समक्ष न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम महोबा
परिवाद सं0-52/2014 उपस्थित- श्री बाबूलाल यादव, अध्यक्ष,
डा0 सिद्धेश्वर अवस्थी, सदस्य,
श्रीमती नीला मिश्रा, सदस्य
श्रीमती निर्मला देवी पत्नी स्व0 श्री द्वारका प्रसाद दीक्षित निवासिनी-मुहल्ला-राजावार्ड तहसील व परगना-कुलपहाड जिला महोबा ....परिवादिनी
बनाम
1.वरिष्ठ शाखा प्रबंधक,(जीवन प्रकाश), पेंशन एवं सामूहिक बीमा इकाई भारतीय जीवन बीमा निगम मण्डल कार्यालय सिविल लाइन 5 वां तल,इलाहाबाद उ0प्र0 ।
2.जिला विधालय निरीक्षक,महोबा जनपद-महोबा .....विपक्षीगण
निर्णय
डा0 सिद्धेश्वर अवस्थी,सदस्य द्वारा उदधोषित
परिवादिनी श्रीमती निर्मला देवी पत्नी स्व0 श्री द्वारका प्रसाद दीक्षित ने यह परिवाद खिलाफ विपक्षीगण सामूहिक बीमा की बीमित धनराशि मु0 1,00,000/- रूपये व अन्य अनुतोष हेतु प्रस्तुत किया है।
संक्षेप में परिवादिनी का कथन इस प्रकार है कि परिवादिनी के स्व0 पति श्री द्वारका प्रसाद दीक्षित की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति दि0 31.12.1976 को जनतंत्र इण्टर कालेज,कुलपहाड में हुई थी और वह अपने सेवाकाल में स्वपदीय दायित्वों का भली भांति निर्वाहन करते रहे और दौरान सेवाकाल में ही दि0 27.02.2008 को उनकी मृत्यु हो गई । नियमानुसार जब किसी कर्मचारी की सेवाकाल के दौरान मृत्यु होती है तो उसे सामूहिक बीमा योजना के अंतर्गत एक लाख रू0 की धनराशि देय होती है लेकिन विपक्षीगण द्वारा परिवादिनी को उसके स्व0 पति की मृत्यु के उपरान्त मात्र बीमा धनराशि के रूप में 10,050/-रू0 प्रदान किये गये । इस संबंध में जब उनसे पूंछा गया तो बताया गया कि जो आपके पति द्वारा जमा धनराशि है वह आपको वापस की जा रही है और आपका क्लेमफार्म भरवाया जायेगा तथा आपको एक लाख रू0 की धनराशि प्रदान की जायेगी । इस संबंध में परिवादिनी ने विपक्षी सं02 को प्रार्थना पत्र दिया,जिस पर उनके द्वारा प्रबंधक/प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड को आदेशित किया गया कि वे परिवादिनी के पति का बीमा प्रकरण तैयार कर एक सप्ताह में विपक्षी सं02 के कार्यालय में भेजें । इस पर उनके द्वारा उसका क्लेमफार्म भरवाकर तथा सभी औपचारिकतायें पूर्ण कर विपक्षी सं02 के पास भेज दिया,जिसे उनके द्वारा निस्तारण हेतु विपक्षी सं01 के पास भेज दिया । विपक्षी सं01 इसमें लगातार कमियां निकालता रहा और कमियों का निस्तारण किया जाता रहा । अंत में विपक्षी सं01 द्वारा परिवादिनी का क्लेमफार्म व उसमें संलग्न सभी कागजों को खो दिया गया तो परिवादिनी ने दूसरा तैयार कराकर विपक्षी सं01 को प्रदान कर दिया गया । दि017.01.2014 को विपक्षी सं01 द्वारा विपक्षी सं02 को पत्र भेजा गया कि स्व0द्वारका प्रसाद दीक्षित की मृत्यु दि022.02.2008 को हुई,जो 60 वर्ष की आयु पूर्ण होने के उपरान्त है,जबकि 60 वर्ष के उपरांत 62 वर्ष की आयु तक जोखिम संरक्षण दि001.04.2009 से लागू है । संलग्न कटौती के विवरण के अनुसार मृतक के जमा बीमा प्रीमियम के बचत अंश का भुगतान पूर्व में किया जा चुका है इसलिये उपरोक्त शर्त परिवादिनी के पति की मृत्यु पर लागू नहीं होती है । इसे परिवादिनी द्वारा संपूर्ण औपचारिकतायें पूरी कर के बीमा दिलाये जाने के संबंध में क्लेम प्रपत्र विपक्षी सं02 द्वारा भेजे जाने के उपरांत भी विपक्षी बीमा कंपनी द्वारा बिना किसी उचित आधार के व्यापारिक कदाचरण करते हुये परिवादिनी का क्लेम को निरस्त कर दिया गया,जिसे उसने घोर सेवा में त्रुटि माना है और गये लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हृत्यु कर जिला अस्पताल ले गबये ऐसी परिस्थितियों में परिवादिनी ने यह परिवाद मा0 फोरम के समक्ष प्रस्तुत किया है।
इसके विरूद्ध विपक्षी सं01 बीमा कंपनी द्वारा जवाबदावा दाखिल किया गया है जिसमें उन्होने परिवादिनी को स्व0 द्वारका प्रसाद दीक्षित की पत्नी होना तथा स्व0 श्री दीक्षित की दिनांक-22.08.2008 को मृत्यु होना स्वीकार किया है तथा उनका सामूहिक बीमा होना एवं इसके संबंध में उनकी मृत्यु के उपरांत उसके बचत अंश की धनराशि परिवादिनी को प्रदान किया जाना स्वीकार किया है तथा अतिरिक्त कथन में कहा है कि उनके द्वारा परिवादिनी के पति के मृत्यु दावा की धनराशि समेकित रूप से 13,377/-रू0 स्वीकृत कर के विपक्षी सं02 जिला विधालय निरीक्षक,महोबा को चेक द्वारा भुगतान किया गया था इस संबंध में विपक्षी सं02 द्वारा परिवादिनी को कितना भुगतान किया गया इसकी जानकारी उनको नहीं है । यह भी कहा गया कि उनके द्वारा परिवादिनी का क्लेमफार्म नहीं खोया गया । आगे उनके द्वारा कहा गया कि मृतक द्वारका प्रसाद दीक्षित की जन्मतिथि 01.08.1947 अंकित है इसके अनुसार दि001.08.2007 को ही वह 60 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके थे और दावा प्रपत्र में उनकी मृत्यु तिथि 22.02.2008 अंकित है तथा नियमानुसार 01.08.2007 के उपरांत परिवादिनी के पति के जीवन पर जोखिम संरक्षण उपलब्ध नहीं था और 60 वर्ष के उपरांत 62 वर्ष की आयु तक जोखिम संरक्षण दि001.04.2009 से लागू है इसलिये उनके द्वारा नियमानुसार परिवादिनी को देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है और उसके द्वारा कोई सेवा में त्रुटि नहीं की गई है। इस कारण परिवादिनी का परिवाद खारिज किये जाने योग्य है ।
विपक्षी सं02 जिला विधालय निरीक्षक,महोबा द्वारा अपना जबाबदावा प्रस्तुत किया गया और उनके द्वारा भी मुख्यत: विपक्षी सं01 के जबाबदावा में किये गये कथनों को दोहराया और कथन किया गया कि उनके द्वारा भुगतान नहीं किया जाना था बल्कि उसके द्वारा परिवादिनी के क्लेमफार्म को अविलम्ब अग्रसारित करके भुगतान हेतु विपक्षी सं02 बीमा कंपनी को प्रेषित किया गया । इस प्रकार उसके द्वारा कोई सेवा में त्रुटि नहीं की गई और उनके द्वारा परिवादिनी के परिवाद को खारिज किये जाने की प्रार्थना की गई है ।
परिवादिनी ने अपने परिवाद के समर्थन में स्वयं का शपथ पत्र कागज सं0-4ग प्रस्तुत किया है तथा अभिलेखीय साक्ष्य में प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड को दिये गये प्रार्थना पत्र की छायाप्रति कागज सं07ग/1,विपक्षी सं02 द्वारा परिवादिनी के संबंध में प्रबंधक/ प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड को भेजे गये पत्र की छायाप्रति कागज सं07ग/2, प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड द्वारा दिये गये प्रमाण पत्र की छायाप्रति 7ग/3, विपक्षी सं01 द्वारा विपक्षी सं02 को लिखे गये पत्र की छायाप्रति कागज सं08ग, विपक्षी सं02 द्वारा परिवादिनी के संबंध में प्रबंधक/ प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड को भेजे गये पत्र की छायाप्रति कागज सं09ग/1,दावा फार्म की छायाप्रति 9ग/2, सामूहिक बीमा कटौती विवरण की छायाप्रति 10ग, स्टेटमेंट ए मंथली क्लेम रजिस्टर की छायाप्रति 11ग व 12ग,मृत्यु प्रमाण पत्र की छायाप्रति 14ग,परिवादिनी के संबंध में प्रबंधक/ प्रधानाचार्य,जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड द्वारा विपक्षी सं02 भेजे गये प्रपत्रों का विवरण की छायाप्रति 15ग व राशन कार्ड की छायाप्रति 16ग दाखिल की गई है ।
विपक्षी सं01 की और से शपथ पत्र द्वारा श्री ज्ञानप्रकाश पाण्डे,प्रबंधक,विधि एवं आ0सं0वि0 भारतीय जीवन बीमा निगम,कानपुर कागज सं029ग/1 व 29ग/2 दाखिल किया गया है ।
विपक्षी सं02 द्वारा दावाफार्म एवं अन्य पत्राचार हेतु लिखे गये पत्रों की छायाप्रतियां कागज सं021ग लगायत 23ग/2 दाखिल की गई ।
फोरम द्वारा परिवादिनी एवं विपक्षी सं01 के विद्वान अधिवक्तागण की बहस सुनी गयी तथा पत्रावली का अवलोकन किया गया । विपक्षी सं02 सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहे ।
उभय पक्ष को यह स्वीकार है कि परिवादिनी के पति जनतंत्र इंटर कालेज,कुलपहाड में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे तथा उनका बीमा विपक्षी बीमा कंपनी से 1,00,000/-रू0 का था एवं दिनांक:27.02.2008 को परिवादिनी के पति की मृत्यु हो गई । उस समय परिवादिनी के पति की आयु लगभग 60 वर्ष 06 माह हो चुकी थी । विवाद मात्र इतना है कि परिवादिनी के अधिवक्ता के अनुसार परिवादिनी के पति की मृत्यु सेवा काल में हुई क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अध्यापकों की सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष से बढाकर 62 वर्ष कर दी गई है और उसके समस्त देय जो सेवानिवृत्ति के समय देय थे उनमें अवधि 60 वर्ष से बढाकर 62 वर्ष तक कर दी गई थी और परिवादिनी के पति की मृत्यु दौरान सेवा 60 वर्ष के उपरांत तथा 62 वर्ष के अंदर हुई है । इस प्रकार परिवादिनी बीमा धनराशि प्राप्त करने की अधिकारिणी है । जबकि इसके विपरीत विपक्षी बीमा कंपनी की और से कहा गया कि अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष के स्थान पर 62 वर्ष किये जाने पर बीमा संबंधी लाभ हेतु उक्त आयु संबंधी संशोधन नहीं किया गया था । इस प्रकार परिवादिनी अपने पति की दौरान सेवा में 60 वर्ष 06 माह पूर्ण करने के उपरांत हुई मृत्यु पर बीमा धनराशि प्राप्त करने की अधिकारिणी नहीं है । इस संबंध में विपक्षी बीमा कंपनी से इसके संबंध में विधि व्यवस्था अथवा शासनादेश दाखिल करने हेतु समय लिया गया था । परन्तु ऐसा कोई शासनादेश उनके द्वारा फोरम के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया,जिससे परिवादिनी की और से किये गये तर्क पर प्रतिकूलता परिलक्षित हो । साथ ही दौरान बहस विपक्षी की और से यह भी स्वीकार किया गया कि परिवादिनी के पति की आकस्मिक दौरान सेवाकाल मृत्यु तक उसकी वेतन से बीमा संबंधी प्रीमियम की धनराशि की कटौतियां नियमित रूप से की जाती रहीं । इसके विपरीत भी विपक्षी द्वारा अपने जबाबदावा में अन्य किसी साक्ष्य के माध्यम से गलत साबित नहीं किया गया । ऐसी परिस्थिति में यह फोरम इस मत का है कि जब परिवादिनी के पति के नियमित वेतन से बीमा संबंधी प्रीमियम की कटौती मृत्यु तक की जाती रही है और ऐसी परिस्थिति में बीमा निधि बीमाधारक के परिवार को दिये जाने के विरोध में कोई शासनादेश भी नहीं है तो परिवादिनी को निश्चित तौर से उसके पति की आकस्मिक मृत्यु के संबंध में बीमा की धनराशि मु01,00,000/- रू0 प्रदान किया जाना न्यायोचित होगा ।
आदेश
परिवादिनी का परिवाद खिलाफ विपक्षीगण आंशिक रूप से स्वीकार किया जाता है। विपक्षीगण को निर्देशित किया जाता है कि वह परिवादिनी को इस निर्णय के अंदर एक माह बीमित धनराशि 1,00,000/-रू0 रूपया प्रदान करे । इसके अलावा परिवादिनी विपक्षीगण से मानसिक क्षतिपूर्ति के एवज में 2,000/-रू0 एवं वाद व्यय के एवज में मु0 2,500/- रूपये पाने की हकदार होगी। विपक्षी इस धनराशि को परिवादिनी को इस निर्णय के अंदर एक माह प्रदान करे अन्यथा परिवादिनी विपक्षी से इस धनराशि पर 9 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी पाने की अधिकारिणी होगी । विपक्षीगण पूर्व परिवादिनी को इस संबंध में प्रदान की गई धनराशि का समायोजित कर सकेगें ।
(श्रीमती नीला मिश्रा) (डा0सिद्धेश्वर अवस्थी)
सदस्य, सदस्य,
जिला फोरम,महोबा। जिला फोरम,महोबा।
30.01.2016 30.01.2016