, ग्राम सभा धोधरही, पो0 लक्ष्‍मीगंज, जिला कुशीनगर।

     अपीलार्थी/विपक्षी सं0-1

बनाम्

1. बृजेश कुंवर सिंह पुत्र श्री विभूति सिंह, सा0 धोधरी, पो0 लक्ष्‍मीगंज, जिला कुशीनगर।

2. हरि तिवारी, प्रधानाध्‍यापक, प्राथमिक पाठशाला धोधरी, पो0 लक्ष्‍मीगंज, जिला कुशीनगर।

3. राधारमण तिवारी, एसडीआई, ब्‍लाक रामकोला, जिला कुशीनगर।

4. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कुशीनगर, स्‍थान पडरौना।                                   प्रत्‍यर्थीगण/परिवादी/विपक्षी सं0-2 त 4

समक्ष:-

1. माननीय श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य।

2. माननीय श्री जुगुल किशोर, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित         : श्री बी0के0 उपाध्‍याय, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थीगण की ओर से उपस्थित        : कोई नहीं।

दिनांक 04.11.2015

माननीय श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

       प्रस्‍तुत अपील, जिला मंच, कुशीनगर द्वारा पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 07.07.2001 के विरूद्ध योजित की गयी है। अपीलार्थी की ओर से श्री बी0के0 उपाध्‍याय विद्वान अधिवक्‍ता उपस्थित हैं। उनके तर्क सुने गये एवं पत्रावली का परिशीलन किया गया। प्रत्‍यर्थीगण की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि प्रश्‍नगत मामलें में प्रत्‍यर्थी सं0-1 अपीलार्थी का उपभोक्‍ता होना साबित नहीं है, क्‍योंकि अपीलार्थी ने प्रत्‍यर्थी सं0-1 से कोई प्रतिफल की प्राप्ति नहीं की है। प्रश्‍गनत मामलें में उपभोक्‍ता विवाद नहीं है। जिला मंच द्वारा बिना क्षेत्राधिकार के प्रश्‍नगत निर्णय पारित किया गया है।

      उल्‍लेखनीय है कि प्रत्‍यर्थी सं0-1/परिवादी ने अपीलार्थी एवं विपक्षी सं0-2 त 4 के विरूद्ध परिवाद इस अनुतोष हेतु योजित किया था कि विपक्षीगण को निर्देशित किया जाये कि वह परिवादी/प्रत्‍यर्थी सं0-1 का फार्म सम्मिलित करते हुए योग्‍यता के आधार पर परिवादी/प्रत्‍यर्थी सं0-1 की नियुक्ति बतौर शिक्षा मित्र करें तथा रू0 20,000/- शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा के एवज में बतौर क्षतिपूर्ति अदा करें। परिवाद के अभिकथनों में परिवादी/प्रत्‍यर्थी सं0-1 का यह कथन नहीं है कि उसने कोई वस्‍तु प्रतिफल अदा करके विपक्षीगण से क्रय की है अथवा प्रतिफल अदा करके कोई सेवा प्राप्‍त की है। उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2 (घ) में उपभोक्‍ता को परिभाषित किया गया है, जो निम्‍नवत् है :-

 

 

 

-2-

      '' (i)   किसी ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका संदाय लिया गया है या वचन दिया गया है या भागत: संदाय किया गया है, और भागत: वचन दिया गया है, या किसी आस्‍थगित संदाय की पद्धति के अधीन किसी माल का क्रय करता है, और इसके अन्‍तर्गत ऐसे किसी व्‍यक्ति से भिन्‍न, जो ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका संदाय किया गया है या वचन दिया गया है या भागत: संदाय किया गया है या भागत: वचन दिया गया है या आस्‍थगित संदाय की पद्धति के अधीन माल का क्रय करता है या ऐसे माल का कोई प्रयोगकर्ता भी है, जब ऐसा प्रयोग ऐसे व्‍यक्ति के अनुमोदन से किया जाता है किन्‍तु इसके अन्‍तर्गत ऐसा कोई व्‍यक्ति नहीं है जो ऐसे माल को पुन: विक्रय या किसी वाणिज्यिक प्रयोजन के के लिए अभिप्राप्‍त करता है : और

      (ii)   किसी ऐसे प्रतिफल के लिए जिसका संदाय किया गया है या वचन दिया गया है या भागत: संदाय किया गया है और भागत: वचन दिया गया है, या किसी आस्‍थ‍गित संदाय की पद्धति के अधीन सेवाओं को (भाड़े पर लेता है या उपभोग करता है) और इसके अन्‍तर्गत ऐसे किसी व्‍यक्ति से भिन्‍न जो ऐसे किसी प्रतिफल के लिए जिसका संदाय किया गया है या वचन दिया गया है और भागत: संदाय किया गया है और भागत: वचन दिया गया है या किसी आस्‍थगित संदाय की पद्धति के अधीन सेवाओं को (भाड़े पर लेता है या उपभोग करता है) ऐसी सेवाओं का कोई हिताधिकारी भी है जब ऐसी सेवाओं का उपयोग प्रथम वर्णित व्‍यक्ति के अनुमोदन से किया जाता है (लेकिन इसमें कोई ऐसा व्‍यक्ति शामिल नहीं है, जो ऐसी सेवाओं को किसी वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए उपाप्‍त करता है:) ''

 

      ऐसी परिस्थिति में परिवादी/प्रत्‍यर्थी सं0-1 का अधिनियम के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता होना प्रमाणित नहीं है और न ही पक्षकारों के मध्‍य कोई उपभोक्‍ता विवाद होना प्रमाणित है। विद्वान जिला मंच द्वारा पारित निर्णय क्षेत्राधिकार के अभाव में पारित किया गया है, अत: निरस्‍त होने योग्‍य है। तदनुसार अपील स्‍वीकार होने योग्‍य है।

आदेश

अपील स्‍वीकार की जाती है। प्रश्‍नगत निर्णय/आदेश दिनांक 07.07.2001 अपास्‍त करते हुए परिवाद निरस्‍त किया जाता है।

पक्षकारान इस अपील का व्‍यय स्‍वंय अपना अपना वहन करेंगें।

 

(उदय शंकर अवस्‍थी)                          (जुगुल किशोर)

            पीठासीन सदस्‍य                                  सदस्‍य

 

 

 

लक्ष्‍मन, आशु0

    कोर्ट-2

 
 
[HON'BLE MR. Jugul Kishor]
PRESIDING MEMBER

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