Uttar Pradesh

StateCommission

A/1999/2762

Post Master Head Post Office - Complainant(s)

Versus

Brig Bihari Singh - Opp.Party(s)

Km. Asha Chaudhary

17 Mar 2016

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/1999/2762
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District )
 
1. Post Master Head Post Office
Maharaj Ganj
...........Appellant(s)
Versus
1. Brig Bihari Singh
Kushi Nagar
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha PRESIDING MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 17 Mar 2016
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(सुरक्षित)                                                                                  

अपील संख्‍या :2762/1999

(जिला मंच, देवरिया द्धारा परिवाद सं0-909/1997 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 10.8.1999 के विरूद्ध)

1          Sr. Supdt. Post Offices Maharaj Ganj,

2          Post Master, Head Post Office, Maharaj Ganj,

                                                                    ........... Appellants/Opp. Parties.

Versus      

1          Brig Bihari Singh, S/o Umaro Singh, R/o Padari Mahadiya, Khajuri Bazar, Padrauna (Distt. Kushi Nagar)

                                        .......... Respondent/Complainant.

2          Avadh Behari Singh, S/o Umaro Singh, Khajuri Bazar, Padrauna (Distt. Kushi Nagar)           

                      .......... Respondent/Opp. Party.

समक्ष :-

मा0 श्री जितेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा, पीठासीन सदस्‍य

मा0 श्री संजय कुमार, सदस्‍य

अपीलार्थी के अधिवक्‍ता  :   डॉ0 उदय वीर सिंह

प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता    :   कोई नहीं।

दिनांक :17-8-2016

मा0 श्री जे0एन0 सिन्‍हा, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

परिवाद सं0-906/1997 बृज बिहारी सिंह बनाम अवध बिहारी सिंह व अन्‍य में जिला मंच, देवरिया द्वारा दिनांक 10.8.1999 को इस आशय का आदेश पारित किया गया कि विपक्षी सं0-3/अपीलार्थी परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में रू0 4,000.00 दो माह में अदा कर दें और यदि ऐसा नहीं करता है, तो वह दिनांक 01.9.1999 से 12 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज की दर से ब्‍याज भी पाने का अधिकारी होगा। प्रश्‍नगत निर्णय में इस आशय का भी उल्‍लेख किया गया है कि यदि परिवादी अपना दावा सक्षम व्‍यवहार न्‍यायालय में प्रस्‍तुत करेगा, तो उस स्थिति में इस वाद में जितना समय लगा है, उसकी छूट नया दावा प्रस्‍तुत करने में उसे मिल जायेगा और इस प्रकार परिवादी का वाद अंशत: स्‍वीकार किया गया। उपरोक्‍त वर्णित आदेश से क्षुब्‍ध होकर विपक्षी सं0-3/अपीलार्थी की ओर से वर्तमान अपील योजित की गई है।

 

 

 

-2-

अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदय वीर सिंह उपस्थित आये। प्रत्‍यर्थी पक्ष की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। जबकि प्रत्‍यर्थी को पंजीकृत डाक के माध्‍यम से सूचना दी गई थी एवं बिना तामीला भी पंजीकृत पत्र कार्यालय का प्राप्‍त नहीं हुआ है, अत: प्रत्‍यर्थी पर सूचना पर्याप्‍त स्‍वीकार की गई एवं अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता को विस्‍तार पूर्वक सुना गया तथा प्रश्‍नगत निर्णय व उपलब्‍ध अभिलेखों का गम्‍भीरता से परिशीलन किया गया।

प्रकरण संक्षेप में इस प्रकार है कि परिवादी एवं विपक्षी सं0-1 ने संयुक्‍त रूप से दिनांक 03.8.1990 को रू0 40,000.00 का किसान विकास पत्र विपक्षी सं0-3 खरीदा था, जिसकी परिपक्‍वता दिनांक 03.02.1996 को होनी थी एवं बटवारा होने पर विपक्षी सं0-1 और परिवादी अलग-अलग रहने लगे। विपक्षी सं0-1 परिवादी का बडा भाई है, इसलिए उसका किसान विकास पत्र विपक्षी सं0-1 के पास था एवं वर्ष-1993 में परिवादी ने विपक्षी सं0-1 से किसान विकास पत्र के संबंध में पूंछने पर उसे बताया कि उपरोक्‍त किसान विकास पत्र कही खो गया है तथा परिवादी ने दिनांक 04.8.1993 को विपक्षी सं0-3 को लिखित सूचना दी कि उपरोक्‍त किसान विकास पत्र का भुगतान विपक्षी सं0-1 व किसी अन्‍य व्‍यक्ति को न करें, परन्‍तु दिनांक 06.10.1993 को विपक्षी सं0-1 के मेल में आकर गलत ढंग से भुगतान कर दिया गया। अत: परिवादी द्वारा विपक्षीगण के विरूद्ध किसान विकास पत्र की धनराशि मय ब्‍याज एवं क्षतिपूर्ति का अनुतोष प्राप्‍त किये जाने हेतु जिला मंच के समक्ष परिवाद प्रस्‍तुत किया गया है। जिला मंच द्वारा उभय पक्ष के अभिवचन एवं उपलब्‍ध अभिलेखों पर विचार करते हुए विपक्षी सं0-3 की सेवा में कमी के दृष्टिगत उपरोक्‍त वर्णित आदेश पारित किया गया, जिससे क्षुब्‍ध होकर विपक्षी सं0-3/अपीलार्थी की ओर से वर्तमान अपील योजित की गई है।

जिला मंच द्वारा इस आशय का निष्‍कर्ष दिया गया कि प्रश्‍नगत किसान विकास पत्र संयुक्‍त रूप से प्राप्‍त किया गया था, अत: प्रत्‍येक व्‍यक्ति का कितना हिस्‍सा है, इस संदर्भ में जिला मंच द्वारा कोई निष्‍कर्ष नहीं दिया गया है और यह कहा गया कि पक्षकारान इस संदर्भ में सक्षम व्‍यवहार न्‍यायायल में मामला प्रस्‍तुत करने के लिए स्‍वतंत्र है और जिला मंच द्वारा एक व्‍यक्ति को भुगतान की बावत विपक्षी पोस्‍ट आफिस के कृत्‍य को सही नहीं पाया गया, ऐसी स्थिति में विपक्षी सं0-3 के विरूद्ध रू0 4,000.00 क्षतिपूर्ति का प्रश्‍नगत आदेश पारित कर दिया गया है, जो विधि अनुकूल नहीं

 

-3-

है, क्‍योंकि प्रश्‍नगत किसान विकास पत्र Joiny B  टाइप का प्रमाण पत्र है, जिसमें जिस व्‍यक्ति द्वारा पोस्‍ट आफिस में यह प्रस्‍तुत किया जाता है, तो उस व्‍यक्ति को भुगतान से पोस्‍ट आफिस मना नहीं कर सकता है और ऐसी स्थिति में पोस्‍ट आफिस द्वरा किया गया कृत्‍य विधि अनुकूल है और जिला मंच द्वारा दिया गया निष्‍कर्ष स्‍वीकार किये जाने योग्‍य नहीं है। अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क में बल पाया जाता है। वर्तमान प्रकरण में पीठ इस निष्‍कर्ष पर पहुंचती है कि पोस्‍ट आफिस द्वारा संयुक्‍त रूप से क्रय किये गये मूल किसान विकास पत्र को जिस व्‍यक्ति द्वारा पोस्‍ट आफिस में प्रस्‍तुत किया जाता है और यदि वह क्रेता की श्रेणी में है, तो पोस्‍ट आफिस द्वारा भुगतान किया जाना आवश्‍यक होता है। ऐसी स्थिति में अपीलार्थी/विपक्षी पोस्‍ट आफिस का कृत्‍य सेवा की कमी की श्रेणी में नहीं आता है। तदनुसान प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार करते हुए जिला मंच द्वारा पारित निर्णय/आदेश अपास्‍त किये जाने योग्‍य है।

आदेश

प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार करते हुए जिला मंच, देवरिया द्वारा परिवाद सं0-906/1997 बृज बिहारी सिंह बनाम अवध बिहारी सिंह व अन्‍य में निर्णय/आदेश दिनांक 10.8.1999 अपास्‍त किया जाता है।

 

         (जे0एन0 सिन्‍हा)                    (संजय कुमार)

         पीठासीन सदस्‍य                        सदस्‍य

हरीश आशु.,  

कोर्ट सं0-2

 

 
 
[HON'BLE MR. Jitendra Nath Sinha]
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