राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
(मौखिक)
अपील सं0-1155/2002
(जिला उपभोक्ता फोरम हाथरस द्वारा परिवाद संख्या-३१७/१९९६ में पारित आदेश दिनांक:०२/०४/२००२ के विरूद्ध)
Chokhey Singh, son of Sri Gangadhar, r/o vill. Tikari post Dhatori District Hathras.
............Appellant.
Versus
Barielly Corporation Bank Ltd.(now marged in Bank of Baroda), patthar Bazar br, Hathras through its Branch Manager.
…….Respondent.
समक्ष:-
1 मा0 श्री राम चरन चौधरी, पीठासीन सदस्य।
2 मा0 श्रीमती बाल कुमारी, सदस्य।
अपीलकर्ता की ओर से उपस्थित:-श्री अरूण टण्डन विद्वान अधिवक्ता ।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित:-कोई नहीं ।
दिनांक:१४/१०/२०१५
मा0 श्री राम चरन चौधरी पीठा0सदस्य, द्वारा उद्घोषित।
निर्णय
प्रस्तुत अपील अपीलकर्ता ने विद्वान जिला उपभोक्ता फोरम हाथरस द्वारा परिवाद संख्या-३१७/१९९६ में पारित आदेश दिनांक:०२/०४/२००२ के विरूद्ध प्रस्तुत की है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं कि उसने एक एफ0डी0आर0 ३०४६५/-रू0 की विपक्षी बैंक से खरीदी थी जो २२/१०/१९९४ परिपक्वता की तिथि पर प्रार्थी को ३३६२७/-रू0 प्राप्त होने थे । उसने २७/१२/१९९४ को पुन: ४७ दिन के लिए रिनू कराया और उस पर ७ प्रतिशत ब्याज देय था । जब उस एफ0डी0आर0 को इलाहाबाद बैंक हाथरस में जमा कराया, तो ०५/०४/१९९४ को मुझे जानकारी हुई कि विपक्षी बैंक ने भुगतान करने से इनकार कर दिया है और उस एफ0डी0आर0 को वादी के ऊपर जो कर्जा था उसमें एडजेस्ट कर लिया है। अत: यह परिवाद दायर किया गया है।
विपक्षी ने अपने उत्तर पत्र में यह कहा है कि परिवादी ने एफ0डी0आर0 ली थी और उसको रिनू भी किया था। विपक्षी ने अपने विशेष कथन में कहा है कि परिवादी द्वारा एफ0डी0आर0 सन् ८२-८३ में खरीदी गयी थी जिसे वह समय-समय पर रिनू कराता रहा था। परिवादी को लोन मै0 चोखे सिंह खाद भण्डार पर दिया गया था वह शिवा फर्टीजाईजर का गारण्टर भी था इससे संबंधित अभिलेख दाखिल किया। दिनांक ०७/०३/१९९५ तथा ०४/०४/१९९५ को विपक्षी सं0-1 ने एक पत्र भेजा
-२-
था कि अपने लोन और गारण्टी को क्लीयर कराएं। परिवादी ने व्यक्तिगत रूप से एफ0डी0आर0 को कलेक्शन के लिए नहीं भेजा, बल्कि उसे इलाहाबाद बैंक हाथरस में दाखिल किया, जिसका भुगतान नहीं किया। लोन और गारण्टी चोखे सिंह से एडजेस्ट की गयी इसलिए उसे किसी प्रकार की कोई हानि नहीं हुई और न ही विपक्षी की सेवाएं त्रुटिपूर्ण है।
अपीलकर्ता की ओर से श्री अरूण टण्डन उपस्थित हैं। प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं है। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्य एवं अभिलेखों का अवलोकन किया गया ।
जिला उपभोक्ता फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के उपरांत यह पाया कि प्रस्तुत केस में तथ्यों एवं विधि से संबंधित जटिल प्रश्न संदर्भित हैं इसलिए इसका निस्तारण सिविल कोर्ट द्वारा ही किया जा सकता है, इसलिए परिवादी का परिवाद खण्डित किया है।
केस के तथ्यों एवं परिस्थितियों में हम यह पाते हैं कि जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा जो निर्णय पारित किया गया है वह विधि सम्मत है, उसमें हस्तक्षेप किए जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। तदनुसार अपील खारिज किए जाने योग्य है।
आदेश
अपील खारिज की जाती है।
(राम चरन चौधरी) (बाल कुमारी)
पीठासीन सदस्य सदस्य सत्येन्द्र कुमार कोर्ट नं0-5