Uttar Pradesh

Lucknow-I

CC/293/2016

UDAI SHUKLA - Complainant(s)

Versus

BEST PRIZE - Opp.Party(s)

SANDEEP KUMAR PANDEY

01 Aug 2023

ORDER

Heading1
Heading2
 
Complaint Case No. CC/293/2016
( Date of Filing : 06 Sep 2016 )
 
1. UDAI SHUKLA
6C/49 GOPESH KUNJ VRANDAWAN YOJNA
LUCKNOW
UTTAR PRADESH
...........Complainant(s)
Versus
1. BEST PRIZE
A-D BHARTI BALL MART BENCHOR AMAR SAHEED PATH
LUCKNOW
UTTAR PRADESH
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Neelkuntha Sahya PRESIDENT
 HON'BLE MS. Kumar Raghvendra Singh MEMBER
 HON'BLE MS. sonia Singh MEMBER
 
PRESENT:
 
Dated : 01 Aug 2023
Final Order / Judgement

        जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, प्रथम, लखनऊ।

            परिवाद संख्‍या:-293/2016                                             उपस्थित:-श्री नीलकंठ सहाय, अध्‍यक्ष।

          श्रीमती सोनिया सिंह, सदस्‍य।

          श्री कुमार राघवेन्‍द्र सिंह, सदस्‍य।             

परिवाद प्रस्‍तुत करने की तारीख:-06.09.2016

परिवाद के निर्णय की तारीख:-01.08.2023

उदय शुक्‍ला उम्र लगभग 36 वर्ष पुत्र श्री अरूण कुमार शुक्‍ल केयर ऑफ डब्‍लू0 मेम्‍बर 117-22009843509 जे0के0 इण्‍टरप्राइजेज सी-220 सेक्‍टर उतेलवा औद्योगिक क्षेत्र जगदीशपुर सुल्‍तानपुर उत्‍तर प्रदेश वर्तमान पता-6सी/49 गोपेश कुंज वृन्‍दावन योजना, तेलीबाग लखनऊ।                     ...........परिवादी।                                                    

                            बनाम

1.   प्रबन्‍धक वेस्‍ट प्राइस ए-डी भारती बाल मार्ट-बेनचर अमर शहीद पथ लखनऊ-226001 ।

2.   मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (सी0ई0ओ0) पैनासोनिक 12वीं मंजिल एमवियन्‍स टावर, एमवियन्‍स आइसलैण्‍ड एन0एच0 8 लेन नं0-वी-40 फेस-3 सेक्‍टर 24 गुड़गॉव हरियाणा-122002 ।                            ...........विपक्षीगण।                                                                    

                                                   

परिवादी के अधिवक्‍ता का नाम:-श्री संदीप कुमार पाण्‍डेय।

विपक्षी संख्‍या -01 के अधिवक्‍ता का नाम:-श्री अमरेन्‍द्र नाथ त्रिपाठी।

विपक्षी संख्‍या -02 के अधिवक्‍ता का नाम:-बिना वकालतनामा।

आदेश द्वारा-श्री नीलकंठ सहाय, अध्‍यक्ष।

                               निर्णय

1.   परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद अन्‍तर्गत धारा 12 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत विपक्षीगण से पैनासोनिक एलईडी 32 टी0वी0 बदलने अथवा एलईडी 32 टी0वी0 का मूल्‍य 25,990.00 रूपये मय 12 प्रतिशत ब्‍याज की दर से, मानसिक, आर्थिक उत्‍पीड़न हेतु 50,000.00 रूपये एवं विधिक नोटिस 5,000.00 रूपये एवं वाद व्‍यय 6000.00 रूपये दिलाये जाने की प्रार्थना के साथ प्रस्‍तुत किया है।

2.   संक्षेप में परिवाद के कथन इस प्रकार है कि परिवादी ने विपक्षी संख्‍या 01 के यहॉं से दिनॉंक 06.09.2013 को 511682 पैनासोनिक एलईडी 32 टी0वी0 25,990.00 रूपये में क्रय किया था जिसकी वारन्‍टी 03 वर्ष की थी। उक्‍त एलईडी 32 टी0वी0 का प्रयोग परिवादी मनोरंजन के रूप में करता रहा, परन्‍तु अचानक दिनॉंक 23.03.2016 को उक्‍त एलईडी 32 टी0वी0 में मैनुफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट होने के कारण टी0वी0 ने काम करना बन्‍द कर दिया, जिसके संबंध में परिवादी ने केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर दिनॉंक 23.03.2016 को शिकायत कर एलईडी 32 टी0वी0 बदलने के लिये कहा।

3.   परिवादी की शिकायत पर मैकेनिक आये और उन्‍होंने उक्‍त एलईडी 32 टी0वी0 को चेक किया और कहा कि टी0वी0 के पैनल में डिफेक्‍ट है, जिसे बनाया नहीं जा सकता उसे बदलवाना पड़ेगा। मैकेनिक सर्विस के बाद भी परिवादी कई बार विपक्षीगण से प्रार्थना किया कि उसकी उक्‍त एलईडी 32 टी0वी0 बदल दी जाए, परन्‍तु विपक्षीगण ने आना-कानी करके उसे टाल दिया।

4.   परिवादी ने अंत में थक हार कर अपने अधिवक्‍ता के माध्‍यम से विपक्षीगण को विधिक नोटिस उक्‍त एलईडी 32 टी0वी0 को बदलवाने हेतु दिनॉंक 21.05.2016 को दिया पर विपक्षीगण द्वारा उसे भी कन्‍सीडर नहीं किया गया।

5.   विपक्षी संख्‍या 01 ने अपना उत्‍तर पत्र प्रस्‍तुत करते हुए कथन किया कि परिवादी उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है क्‍योंकि परिवाद गलत तथ्‍यों के आधार पर दाखिल किया गया है। परिवादी द्वारा पैनासोनिक एलईडी 32 टी0वी0 25,990.00 रूपये में दिनॉंक 06.09.2013 को नहीं क्रय की गयी और न ही कोई वारन्‍टी थी। इनवाइस दिनॉंक 06.09.2013 में जो पता दर्ज है वह बिजनेस और कामर्शियल इन्‍टरप्राइजेज जगदीशपुर अमेठी के नाम एक फर्म है और मो0 इरफान खान रस्‍तामऊ उसके डायरेक्‍टर हैं। यह गलत है कि एलईडी 32 टी0वी0 तकनीकी खराबी के कारण बन्‍द हुआ। इस प्रकार विपक्षी द्वारा कोई भी सेवा में कमी नहीं की गयी है।

6.   विपक्षी संख्‍या 02 द्वारा अपने उत्‍तर पत्र में कथन किया गया कि गलत ढंग से यह परिवाद दाखिल किया गया है। टी0वी0 में जो खराबी थी तो इनकी शिकायत पर पैनल बदल दिया गया। कोई भी नोटिस नहीं भेजा गया। कोई भी तकनीकी खराबी नहीं थी, न ही सेवा में कोई कमी की गयी है।

7.   परिवादी द्वारा अपने कथानक के समर्थन में शपथ पत्र एवं दस्‍तावेजी साक्ष्‍य के रूप में वैस्‍ट प्राइज वैट इनवाइस, केयर एण्‍ड केयर सर्विसेज रिपोर्ट प्रार्थना पत्र, नोटिस आदि की छायाप्रतियॉं प्रस्‍तुत की गयी है। विपक्षी की ओर से आर्डर की प्रति, सदस्‍यता आवेदन फार्म, टर्म्‍स एण्‍ड कन्‍डीशन, रजिस्‍ट्रेशन सर्टिफिकेट, टैक्‍स इनवाइस, पैनकार्ड, आदि की छायाप्रतियॉं दाखिल की गयी।

8.   मैंने उभयपक्ष के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्कों को सुना तथा पत्रावली का परिशीलन किया।

9.   उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के तहत क्षतिपूर्ति प्राप्‍त करने के लिये निम्‍नलिखित दो आवश्‍यक तथ्‍यों को साबित किया जाना आवश्‍यक है। 1-परिवादी का उपभोक्‍ता होना 2- सेवा प्रदाता द्वारा सेवा में कमी का प्रमाणित होना। तथ्‍यों को साबित करने का भार परिवादी के ऊपर है।

10.  विपक्षी द्वारा तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि परिवादी उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है, क्‍योंकि उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 13 (1) ग में यह व्‍यवस्‍था दी गयी है कि जब उपभोक्‍ता अपने व्‍यक्तिगत इस्‍तेमाल के लिये कोई सामग्री कर करता है तभी वह उपभोक्‍ता की श्रेणी में माना जायेगा और जो टी0वी0 परिवादी ने विपक्षी से क्रय किया गया है वह अमेठी में परिवादी की फर्म के नाम पर क्रय किया गया है। परिवाद पत्र के परिशीलन से विदित है कि परिवादी ने जो पता लिखा है वह श्री उदय शुक्‍ला, उम्र 36 वर्ष पुत्र श्री अरूण कुमार शुक्‍ल केयर आफ डब्‍लू0 मेम्‍बर 117-22009843509 जे0के0 इण्‍टरप्राइजेज सी-220 सेक्‍टर उतेलवा औद्योगिक क्षेत्र जगदीशपुर सुल्‍तानपुर उत्‍तर प्रदेश के रहने वाले हैं, और वर्तमान पता-6सी/49 गोपेश कुंज वृन्‍दावन योजना, तेलीबाग लखनऊ, लिखा गया है। यह तथ्‍य विवाद का विषय नहीं है कि परिवादी ने दिनॉंक 06.09.2013 को पैनासोनिक एलईडी 32 टी0वी0 25,990.00 रूपये में विपक्षी के यहॉं से क्रय किया था। परिवादी विपक्षी का उपभोक्‍ता है।

11.  विपक्षी द्वारा यह बताया गया कि परिवादी द्वारा दिनॉंक 23.03.2016 को टी0वी0 पैनल में डिफेक्‍ट की शिकायत की गयी थी तो विपक्षी द्वारा यह कहा गया कि उसे बदलना पड़ेगा तो परिवादी ने उक्‍त टी0वी0 को ही बदले जाने के संदर्भ में विपक्षी से कहा गया। परन्‍तु विपक्षी द्वारा टी0वी0 को बदला नहीं गया। पैनल को बदल दिया गया।

12.  परिवादी के अनुतोष के परिशीलन से विदित है कि परिवादी द्वारा क्रय की गयी एलईडी टी0वी0 बदले जाने के संबंध में याचना की गयी है या अदा की गयी धनराशि को मय ब्‍याज वापस किये जाने के संदर्भ में कहा गया है। इस संबंध में विभिन्‍न वादों में न्‍यायालयों द्वारा व्‍यवस्‍था दी गयी है जो निम्‍नवत है- Ram Bhagat Vs M/s New Holland Fiat (India) Pvt. Ltd. & Another in Revision Petition No. 2088/2013 as decided on 3rd October, 2013 (LNIND 2013 NCDRC 758 )

          Khanna Automobiles, Opposite Aggarsen College & Another Vs Shri Rajesh Kumar (LNIND 2013 NCDRC 286) Revision Petition No. 1115/2022 Decided on 23 April 2013 में भी एक्‍सपर्ट ओपीनियन होनी चाहिए।

C.N. Anantharam Vs Fiat India Ltd. and Ors. में यह अवधारणा की गयी है कि जब तक मेजर इनडारेक्‍ट मैन्‍यूफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट नहीं होता है तब तक मैन्‍यूफैक्‍चरिंग कम्‍पनी अथवा उसका एजेन्‍ट बदलने के लिये बाध्‍य नहीं है।

     Skoda auto India Ltd. Vs Bhawesh Nanda II (2016) C.P.J. 217 (NC) में राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा यह अवधारित किया गया था कि जब तक मैकेनिकल और टेक्निकल डिफेक्‍ट नहीं है, तब तक उपभोक्‍ता को भुगतान नहीं किया जा सकता।

     Chandeshwar Kumar Vs Tata Engineering Loco Motive I (2007) CPJ 2 (NC) में भी यह कहा गया है कि मैकेनिकल एवं टेक्निकल डिफेक्‍ट हो वहॉं पर एक्‍सपर्ट की ओपिनियन होनी चाहिए।

     अर्थात उपरोक्‍त विधि व्‍यवस्‍था का सार यह है कि जब तक तकनीकी परीक्षण में किसी विशेषज्ञ की राय में यह प्रमाणित न हो जाए कि प्रोडक्‍ट में तकनीकी व मैन्‍यूफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट है। तभी इस पर भुगतान किया जा सकता है।

13.  अत: जब तक टेक्निकल एवं मैकेनिकल डिफेक्‍ट के बारे में एक्‍सपर्ट ओपिनियन नहीं आती है, तब तक टेक्निकल एवं मैकेनिकल डिफेक्‍ट की श्रेणी में नहीं माना जा सकता और तब तक पैसा वापस करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता। विधि व्‍यवस्‍था में माननीय राज्‍य आयोग एवं सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा अभिमत पारित किया गया है कि कोई भी सामग्री क्रय की जाती है तो उसे बदलने अथवा उसकी क्रय की गयी धनराशि की वापसी करना तब तक संभव नहीं है जब तक कि उसमें कोई तकनीकी त्रुटि न हो, वस्‍तु को बदलना या पैसा दिलाना यह सेवा में कमी की परिभाषा में नहीं आता है, जैसा कि माननीय न्‍यायालय ने इस विधि व्‍यवस्‍था में कहा है।

14.  माननीय न्‍यायालय द्वारा विधि व्‍यवस्‍था में यह कहा गया है कि जब कोई सामग्री क्रय की जाती है तो उसे बदला जाना तभी संभव है जब उसमें कोई मैनुफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट यानी की तकनीकी खराबी हो। माननीय न्‍यायालय द्वारा यह अभिमत पारित किया गया है कि तकनीकी खराबी के संबंध में परिवादी को साबित करना होगा और उनका यह दायित्‍व होगा कि क्रय की गयी सामग्री के संबंध में विशेषज्ञ की रिपोर्ट मंगाये और रिपोर्ट आने के बाद आपत्ति निस्‍तारण एवं जिरह का अवसर प्रदान करते हुए आयोग इस नतीजे पर पहुचता है कि उसमें कोई तकनीकी खराबी है, तभी वह क्रय की गयी सामग्री को बदला जा सकता है अथवा उसका मूल्‍य दिलाया जा सकता है, और यही परिवादी का अनुतोष है।

15.  परिवादी द्वारा प्रस्‍तुत प्रकरण में भी एक्‍सपर्ट की ओपिनियन नहीं मंगायी है जिससे यह साबित हो सके कि क्रय की गयी टी0वी0 में कोई तकनीकी खराबी थी। जबतक तकनीकी खराबी यानी मैनुफैक्‍चरिंग डिफेक्‍ट नहीं होता है तब तक क्रय की गयी सामग्री को न तो बदला जा सकता है और न पैसा वापस दिलाया जा सकता है। अत: परिवादी द्वारा जो अनुतोष चाहा गया है वह साक्ष्‍य के अभाव में प्राप्‍त करने का अधिकारी नहीं है।

16.  उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम में यह देखा जाना है कि क्‍या विपक्षी द्वारा सेवा में कोई कमी की गयी है अथवा नहीं। उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत परिवादी द्वारा मांगा गया अनुतोष प्राप्‍त करने का वह अधिकारी नहीं है, क्‍योंकि विपक्षी द्वारा सेवा में कोई कमी नहीं की गयी है।

17.    विपक्षी द्वारा उपरोक्‍त पते के साक्ष्‍य में भी यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया है। विपक्षी की यह बात अगर मान भी ली जाए कि जे0के0 इन्‍टरप्राइजेज एक फर्म है और फर्म का अभिप्राय यह होता है कि वह निश्चित ही एक वाणिज्यिक प्रतिष्‍ठान की श्रेणी में आती है और वाणिज्यिक श्रेणी हेतु अगर कोई सामग्री क्रय की गयी है तो वह खरीददार उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है जब तक कि वह उसे अपने व्‍यक्तिगत इस्‍तेमाल न करता हो। परिवादी द्वारा परिवाद पत्र में यह भी उल्‍लेख किया गया है कि टी0वी0  प्रयोग परिवादी मनोरंजन के लिये करता था, अर्थात वह टी0वी0 का व्‍यक्तिगत इस्‍तेमाल करता था अपने व परिवार के मनोरंजन के लिये। अत: यह नहीं समझा जायेगा कि जो सामग्री क्रय की गयी थी वह व्‍यक्तिगत इस्‍तेमाल के लिये थी न कि वाणिज्यिक उद्देश्‍य से क्रय की गयी थी। अत: स्‍पष्‍ट है कि परिवादी उपभोक्‍ता की श्रेणी में आता है, किन्‍तु परिवादी विपक्षी के प्रति सेवा में कमी साबित नहीं कर सका। अत: परिवादी का परिवाद खारिज किये जाने योग्‍य है।

                            आदेश

     परिवादी का परिवाद उपरोक्‍तानुसार खारिज किया जाता है।

     पत्रावली पर उपलब्‍ध समस्‍त प्रार्थना पत्र निस्‍तारित किये जाते हैं।

     निर्णय/आदेश की प्रति नियमानुसार उपलब्‍ध करायी जाए।

 

(कुमार राघवेन्‍द्र सिंह)    (सोनिया सिंह)                        (नीलकंठ सहाय)

         सदस्‍य              सदस्‍य                         अध्‍यक्ष

                            जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग,   प्रथम,

                                               लखनऊ।          

आज यह आदेश/निर्णय हस्‍ताक्षरित कर खुले आयोग में उदघोषित किया गया।

                                   

(कुमार राघवेन्‍द्र सिंह)    (सोनिया सिंह)                         (नीलकंठ सहाय)

         सदस्‍य              सदस्‍य                         अध्‍यक्ष

                            जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग,   प्रथम,

                                               लखनऊ

दिनॉंक:-01.08.2023

 

 
 
[HON'BLE MR. Neelkuntha Sahya]
PRESIDENT
 
 
[HON'BLE MS. Kumar Raghvendra Singh]
MEMBER
 
 
[HON'BLE MS. sonia Singh]
MEMBER
 

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