Uttar Pradesh

StateCommission

RP/66/2016

Arun Kumar - Complainant(s)

Versus

Anoop Kumar Chaturvedy and others - Opp.Party(s)

Umesh Kumar Sharma

25 Jul 2018

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Revision Petition No. RP/66/2016
( Date of Filing : 22 Apr 2016 )
(Arisen out of Order Dated 16/03/2016 in Case No. C/104/2015 of District Etawah)
 
1. Arun Kumar
Etawah
...........Appellant(s)
Versus
1. Anoop Kumar Chaturvedy and others
Etawah
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 HON'BLE MR. Mahesh Chand MEMBER
 
For the Petitioner:
For the Respondent:
Dated : 25 Jul 2018
Final Order / Judgement

                                                                                                 सुरक्षि‍त

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

                                                                                         पुनरीक्षण संख्‍या- 66/2016

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, इटावा द्वारा परिवाद संख्‍या- 104/2015 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 16-03-2016 के विरूद्ध)

 

अरूण कुमार पुत्र स्‍व0 विशुद्धानन्‍द चतुर्वेदी, निवासी 474 छिपेडी, जिला इटावा।

                                                                                            पुनरीक्षणकर्ता

बनाम

1- अनूप कुमार चतुर्वेदी पुत्र विशुद्धानन्‍द चतुर्वेदी वर्तमान निवासी, 240-ए, संस्‍कृत परिसर, ब्‍लाक नं० आईडीए फ्लैट, सम्‍बाद नगर, इन्‍दौर, मध्‍य प्रदेश।

2- सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया द्वारा ब्रांच मैनेजर, तकिया, आजाद नगर, इटावा

(श्री राजेन्‍द्र कुमार, ब्रांच मैनेजर by name party )

3- मैनेजिंग डायरेक्‍टर/चेयरमैन, सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया चन्‍द्रमुखी नरिमुन प्‍वांइट मुम्‍बई (महाराष्‍ट्र) 400021

                                                                                                         विपक्षीगण

समक्ष:-

 माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष।

 माननीय श्री महेश चन्‍द, सदस्‍य

 

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्‍ता, श्री ए०के० पाण्‍डेय

विपक्षीगण की ओर से उपस्थित :    कोई उपस्थित नहीं।

दिनांक: 07-09-2018

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित

                                                                                                               निर्णय

 

परिवाद संख्‍या 104 सन् 2015 अनूप कुमार चतुर्वेदी बनाम सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया व अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, इटावा द्वारा पारित आदेश दिनांक 16-03-2016 के विरूद्ध यह पुनरीक्षण याचिका धारा- 17-(1) (बी) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गयी है।

 

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आक्षे‍पि‍त आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद में तृतीय पक्ष अरूण कुमार की ओर से प्रस्‍तुत आवेदन पत्र को खारिज कर दिया है और इसके साथ ही साक्ष्‍य परिवादी हेतु दिनांक 30-03-2016 तिथि नियत की है, जिससे क्षुब्‍ध होकर तृतीय पक्ष अरूण कुमार चतुर्वेदी ने यह पुनरीक्षण याचिका प्रस्‍तुत की है।

  सुनवाई के समय पुनरीक्षणकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री ए०के० पाण्‍डेय उपस्थित आए हैं। विपक्षीगण की ओर से नोटिस तामीला के बाद भी कोई उपस्थित नहीं हुआ है। अत: पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता को सुनकर पुनरीक्षण याचिका का निस्‍तारण किया जा रहा है।

वर्तमान पुनरीक्षण याचिका के निस्‍तारण हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि विपक्षी संख्‍या-1 अनूप कुमार चतुर्वेदी जो परिवाद में परिवादी हैं, ने उपरोक्‍त परिवाद विपक्षीगण सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया, श्री राजेन्‍द्र कुमार, शाखा प्रबन्धक, सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया और प्रबन्‍ध/निदेशक चेयरमैन सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया,  के विरूद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसकी माता स्‍व0 श्रीमती रेशम कुमारी चतुर्वेदी का एक लॉकर संख्‍या- 668 विपक्षीगण संख्‍या- 1 और 2 की तकिया आजादगान, शाखा इटावा में दिनांक 07-02-2011 से चला आ रहा है जिसके सम्‍बन्‍ध में श्रीमती रेशम कुमारी ने अपने पुत्र परिवादी अनूप कुमार चतुर्वेदी को एक मात्र नीमिनी नियुक्‍त किया है।

परिवाद पत्र के अनुसार श्रीमती रेशम कुमारी चतुर्वेदी की मृत्‍यु दिनांक 04-03-2015 को हो गयी है और उनके पति श्री विशुद्धानन्‍द की मृत्‍य पहले ही हो चुकी थी। अत: परिवादी, स्‍व0 श्रीमती रेशम कुमारी की मृत्‍यु के बाद लॉकर संख्‍या 668 का एकल रूप से संचालन करने के लिए वैधानिक रूप से उत्‍तराधिकारी है और विपक्षी बैंक नामिनी परिवादी को लॉकर का संचालन की

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अनुमति देने हेतु बाध्‍य है। परन्‍तु विपक्षी संख्‍या-2 शाखा प्रबन्‍धक, सेन्‍ट्रल बैंक आफ इण्डिया तकिया, आजादगान परिवादी को लॉकर का संचालन नहीं कराने दे रहे हैं जो नियम विरूद्ध है। अत: विवश होकर परिवादी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।

परिवाद लम्‍बन की अवधि में ही तृतीय पक्ष अरूण कुमार ने जिला फोरम के समक्ष परिवाद में पक्षकार बनाए जाने हेतु आवेदन पत्र इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि श्रीमती रेशम कुमारी के दो पुत्र और अरूण कुमार, व अनिल कुमार तथा तीन पुत्रियॉं, पुष्‍पलता बाजपेई, देबेश बाजपेई, एवं कुसुम द्धिवेदी हैं, इन सबका लॉकर पर समान अधिकार है। लॉकर के सम्‍बन्‍ध में मूल वाद संख्‍या 170/2015  अरूण कुमार बनाम अनूप कुमार सिविल जज के न्‍यायालय में चल रहा है जिसकी जानकारी परिवादी अनूप कुमार चतुर्वेदी को है। फिर भी बदनियती से धोखा-धड़ी करने के लिए लॉकर खोलकर सम्‍पूर्ण सम्‍पत्ति हड़पने के उद्देश्‍य से उसने परिवाद प्रस्‍तुत किया है। अत: उसे भी परिवाद में पक्षकार बनाया जाए।

परिवादी और विपक्षी बैंक ने तृतीय पक्ष अरूण कुमार चतुर्वेदी के उपरोक्‍त प्रार्थना पत्र पर आपत्ति प्रस्‍तुत की है और निवेदन किया है कि‍ आवेदन पत्र खारिज किया जाए।

जिला फोरम ने उभय पक्ष को सुनकर अपने आक्षेपित आदेश में यह माना है कि परिवादी अनूप कुमार मृतका श्रीमती रेशम कुमारी का नामिनी है और नामिनी के रूप में उसके द्वारा बैंक लॉकर के संचालन पर वर्तमान परिवाद में विचार होना है।

     जिला फोरम ने अपने आक्षेपित आदेश में यह भी उल्‍लेख किया है कि विपक्षी बैंक की नियमावली प्रस्‍तुत की गयी है जिसमें नियम 45 जेड.सी.

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उपनियम 4 के अनुसार नॉमिनी को ही लॉकर संचालन का अधिकार है। जिला फोरम ने अपने निर्णय में यह भी उल्‍लेख किया है कि व्‍यवहार प्रक्रिया संहिता के आदेश का नियम 10 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत प्राविधान जिला फोरम पर लागू नहीं होता है।

     उपरोक्‍त आधारों पर ही जिला फोरम ने आक्षेपित आदेश के द्वारा पुनरीक्षणकर्ता का आवेदन-पत्र निरस्‍त कर दिया है।

     पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि प्रश्‍नगत मृतका द्वारा नामिनी बनाए जाने के आधार पर मृतक के अन्‍य विधिक उत्‍तराधिकारीगण का लॉकर के स्‍वामित्‍व का अधिकार समाप्‍त नहीं हो सकता है। अत: लॉकर में रखी गयी सम्‍पत्ति के निस्‍तारण के सम्‍बन्‍ध में उन्‍हें अपना पक्ष प्रस्‍तुत करने का अवसर जिला फोरम द्वारा दिया जाना चाहिए। अत: जिला फोरम ने पुनरीक्षणकर्ता तृतीय पक्ष द्वारा पक्षकार बनाए जाने हेतु प्रस्‍तुत आवेदन पत्र अस्‍वीकार कर अपने क्षेत्राधिकार के प्रयोग में त्रुटि की है जिससे पुनरीक्षणकर्ता के प्रति अन्‍याय हो सकता है।

     हमने पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क पर विचार किया है।

     जिला फोरम के आक्षेपित आदेश दिनांक 16-03-2016 से स्‍पष्‍ट है कि  सिविल न्‍यायालय के समक्ष मूल वाद संख्‍या 170/2015 अरूण कुमार बनाम अनूप कुमार मृतका  श्रीमती रेशम कुमारी के प्रश्‍नगत लॉकर व अधिकारिता के सम्‍बन्‍ध में लम्बित है। जिला फोरम द्वारा पक्षों के बीच उत्‍तराधिकार व स्‍वत्‍त के विवाद का निर्णय नहीं किया जा सकता है। पक्षों के बीच स्‍वत्‍त और उत्‍तराधिकार के विवाद के प्रश्‍न को निर्णीत करने हेतु दीवानी न्‍यायालय ही समक्ष न्‍यायालय है। प्रश्‍नगत लॉकर के सम्‍बन्‍ध में विवाद व्‍यवहार न्‍यायालय में लम्बित है। अत: पक्षों के बीच विवाद का निस्‍तारण दीवानी न्‍यायालय द्वारा

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ही किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में वर्तमान परिवाद में पुनरीक्षणकर्ता को पक्षकार बनाए जाने की कोई आवश्‍यकता नहीं है।

 पक्षों के बीच विवाद इसी प्रश्‍नगत लॉकर के सम्‍बन्‍ध व्‍यवहार न्‍यायालय में लम्बित होने के कारण जिला फोरम के समक्ष लम्बित परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत चलने योग्‍य है, यह एक महत्‍वपूर्ण विचारणीय महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु है। अत: उपरोक्‍त विवेचना एवं सम्‍पूर्ण तथ्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त हम इस मत के हैं कि जिला फोरम के प्रश्‍नगत आदेश में किसी हस्‍तक्षेप की आवश्‍यकता नहीं है। परन्‍तु जिला फोरम को यह निर्देशित किया जाना आवश्‍यक है कि जिला फोरम इस बिन्‍दु पर विचार कर आदेश पारित करें कि क्‍या पक्षों के बीच प्रश्‍नगत लॉकर के सम्‍बन्‍ध में व्‍यवहार न्‍यायालय में विवाद लम्बित होने के बावजूद जिला फोरम के समक्ष परिवाद ग्राह्य है।

     उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर पुनरीक्षण याचिका अंतिम रूप से इस प्रकार निस्‍तारित की जाती है कि जिला फोरम इस बिन्‍दु पर विचार करें कि क्‍या पक्षों के बीच प्रश्‍नगत लॉकर के सम्‍बन्‍ध में व्‍यवहार न्‍यायालय में वाद लम्बित होने के बावजूद यह परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत चलने योग्‍य है। इस बिन्‍दु पर जिला फोरम स्‍पष्‍ट रूप से विचार कर आदेश पारित करने के बाद ही परिवाद में अग्रिम कार्यवाही विधि के अनुसार करेगा। निर्णय की प्रति जिला फोरम को अनुपालन हेतु तुरन्‍त प्रेषित की जाए।

 

 

(न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)                  (महेश चन्‍द)             

        अध्‍यक्ष                                               सदस्‍य                                           

         

 

 

कृष्‍णा, आशु0

कोर्ट नं01

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT
 
[HON'BLE MR. Mahesh Chand]
MEMBER

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