सुरक्षित
राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
अपील संख्या-2505/2012
(जिला उपभोक्ता फोरम, उन्नाव द्वारा परिवाद संख्या-10/2012 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 27.08.2012 के विरूद्ध)
1. पोस्ट आफिस, गंज मुरादाबाद, जिला उन्नाव द्वारा पोस्ट मास्टर।
2. यूनियन आफ इण्डिया द्वारा सेक्रेटरी/मिनिस्टर, मिनिस्ट्री आफ कम्यूनिकेशन एण्ड इंफार्मेशन टेक्नॉलाजी, डिपार्टमेंट आफ पोस्ट, डाक भवन, संसद मार्ग, न्यू दिल्ली-110001 ।
अपीलार्थीगण/विपक्षीगण
बनाम्
बिशन स्वरूप पुत्र श्री मैकू, निवासी ग्राम पच्चा पुरवा, पोस्ट गंज मुरादाबाद, जिला उन्नाव।
प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:-
1. माननीय श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्य।
2. माननीय श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य।
अपीलार्थीगण की ओर से उपस्थित : डा उदय वीर सिंह, विद्वान अधिवक्ता।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : श्री राम गोपाल, विद्वान अधिवक्ता।
दिनांक 08.08.2018
मा0 श्री विजय वर्मा, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
यह अपील, विद्वान जिला फोरम, उन्नाव द्वारा परिवाद संख्या-10/2012 में पारित निर्णय एवं आदेश दिनांक 27.08.2012 के विरूद्ध विपक्षीगण/अपीलार्थीगण की ओर से योजित की गयी है।
अपील से सम्बन्धित मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं कि परिवादी/प्रत्यर्थी द्वारा दिनांक 16.11.2011 को जरिये रसीद संख्या-4967, मनीऑर्डर मु0 500/- रूपये इलाहाबाद के पते पर भेजा गया था, जिस हेतु रू0 25/- विहित शुल्क विपक्षीगण/अपीलार्थीगण को अदा किया गया था, किन्तु विपक्षीगण द्वारा मनीऑर्डर को गन्तव्य स्थल पर डिलीवर नहीं किया गया, जिस पर परिवादी द्वारा एक शिकायत दिनांक 01.12.2011 को विपक्षी संख्या-1 से की गयी, किन्तु उसे सही प्रकार से जानकारी नहीं दी गयी और बाद में आने को कहा गया और जब बाद में परिवादी फिर पहुंचा तो उसे बताया गया कि मनीऑर्डर अभी डिलीवर नहीं हुआ है। परिवादी द्वारा जब यह कहा गया कि यह पैसा जल्दी से भिजवा दें, जिस पर विपक्षी संख्या-1 उन पर क्रोधित हो गया और अपशब्द का प्रयोग करने लगा, जिससे क्षुब्ध होकर एक परिवाद विद्वान जिला फोरम के समक्ष दायर किया गया, जहां पर विपक्षीगण/अपीलार्थीगण द्वारा अपना प्रतिवाद पत्र दायर करते हुए मुख्यत: यह कथन किया गया कि परिवादी द्वारा जो धनादेश फार्म में पता दिया गया था, वह गलत व अधूरा था, जिस कारण से धनादेश का भुगतान नहीं हो सका। इस प्रकार विपक्षीगण द्वारा किसी भी प्रकार से सेवा में कमी नहीं की गयी है। अत: परिवादी का परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है।
उभय पक्ष को सुनने के उपरांत विद्वान जिला फोरम द्वारा दिनांक 27.08.2012 को निम्नवत् आदेश पारित किया गया :-
'' परिवाद एतद्द्वारा स्वीकार किया जाता है कि वे परिवादी के मनीआर्डर की राशि व शुल्क की राशि 525/- रूपये परिवादी को अदा करें। इस धनराशि पर दिनांक 16-11-2011 से अदायगी की तिथि तक 18 प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज भी देय होगा।
विपक्षीगण परिवादी को 1,000/-रूपया की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में व 200/-रूपये की राशि परिवाद व्यय के रूप में अदा करेंगें। ''
उपरोक्त आदेश से क्षुब्ध होकर अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा यह अपील मुख्यत: इन आधारों पर दायर की गयी है कि धारा-48 इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट के अनुसार मनीऑर्डर के संबंध में कोई भी वाद या अन्य विधिक प्रक्रिया सरकार के विरूद्ध या पोस्ट आफिस के अधिकारी के विरूद्ध नहीं दायर की जा सकती है, जब तक संबंधित कर्मचारी या अधिकारी के द्वारा जानबूझकर कोई फ्रॉड या डिफॉल्ट न किया गया हो। परिवादी द्वारा इस प्रकरण में धनादेश के लिए सही पते नहीं लिखा गया था, जिस कारण से धनादेश का भुगतान नहीं किया जा सका, इसलिए विपक्षीगण द्वारा कोई भी सेवा में कमी नहीं की गयी है। विद्वान जिला फोरम द्वारा जो आदेश पारित किया गया है, वह तथ्यों एवं साक्ष्यों के विरूद्ध पारित किया गया है, जो निरस्त किये जाने एवं अपील स्वीकार किये जाने योग्य है।
अपीलार्थीगण की ओर से विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह एवं प्रत्यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री राम गोपाल उपस्थित हुए। उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्तागण को विस्तार से सुना गया एवं प्रश्नगत निर्णय/आदेश तथा उपलब्ध अभिलेखों का गम्भीरता से परिशीलन किया गया।
इस प्रकरण में यह तथ्य निर्विवादित है कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा एक रू0 500/- का धनादेश दिनांक 16.11.2011 को अपीलार्थीगण/विपक्षीगण के माध्यम से इलाहाबाद के पते पर भेजा गया था। यह तथ्य भी निर्विवादित है कि उक्त धनादेश गन्तव्य स्थाल पर नहीं पहुंचा। विवादित बिन्दु अपीलार्थीगण के अनुसार यह है कि उक्त धनादेश प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा सही पता अंकित न करने के कारण गन्तव्य स्थल पर नहीं पहुंचा, जिसमें अपीलार्थीगण द्वारा कोई सेवा में कमी नहीं की गयी है, जबकि प्रत्यर्थी/परिवादी के अनुसार विपक्षीगण द्वारा न तो धनादेश गन्तव्य स्थल पर पहुंचा गया और न ही उक्त धनादेश वापस किया गया। इस प्रकार विपक्षीगण द्वारा सेव में कमी की गयी है।
अब यह देखा जाना है कि क्या प्रश्नगत परिवाद विद्वान जिला फोरम में पोषणीय था, जैसा कि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण का कथन है यदि हां तो उसका प्रभाव यदि नहीं तो क्या अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी के धनादेश को गन्तव्य स्थल पर न पहुंचाकर के तथा उक्त धनादेश की राशि को वापस न करके सेवा में कमी की गयी है।
सवृप्रथम यह देखा जाना है कि क्या प्रश्नगत परिवाद विद्वान जिला फोरम के समक्ष चलने योग्य नहीं था, जैसा कि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण का कथन है।
इस संबंध में उल्लेखनीय है कि अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता के अनुसार धारा-48 इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट के अन्तर्गत यह प्रावधान है कि धनादेश के संबंध में कोई भी वाद या अन्य विधिक प्रक्रिया सरकार या पोस्ट आफिस के किसी अधिकारी के संबंध में जब तक कि कोई फ्रॉड या डिफॉल्ट साबित न हो जाये, नहीं चलाया जा सकता है। अत: उपरोक्त कारणों से परिवादी का परिवाद विद्वान जिला फोरम के समक्ष पोषणीय नहीं था। धारा-48 इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट के प्रावधान निम्नवत् हैं :-
" Exemption from liability in rerspect of money orders :-
No Suit for other legal proceedings shall be instituted against the Government or any officer of the Post Office in respect of :-
(a) X X X X X
(b) The wrong payment of a money order caused by incorrect or incomplete information given by the remitter as to the name and address of the payee, provided that, as regards incomplete information, there is was reasonable justification for accepting the information as a sufficient description for the purpose of identifying the payee; or
(c) The payment of any money order being refused or delayed by, or on account of, any accidental neglect, omission or mistake, by, or on the part of, an officer of the post office, or for any other cause whatsoever, other than the fraud or willful act or default of such officer, or
(d) & (e) X X X X X "
उपरोक्त प्रावधान के अन्तर्गत अपीलार्थीगण यह दर्शाने में नितान्त असफल रहे हैं कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा गलत पता दर्शाया गया था, क्योंकि ऐसे किसी तथ्य को अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा स्पष्ट रूप से साबित नहीं किया जा सका है। अत: अपीलार्थीगण के विद्वान अधिवक्ता के इस तर्क में कोई बल नहीं है कि धनादेश सही पता न अंकित किये जाने के कारण अपने गन्तव्य स्थल पर नहीं पहुंचाया जा सका। प्रस्तुत प्रकरण में उपरोक्त प्रावधान इसलिए भी लागू नहीं होता है, क्योंकि परिवादी के द्वारा जो धनराशि धनादेश द्वारा प्रेषित की गयी थी, उसका भुगतान संबंधित गन्तव्य स्थल पर न पहुंचाये जाने के उपरांत परिवादी को वापस भी नहीं किया गया, जबकि उपरोक्त प्रावधान के अन्तर्गत धनादेश रेफ्यूज होने, देरी होने या किसी अन्य कारण से पोस्ट आफिस के किसी अधिकारी द्वारा नहीं भुगतान किया जा सका है, तो कोई भी वाद नहीं दायर हो सकता था, किन्तु इस प्रकरण में परिवादी के धनादेश को वापस ही नहीं किया गया है और ऐसा कोई प्रावधान धारा-48 इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट के अन्तर्गत निहित नहीं है, जिसमें धनराशि वापस न किये जाने पर भी परिवाद दायर नहीं किया जा सकता हो। अत: उपरोक्त प्रावधान के आधार पर यह कहा जाना कि प्रश्नगत परिवाद विद्वान जिला फोरम में पोषणीय नहीं था, सही तर्क प्रतीत नहीं होता है।
अब यह देखा जाना है कि अपीलार्थीगण/विपक्षीगण द्वारा परिवादी के धनादेश को गन्तव्य स्थल पर न पहुंचाकर या उक्त धनादेश को वापस न करके कोई सेवा में कमी की गयी है या नहीं।
इस संबंध में यह उल्लेखनीय है कि परिवादी का धनादेश अपने गन्तव्य स्थल पर नहीं पहुंचा। अपीलार्थीगण यह सिद्ध करने में नितान्त असफल रहे हैं कि धनादेश में सही पता अंकित न होने के कारण उक्त धनादेश गन्तव्य स्थल पर नहीं पहुंचाया जा सका तो उक्त धनादेश को परिवादी को क्यों नहीं वापस किया गया। अत: इस संबंध में लेश मात्र भी संदेह नहीं है कि अपीलार्थीगण द्वारा उक्त धनादेश को उसके गन्तव्य स्थल पर न पहुंचाकर तथा उसके बाद उक्त धनादेश को परिवादी को वापस न करके सेवा में कमी की गयी है। अत: इस संबंध में विद्वान जिला फोरम द्वारा जो निर्णय एवं आदेश पारित किया गया है, वह पूर्णरूपेण तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर पारित किया गया है, जिसमें किसी भी प्रकार की कोई विधिक त्रुटि होना नहीं पायी जाती है। तदनुसार प्रस्तुत अपील निरस्त किये जाने योग्य है।
आदेश
अपील निरस्त की जाती है।
पक्षकारान अपना-अपना अपीलीय व्यय-भार स्वंय वहन करेंगे।
पक्षकारान को इस निर्णय एवं आदेश की सत्यप्रतिलिपि नियमानुसार उपलब्ध करा दी जाये।
(विजय वर्मा) (गोवर्द्धन यादव)
पीठासीन सदस्य सदस्य
लक्ष्मन, आशु0, कोर्ट-3