राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0 प्र0, लखनऊ
पुनरीक्षण संख्या-170/2003
(सुरक्षित)
(जिला उपभोक्ता फोरम, गाजियाबाद द्वारा परिवाद संख्या-1397/1993 में पारित आदेश दिनांक 15-07-2003, 13-08-2003 एवं 05.05.1994 के विरूद्ध)
- Shri Ravi Raj Dixit, Chauki Prabhari, Near Old Bus Stand, Sihani Gate, Ghaziabad.
- Ghaziabad Development Authority, Ghaziabad through its Secretary
अपीलार्थी/विपक्षीगण
बनाम
Brijesh Bihari Lal, Resident of SD-53, Shastri Nagar, Ghaziabad.
प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1. माननीय श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2. माननीय श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य।
1- पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उपस्थित : श्री सर्वेश कुमार शर्मा।
2- प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक: 03-11-2015
माननीय श्रीमती बाल कुमारी सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
वर्तमान पुनरीक्षण विद्धान जिला फोरम, गाजियाबाद द्वारा परिवाद संख्या-1397/1993 ब्रजेश बिहारी लाल बनाम जी0डी0ए0 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 05.05.1994 के संदर्भ में निष्पादन कार्यवाही के दौरान पारित आदेश दिनांक 15-07-2003 एवं दिनांक 13-08-2003 से क्षुब्ध होकर उपरोक्त आदेशों को अपास्त किये जाने हेतु प्रस्तुत किया गया है।
पुनरीक्षणकर्ता की ओर से विद्धान अधिवक्ता श्री सर्वेश कुमार शर्मा उपस्थित आए। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं। पुनरीक्षणकर्ता के विद्धान अधिवक्ता को सुना गया और प्रश्नगत आदेश का परिशीलन किया गया।
दिनांक 15-07-2003 को निम्न आदेश जिला मंच द्वारा पारित किया गया-
'' पुकारा गया। कोरम पूरा है। आज विपक्षी के सचिव श्री यू0 एन0 ठाकुर को जमानती वारण्ट द्वारा धारा-27 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तत समन द्वारा बुलाया गया था। जारी जमानती वारंट पर पुलिस चौकी प्रभारी पुरानी बस अड्डा थाना सिहानी गेट श्री आर0आर0 दीक्षित की निम्न आशय की रिपोर्ट है।
महोदय निवेदन है कि आर0 आर0 दीक्षित बी0 डब्लू की तामील हेतु सचिव महोदय के कार्यालय में गया एवं उनसे मिलकर बी0 डब्लू को तामील कराना चाहा एवं मुचलका भरना चाहा तो उन्होंने तामील करनेसे मना कर दिया तथा कहा कि अदम तामील वापस भेज दे। मैं मुचलका नहीं भरता।
अत: बी0 डब्लू अदम तामील वापस किया जाता है। रिपोर्ट सेवा में प्रस्तुत है।
श्री आर0 आर0 दीक्षित को फोरम द्वारा जारी वारंट तामील न करने के लिए कन्टैप्ट का नोटिस इस आशय का भेजा जाए कि उनके विरूद्ध मामले को न्यायालय की मानि-हानि के लिए माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय/स्टेट फोरम को क्यों न रिफर कर दिया जाए। श्री धर्मेन्द्र चौहान थाना सिहानी गेट ने आर0 आर0 दीक्षित की उक्त रिपोर्ट को इस फोरम में प्रस्तुत किया है अत: उनके विरूद्ध भी न्यायालय की अवमानना के लिए मामले को उच्चतर न्यायालय को भेजने का नोटिस जारी किया जाए।
उपरोक्त दोनों पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध अलग-अलग मिसलीनियस की पत्रावली मनाई जाए। चूंकि श्री यू0एन0 ठाकुर ने जमानती वारेण्ट लेने से मना कर दिया और पुलिस ने उनके विरूद्ध जारी जमानती वारंट को विधिवत तामील नहीं किया है।
अत: श्री यू0एन0 ठाकुर को गैर जमानती वारण्ट दिनांक 29-07-2003 के लिए जारी हो। आज जी0डी0ए0 के विद्धान अधिवक्ता श्री विवेक सिंह उपस्थित नहीं है। उनकी ओर से कोई स्थगन भी नहीं मांगा गया है।
पत्रावली दिनांक 29-07-2003 को श्री यू0एन0 ठाकुर के विचारण हेतु पेश हो।'' एवं उक्त वर्णित आदेश की निरन्तरता में दिनांक 13-08-2003 को इस आशय का आदेश पारित किया गया कि तत्कालीन सचिव जी0डी0ए0 यू0एन0 ठाकुर के संदर्भ में विचारण हेतु तिथि नियतकी गयी।
पुनरीक्षणकर्ता के विद्धान अधिवक्ता द्वारा राज्य उपभोक्ता आयोग, उ0प्र0, लखनऊ द्वारा पुनरीक्षण संख्या-41/2003 गाजियाबाद विकास प्राधिकरण बनाम श्रीपाल दीक्षित में दिनांक 16-07-2013 को निर्णय पारित करते हुए यह मत अभिव्यक्त किया गया है कि,
''In the light of the aforesaid discussion we have found in this case before us that the District Consumer Forum Ghaziabad has not complied with the provisions of see 27 Consumer Protection Act correctly nor the provisions of Code of criminal Procedure have been applied as are provided to be applied to convict any defaulter under the Consumer Protection Act committing offence wherein all the offences under the Consumer Protection Act have to be tried summarily by the District Consumer Forum."
उक्त नजीर में इस आशय का स्पष्ट उल्लेख है कि वर्तमान प्रकरण में सर्वप्रथम पुनरीक्षणकर्ता की उपस्थिति निष्पादति की जाना चाहिए थी तत्पश्चात उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना चाहिए था और तत्पश्चात दण्ड प्रक्रिया संहिता के प्राविधानों को देखते हुए समरी ट्रायल के मामले को निर्णी किया जाना चाहिए था, जिसे नहीं किया गया है। उपरोक्त वर्णित सिद्धान्त को देखते हुए जिला मंच द्वारा पारित दण्डादेश विधि अनुकूल नहीं है, जो अपास्त किये जाने योग्य है। पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए जिला मंच द्वारा पारित दण्डादेश निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश
पुनरीक्षण स्वीकार करते हुए विद्धान जिला फोरम, गाजियाबाद द्वारा परिवाद संख्या-1397/1993 में पारित आदेश दिनांक 15-07-2003 एवं आदेश दिनांक 13-08-2003 अपास्त किया जाता है।
( राम चरन चौधरी ) ( बाल कुमारी )
पीठासीन सदस्य सदस्य
कोर्ट नं0-5 प्रदीप मिश्रा