Uttar Pradesh

StateCommission

CC/22/2015

Girish Chand Sinha - Complainant(s)

Versus

Ansal Property - Opp.Party(s)

Self

26 Jul 2016

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Complaint Case No. CC/22/2015
 
1. Girish Chand Sinha
R/O River Viw Apartment Near Hanuman setu Mandir New Haidarabad ColonyLucknow
...........Complainant(s)
Versus
1. Ansal Property
115 Ansal Bhawan 16 K.G. Marg New Delhi
............Opp.Party(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 HON'BLE MRS. Bal Kumari MEMBER
 
For the Complainant:
For the Opp. Party:
Dated : 26 Jul 2016
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ

परिवाद संख्‍या-22/2015

                                                ( सुरक्षित )

 

  1. Girish Chandra Sinha S/o Late Shri Shyam Kishore Sinha.
  2. Shashank Sinha S/o Shri Girish Chandra Sinha.
  3. Mayank Sinha S/o Shri Girish Chanda Sinha

(All resident of River View Apartment, Near Hanuman Setu Mandir, New Haidarabad Colony, Lucknow.

        परिवादीगण

बनाम्

  1. Ansal Properties and Infrastructure Limited, 115 Ansal Bhawan, 16 K.G.Marg, New Delhi 110001, Through its Managing Director.
  2. Competent Authority and Incharge of Shushant Golf City of Ansal Properties And Infrastructure Limited, 13 Rana Pratap Marg, Lucknow.226001

                                  विपक्षीगण

समक्ष :-

  1. माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।
  2. माननीय श्रीमती बाल कुमारी, सदस्‍य।

 

परिवादी की ओर से उपस्थित    : श्री गिरीश चन्‍द्र सिन्‍हा।

विपक्षी की ओर से उपस्थित     : श्री अनुराग सिंह।

 

दिनांक :28-09-2016

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उद्घोषित निर्णय

     परिवादीगण Girish Chandra Sinha, Shashank Sinha एवं Mayank Sinha ने यह परिवाद विपक्षीगण Ansal Properties and Infrastructure Limited, 115 Ansal Bhawan, 16 K.G.Marg, New Delhi 110001 एवं Competent Authority and Incharge of Shushant Golf City of Ansal Properties And Infrastructure Limited, के विरूद्ध धारा-17 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत

 

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आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत किया है। परिवादीगण ने परिवाद पत्र में निम्‍नलिखित उपशम चाही है :-

  1. That an order be made against the opposite parties to complete the project paradise crystal and hand over th possession of the flats attotted to be petitioner no.2 and 3 in it without any further delay after fulfilling all the legal norms necessary in the reference.,
  2. That the unwarranter demand for External Electrification Charges and Fire Fight Charges be whipped out and the Opposite Parties may be restrained to demand any such payment in this reference.
  3. That the Opposite Parties may also be restrained to demand any charges in the name holding and interest as there building is still incomplete and legally not available for possession.
  4. An order may also be passed against the Opposite Parties for payment of damages for delay in completing the building at the Government rate i.e. Rs. 15/-per ssq.ft. per month from 01/01/2012 till actual possession is given to the petitioners.
  5. Award Rs. 5,00,000/- as compensation for negligence and dishonest attitude of the opposite parties which is causing harasment and mental agony to the petitioner.

 

3

  1. Award the cost of the litigation in favour of the petitioners against the Opposite Parties.

     परिवाद पत्र के अनुसार परिवादीगण का कथन है कि विपक्षीगण द्वारा वर्ष 2008 में ''Shushant Golf City, Saheed Path के निकट'' नाम से योजना लांच की गई जिसमें एक प्रोजेक्‍ट Paradise Crystal था जिसका उनके द्वारा प्रचार-प्रसार किया गया जिस पर विश्‍वास करते हुए परिवादी संख्‍या-1 ने दो फ्लैट 0517-ई-05/05 और 0517-ई-05-06 अपने पुत्रों परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 के नाम से बुक कराया। प्रत्‍येक फ्लैट का मूल्‍य 16,00,000/-रू0 था। परिवादीगण ने Construction linked interest free instalment plan for payment चुना और उपरोक्‍त Project प्रारम्‍भ होने के पूर्व परिवादी ने विपक्षी कम्‍पनी द्वारा मांगी गयी 4 आवश्‍यक किश्‍तें 6 महीने के अंदर अदा की जिस पर विपक्षीगण ने Construction पूरा कर आवंटित फ्लैट पर कब्‍जा लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा बिल्डिंग प्‍लान का Sanction प्राप्‍त होने की तिथि से 36 महीने में देने का वायदा किया। इसके साथ ही विपक्षीगण ने परिवादीगण को सूचित किया कि उन्‍होंने अपार्टमेंट के निर्माण हेतु Sanction दिसम्‍बर, 2008 में ही प्राप्‍त कर लिया है। अत: विपक्षीगण ने निर्माण पूर्ण कर कब्‍जा दिसम्‍बर 2011 तक देने को कहा।

     परिवाद पत्र में परिवादीगण का कथन है कि विपक्षीगण के उपरोक्‍त वायदे पर विश्‍वास करते हुए उन्‍होंने दिनांक 27-02-2009 को विपक्षीगण के साथ करार निष्‍पादित किया जिसमें विपक्षीगण ने उपरोक्‍त फ्लैटों पर

 

 

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परिवादी को कब्‍जा 36 महीने में देने का वचन दिया और करार के अनुसार जब और जैसे विपक्षीगण द्वारा मांग की गयी परिवादी संख्‍या-1 पेमेन्‍ट करता रहा। निर्धारित समय के अंदर परिवादी संख्‍या-1 ने विपक्षी कम्‍पनी के खाते में परिवादी संख्‍या-2 की तरफ से 13,72,138/-रू0 और परिवादी संख्‍या-3 की तरफ से विपक्षी कम्‍पनी में 13,00,600/-रू0 प्रत्‍येक फ्लैट के मूल्‍य 16,00,000/-रू0 के विरूद्ध जमा किया। इस प्रकार परिवादी संख्‍या-1 ने प्रत्‍येक फ्लैट के मूल्‍य का लगभग 80 प्रतिशत जमा कर दिया। फिर भी विपक्षीगण ने संबंधित फ्लैटों का निर्माण पूरा नहीं किया और वे Paradise Crystal प्रोजेक्‍ट का निर्माण पूरा करने के बजाय अपने दूसरे प्रोजेक्‍ट की ओर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए Paradise Crystal प्रोजेक्‍ट की जमा धनराशि उक्‍त फ्लैटों में लगाने में रूचि लेने लगे जिसका परिवादी संख्‍या-1 ने विरोध किया इस पर विपक्षी कम्‍पनी ने दिनांक 16-03-2013 को परिवादी संख्‍या-1 को नोटिस भेजा कि भवन तैयार है और 07 दिन के अंदर sale deed कराकर कब्‍जा लिया जाए, जबकि वास्‍तविकता यह थी कि न तो बिल्डिंग तैयार थी और न ही Completion Certificate सक्षम अधिकारी से प्राप्‍त हुआ था अत: परिवादी संख्‍या-1 ने इस नोटिस का विरोध किया और कहा कि यह नोटिस कपटपूर्ण ढंग से समय के अंदर निर्माण कर कब्‍जा न देने के दायित्‍व से बचने के लिए दी गयी है तब एक संयुक्‍त निरीक्षण आवंटित फ्लैटों का किया गया तो निर्माण कार्य अधूरा पाया गया और आवंटित फ्लैट रिहायस योग्‍य नहीं पाये गये। अत: विपक्षी कम्‍पनी ने पत्र दिनांक 30-04-2013 के द्वारा उपरोक्‍त नोटिस वापस लिया।

 

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तदोपरान्‍त अन्‍य आवंटियों द्वारा भी कब्‍जे की मांग की गयी और कब्‍जा हस्‍तान्‍तरण हेतु दबाव डाला गया क्‍योंकि उन्‍हें बैंक की ई.एम.आई. अदा करनी पड़ रही थी तब विपक्षी कम्‍पनी ने पुन: नोटिस दिनांक 25-06-2013 जारी किया और आवंटियों से अपने फ्लैटों पर कब्‍जा लेने के लिए कहा जबकि आवागमन एवं पार्किंग की सुविधा अपूर्ण थी।

     परिवाद पत्र में परिवादी ने कहा है कि विपक्षी कम्‍पनी ने एक नोटिस जारी कर 37,500/-रू0 प्रत्‍येक आवं‍टी से Fire Fighting Charges (FFC) और Rs. 82,500/- External Electrification Charges (EEC) तय शुदा धनराशि के अतिरिक्‍त मांगा। जबकि यह धनराशि तयशुदा मूल्‍य में शामिल थी। इसके साथ ही कम्‍पनी ने 500/-रू0 वाटर कनेक्‍शन चार्जेज के रूप में और रू0 1250/- Sewer and Storm Water drainage Connection Charges  के रूप में मांगा। परिवादीगण द्वारा विपक्षी कम्‍पनी के उपरोक्‍त नोटिस का विरोध पत्र दिनांक 06-07-2013 के द्वारा किया गया जिसका विपक्षी कम्‍पनी ने कोई जवाब नहीं दिया। परिवादी ने पुन: अनुस्‍मारक भेजा तब दिनांक 10-07-2013 को विपक्षी कम्‍पनी ने पुन: ई-मेल के द्वारा परिवादीगण को अवशेष धनराशि अदा कर कब्‍जा लेने के लिए संदेश भेजा। इस बार miscellaneous payment के रूप में विपक्षी कम्‍पनी ने मनमानी धनराशि की मांग की, परन्‍तु यह कहीं उल्‍लेख नहीं किया कि बिल्डिंग तैयार है। परिवादीगण ने विपक्षीगण से लखनऊ विकास प्राधिकरण या अन्‍य सक्षम अधिकारी द्वारा जारी Completion Certificate की मांग की, परन्‍तु विपक्षी कम्‍पनी ने उसका कोई जवाब नहीं दिया इसके विपरीत उसने परिवादी संख्‍या-2 द्वारा दी गयी अथारिटी के अधिकार पत्र का दुरूपयोग करते हुए

 

 

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95,238/-रू0 उसके लोन एकाउन्‍ट से निकाल लिया।

     परिवाद पत्र के अनुसार परिवादीगण का कथन है कि विपक्षीगण के असहयोग एवं उनके द्वारा आवंटित फ्लैट पर कब्‍जा न दिये जाने से क्षुब्‍ध होकर परिवादीगण ने विपक्षीगण को ई-मेल से दिनांक 10-12-2014 को नोटिस भेजा जिसका विपक्षीगण ने कोई जवाब नहीं दिया। तब पुन: दिनांक 07-01-2015 को परिवादीगण ने स्‍पीड पोस्‍ट से नोटिस उन्‍हें भेजा जो उनपर दिनांक 10-01-2015 को तामील हुई तब विपक्षी संख्‍या-2 ने परिवादीगण को बातचीत करने और विवाद सुलझाने के लिए टेलीफोन के माध्‍यम से बुलाया। इस पर परिवादी संख्‍या-1 विपक्षी संख्‍या-2 के कार्यालय में दिनांक 28-01-2015 को गया तब विपक्षी संख्‍या-1 के सक्षम अधिकारियों से वार्ता हुई जिसमें उन्‍होंने स्‍वीकार किया कि अभी बिल्डिंग का Completion Certificate निर्माणकर्ता विभाग से प्राप्‍त नहीं हुआ है। उन्‍होंने इसके लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा है और Completion Certificate का इन्‍तजार किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्‍होंने यह भी स्‍वीकार किया कि उक्‍त Completion Certificate निर्माणकर्ता विभाग से प्राप्‍त हुए बिना कम्‍पनी सरकारी संस्‍था से Completion Certificate प्राप्‍त करने के लिए आवेदन नहीं कर सकती है। इसके साथ ही विपक्षी कम्‍पनी के अधिकारियों ने परिवादीगण संख्‍या- 2 से 1,95,071/-रू0 और परिवादी संख्‍या-3 से  3,29,248/-रू0 के ब्‍याज सहित भुगतान की मांग की और कहा कि External Electrification Charges and Fire Fighting Charges

 

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अतिरिक्‍त हैं। परिवादी संख्‍या-1 ने उन्‍हें अवगत कराया कि वह सभी विधिक देय देने को तैयार है बशर्ते की कम्‍पनी पैसा ले ओर उसी समय उन्‍हें आवंटित फ्लैट पर कब्‍जा दे। इसके साथ ही परिवादी ने विपक्षी संख्‍या-2 की अवशेष धनराशि 1,95,071/-रू0 और परिवादी संख्‍या-3 की अवशेध धनराशि 3,29,248/-रू0 का भुगतान दिनांक 31-01-015 को कर दिया, अब उसके जिम्‍मे कोई अवशेष नहीं है।

     परिवाद पत्र में परिवादीगण ने कहा है कि आवंटित फ्लैटों का Completion Certificate न प्रस्‍तुत किये जाने के कारण कोई भी बीमा कम्‍पनी उसमें निवास करने वाले व्‍यक्तियों के जीवन और सम्‍पत्ति की सुरक्षा का बीमा करने को तैयार नहीं है और विपक्षी कम्‍पनी के अधिकारीगण यह बताने में असमर्थ है कि कब तक वह Completion Certificate उपलब्‍ध करायेंगे।

     अत: उपरोक्‍त परिस्थितियों में परिवादीगण ने यह परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।

     विपक्षीगण की ओर से लिखित कथन प्रस्‍तुत कर परिवाद का विरोध किया गया है और कहा गया है कि परिवादीगण द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद उपभोक्‍ता सरंक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत ग्राह्य नहीं है क्‍योंकि परिवादीगण धारा-2-D उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता नहीं है तथा उन्‍होंने वाणिज्यिक उद्देश्‍य से फ्लैट में धन निवेश किया है।

     अपने लिखित कथन में विपक्षीगण ने कहा है कि यह कहना उचित नहीं है कि निर्माण कार्य अधूरा है और रहने योग्‍य नहीं है। Paradise Crystal प्रोजेक्‍ट पूर्णतया पूरा है और रहने योग्‍य है। लगभग 60 परिवार

 

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इसमें निवास भी कर रहे हैं। विपक्षीगण ने अपने लिखित कथन के साथ उक्‍त प्रोजेक्‍ट के फोटोग्राफ भी संलग्‍न किये हैं।

उभयपक्ष की ओर से अपने अभिकथन के समर्थन में शपथ पत्र भी प्रस्‍तुत किये गये है।

     हमने उभयपक्ष के तर्क पर विचार किया है और पत्रावली का अवलोकन सावधानीपूर्वक किया है।

     उभयपक्ष के अभिकथन के आधार पर सर्वप्रथम विचारणीय बिन्‍दु यह है कि धारा-2-1-D उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत परिवादीगण उपभोक्‍ता हैं और उनके द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत संघारणीय है।

परिवादी संख्‍या-1 Girish Chandra Sinha परिवादी संख्‍या-2 Shashank Sinha एवं परिवादी संख्‍या-3 Mayank Sinha के पिता है इस प्रकार यह स्‍पष्‍ट है कि परिवादीगण पिता और पुत्र है।

परिवाद पत्र की धारा-4 में परिवादीगण ने स्‍पष्‍ट रूप से कथन किया है कि परिवादी संख्‍या-1 ने फ्लैट नम्‍बर-0517-ई-05/05 और फ्लैट संख्‍या-0517-ई-05-06 विपक्षीगण के Paradise Crystal प्रोजेक्‍ट में अपने पुत्रों के नाम बुक किया है।

     विपक्षीगण ने अपने लिखित कथन की धारा-17 में यह स्‍वीकार किया है कि परिवादी संख्‍या-1 ने उपरोक्‍त दो फ्लैट परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 के लिए बुक कराया है। परिवादी संख्‍या-1 द्वारा अपने दो पुत्रों के रहने हेतु अलग-अलग फ्लैट बुक कराये जाने के आधार पर यह निष्‍कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि यह फ्लैट परिवादी ने अपने पुत्रों के रहने हेतु नहीं

 

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वरन् वाणिज्यिक उद्देश्‍य हेतु बुक कराया है। पुत्रों को अलग-अलग आवास उपलब्‍ध कराने हेतु फ्लैट क्रय किया जाना स्‍वाभाविक है।

उल्‍लेखनीय है कि परिवादी संख्‍या-1 पिता है और परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 उसके पुत्र हैं और संयुक्‍त हिन्‍दू परिवार की अवधारणा तब तक होती है जबतक यह प्रमाणित न किया जाए कि संयुक्‍त परिवार का विघटन हो चुका है। अत: ऐसी स्थिति में पिता और पुत्र के संयुक्‍त हिन्‍दू परिवार की अवधारणा बनती है और संयुक्‍त हिन्‍दू परिवार के कर्ता और मुखिया के रूप में संयुक्‍त परिवार के सदस्‍यों को आवास उपलब्‍ध कराने हेतु दो अलग-अलग फ्लैट क्रय किया जाना संयुक्‍त परिवार की निजी आवश्‍यकता है।

विपक्षीगण की ओर से अपने लिखित कथन की धारा-8 में मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा Laxmi Engineering Works Vs. PSG Industrial Institute, (1995)3 SCC-583 के निर्णय का उल्‍लेख किया गया है जिसमें मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने निम्‍न मत व्‍यक्‍त किये हैं।

" The National Commission appears to have been taking a consistent view that where a person purchases goods with a view to using such goods for carrying on any activity on a large scale for the purpose of earning profit, he will not be a consumer, within the meaning of Sction 2 (d) (i) of the Act. "

मा0 सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा प्रतिपादित उपरोक्‍त सिद्धान्‍त वर्तमान परिवाद के तथ्‍यों पर लागू नहीं होता है। विपक्षीगण की ओर से मा0 राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा Ramesh Kumar Sahan Hans Vs. Goal Eve Institute and Others, Consumer Complaint No. 135 of 2011 में पारित निर्णय दिनांकित 30-03-2012  अपने लिखित तर्क में उद्धरत किया है

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परन्‍तु उपरोक्‍त विवेचना के आधार पर इस निर्णय का लाभ भी वर्तमान परिवाद के तथ्‍यों के परिप्रेक्ष्‍य में विपक्षीगण को नहीं दिया जा सकता है।

विपक्षीगण का कथन है कि परिवादी संख्‍या-1 ने वाणिज्यिक उद्देश्‍य से दो फ्लैटों में इन्‍वेस्‍टमेंट किया है। अत: यह साबित करने का भार विपक्षीगण पर है परन्‍तु विपक्षीगण ने इस बात का कोई साक्ष्‍य नहीं दिया है कि परिवादी संख्‍या-1 ने और भी फ्लैट व सम्‍पत्ति अपने पुत्रों के नाम से खरीदी है और उसकी बिक्री की है।

उपरोक्‍त विवेचना के आधार पर सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हम इस मत के हैं कि परिवादीगण संयुक्‍त हिन्‍दू परिवार के सदस्‍य है और धारा-2-1-D एवं 2-M उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अनुसार वे और उनका संयुक्‍त परिवार उपभोक्‍ता है तथा उन्‍हें यह परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत प्रस्‍तुत करने का अधिकार है और उनके द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनिम के अन्‍तर्गत संघारणीय है।

अब विचारणीय बिन्‍दु यह है कि क्‍या विवादित फ्लैट अपूर्ण है और रिहायस योग्‍य नहीं है तथा विपक्षीगण ने निर्धारित समय-सीमा के अंदर इनका निर्माण कार्य पूरा कर कब्‍जा व स्‍वत्‍व का हस्‍तान्‍तरण परिवादीगण के पक्ष में न कर सेवा में कमी की है।

परिवाद पत्र की धारा-30 के अनुसार वाद हेतुक दिनांक 28-01-2015 को तब उत्‍पन्‍न हुआ जब विपक्षीगण के अधिकारी ने राणा प्रताप मार्ग लखनऊ कार्यालय में प्रश्‍नगत फ्लैटों के Completion Certificate उपलब्‍ध कराने हेतु निश्चित तिथि बताने में असमर्थ रहे।

 

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परिवाद पत्र की धारा-28 में भी परिवादीगण ने कहा है कि Completion Certificate उपलब्‍ध कराने की निश्चित समय-सीमा बताने में विपक्षी कम्‍पनी के अधिकारी असफल रहे है। इसके साथ ही परिवादीगण ने परिवाद पत्र की धारा-28 में यह भी कहा है कि वास्‍तव में निर्माण कार्य अभी जारी है और परिसर अभी भी सुरक्षित नहीं है इस कारण संबंधित विभाग द्वारा Completion Certificate जारी नहीं किया जा रहा है। विपक्षीगण ने अपने लिखित कथन की धारा-38 में परिवाद पत्र की धारा-28,29 व 30 से इंकार किया है परन्‍तु यह कथन नहीं किया है कि Completion Certificate सक्षम अधिकारी से प्राप्‍त हो चुका है। अत: स्‍पष्‍ट है कि परिवाद पत्र की धारा-28, 29 व 30 के कथन को भ्रामक ढंग से विपक्षीगण ने नकारा है और इस बात का कोई साक्ष्‍य या अभिलेख प्रस्‍तुत नहीं किया है कि संबंधित फ्लैटों का निर्माण कार्य पूरा होकर Completion Certificate प्राप्‍त हो चुका है। अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करने के उपरान्‍त हम इस मत के हैं कि यह मानने हेतु उचित और युक्तिसंगत आधार है कि फ्लैट का निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और फ्लैट कब्‍जा व स्‍वत्‍व के हस्‍तान्‍तरण हेतु तैयार नहीं है क्‍योंकि सक्षम अधिकारी द्वारा निर्माण कार्य का Completion Certificate जारी किये बिना फ्लैटों का कब्‍जा हस्‍तान्‍तरण कानूनन सम्‍भव नहीं है। निर्विवाद रूप से प्रश्‍नगत फ्लैटों के कब्‍जा व स्‍वत्‍व हस्‍तान्‍तरण की अवधि बीत चुकी है अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए हम इस मत के हैं कि विवादित फ्लैट कब्‍जा व स्‍वत्‍व हस्‍तान्‍तरण हेतु अभी अपूर्ण हैं और समय-सीमा के अंदर इनका निर्माण पूराकर एवं आवश्‍यक

 

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औपचारिकताऍं पूरी कर इनका कब्‍जा और स्‍वत्‍व परिवादीगण को हस्‍तान्‍तरित न करके विपक्षीगण ने सेवा में त्रुटि की है।

अब विचारणीय बिन्‍दु यह है कि परिवादीगण कोई उपशम पाने के अधिकारी है।

उपरोक्‍त निष्‍कर्षों से स्‍पष्‍ट है कि दोनों फ्लैटों का Completion Certificate सक्षम अधिकारी से अभी विपक्षीगण को प्राप्‍त नहीं हुआ है। विपक्षीगण ने Completion Certificate प्राप्‍त न होने का कोई उचित और संतोषजनक कारण दर्शित नहीं किया है और यह मानने हेतु कोई उचित आधार नहीं है कि भवन निर्माण का कार्य पूर्ण होने के बाद भी उन्‍हें सक्षम अधिकारी द्वारा Completion Certificate उनके भरसक प्रयास के बाद भी जारी नहीं किया गया है। अत: उन्‍हें विलम्‍ब के लिए दोषी नहीं माना जा सकता है । अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त हम इस मत के हैं कि विपक्षीगण को यह आदेशित किया जाना आवश्‍यक है कि वह संबंधित फ्लैटों का Completion Certificate सक्षम अधिकारी से दो मास के अंदर प्राप्‍त कर उनके कब्‍जा और स्‍वत्‍व का हस्‍तान्‍तरण परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 को करें तथा आवश्‍यक विलेख निष्‍पादित करें। परिवाद पत्र में याचित उपशम संख्‍या-1 तद्नुसार स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।

परिवाद पत्र में उपशम संख्‍या-2 परिवादीगण ने External Electrification Charges and Fire Fighting Charges की अतिरिक्‍त डिमाण्‍ड न किये जाने के संबंध में मांगा है।

उभयपक्ष के अभिकथन एवं साक्ष्‍यों व अभिलेखों के अवलोकन के पश्‍चात हम इस मत के है कि फ्लैट की निर्धारित कीमत 16,00,000/-रू0

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में External Electrification Charges and Fire Fighting Charges शामिल नहीं है अत: इन दोनों मदों  में विपक्षीगण द्वारा अतिरिक्‍त धनराशि की, की गयी मांग अनुचित, अवैधानिक अथवा अनफेयर प्रैक्टिस नहीं कही जा सकती है।

अत: परिवाद पत्र में याचित उपशम-2 स्‍वीकार किये जाने योग्‍य नहीं है।

चूंकि परिवादीगण ने दोनों फ्लैटों के निर्धारित मूल्‍य 16,00,000/-रू0 की तयशुदा धनराशि अदा कर दी है परन्‍तु उन्‍हें कब्‍जा और स्‍वत्‍व उक्‍त फ्लैटों का अभी प्राप्‍त नहीं हुआ है अत: हम इस मत के हैं कि यदि विपक्षीगण दो मास के अंदर फ्लैटों का हस्‍तान्‍तरण परिवादीगण को करने में असफल रहते हैं तो परिवाद पत्र की धारा-26 में उल्लिखित दिनांक 31-01-2015 जिस दिवस को दोनों फ्लैटों की सम्‍पूर्ण तयशुदा धनराशि विपक्षी को अदा की गयी है उक्‍त तिथि से दोनों फ्लैटों के कब्‍जा हस्‍तान्‍तरण तक परिवादीगण को सम्‍पूर्ण अदा की गयी धनराशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्‍याज  माननीय राष्‍ट्रीय आयोग द्वारा Ms Shweta Kapoor and another Vs M/s Unitech Limited and another 2016 (1) C.P.R. 712 N.C. में प्रतिपादित सिद्धान्‍त के अनुसार दिलाया जाना उचित है और यह ब्‍याज मासिक किश्‍तों में दिलाया जाना उचित है। इसके साथ ही यह भी आदेशित किया जाना उचित है कि यदि इस निर्णय की तिथि से एक साल के अंदर परिवादीगण को Completion Certificate प्राप्‍त कर विपक्षीगण कब्‍जा देने में असफल रहते हैं तब वे उपरोक्‍त धनराशि पर ब्‍याज 18 प्रतिशत वार्षिक की दर से देने हेतु उत्‍तरदायी होंगे। परिवादीगण को पॉंच हजार रूपया वाद व्‍यय दिलाया जाना भी उचित है।

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हम इस मत के हैं कि परिवादी द्वारा परिवाद पत्र में याचित अन्‍य उपशम प्रदान किये जाने की आवश्‍यकता नहीं है।

परिवाद उपरोक्‍त निष्‍कर्षों के अनुसार स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।

आदेश

परिवाद स्‍वीकार किया जाता है और विपक्षीगण को आदेशित किया जाता है कि वे परिवादी संख्‍या-1 के पुत्रगण परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 को आवंटित फ्लैटों का Completion Certificate सक्षम अधिकारी से प्राप्‍त कर कब्‍जा व स्‍वत्‍व का हस्‍तान्‍तरण परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 को इस निर्णय की तिथि से दो माह के अंदर करें तथा आवश्‍यक विलेख निष्‍पादित करें। यदि इस अवधि में विपक्षीगण आवंटित उपरोक्‍त फ्लैटों का Completion Certificate प्राप्‍त कर कब्‍जा व स्‍वत्‍व का हस्‍तान्‍तरण परिवादीगण संख्‍या-2 व 3 को करने में असफल रहते हैं तो वे दिनांक 31-01-2015 (जिस दिवस को दोनों फ्लैटों की तयशुदा सम्‍पूर्ण धनराशि विपक्षीगण को अदा की गयी है) से दोनों फ्लैटों हेतु सम्‍पूर्ण अदा की गयी धनराशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्‍याज कब्‍जा हस्‍तान्‍तरण की तिथि तक परिवादीगण को अदा करेंगे। इसके साथ ही यह भी आदेशित किया जाता है कि यदि इस निर्णय की तिथि से एक साल के अंदर Completion Certificate प्राप्‍त कर विपक्षीगण उक्‍त फ्लैटों का कब्‍जा देने में असफल रहते हैं तब वे उपरोक्‍त धनराशि पर ब्‍याज 18 प्रतिशत वार्षिक की दर से देने हेतु उत्‍तरदायी होंगे। प्रत्‍येक मास के अन्तिम दिवस तक देय ब्‍याज का भुगतान अगले मास की दस तारीख तक किया जायेगा। ऐसा करने में विफल रहने पर प्रत्‍येक मास के लिए परिवादीगण धारा-27 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत कार्यवाही करने हेतु स्‍वतंत्र होंगे।

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विपक्षीगण परिवादी को वाद व्‍यय के रूप में 5,000/-रू0 और अदा करेंगे।

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                  ( बाल कुमारी)

          अध्‍यक्ष                              सदस्‍य

कोर्ट नं0-1 प्रदीप मिश्रा

 

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MRS. Bal Kumari]
MEMBER

Consumer Court Lawyer

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Bhanu Pratap

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Experties

Consumer Court | Cheque Bounce | Civil Cases | Criminal Cases | Matrimonial Disputes

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