Uttar Pradesh

StateCommission

R/2012/204

Housing Development Finance Corporation - Complainant(s)

Versus

Anisa Bano - Opp.Party(s)

Vikas Agarwal

24 Mar 2015

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
Revision Petition No. R/2012/204
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Housing Development Finance Corporation
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Anisa Bano
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Chandra Bhal Srivastava PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Sanjay Kumar MEMBER
 
For the Petitioner:
For the Respondent:
ORDER

 

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0 लखनऊ

 

 

(जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, झांसी द्वारा निष्‍पादन वाद  संख्‍या 41 सन 2012 में पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.09.2012. के विरूद्ध)

 

पुनरीक्षण  संख्‍या 204 सन 2012

 

हाउसिंग डिवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन लि0 द्वितीय तल, हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स हाउस, 25, अशोक मार्ग, लखनऊ द्वारा असिस्‍टेंट मैनेजर, लीगल एवं अन्‍य।

 .............अपीलार्थी

बनाम

 

 

अनीसा बानो पत्‍नी स्‍व0 शमीम अहमद, निवासी क्‍वाटर नम्‍ब्‍र II/367, बी एच ई एल टाउनशिप, खैला, झांसी उ0प्र0 ।

       .................प्रत्‍यर्थी

 

समक्ष:-

1    मा0   श्री चन्‍द्र भाल श्रीवास्‍तव,  पीठासीन  सदस्‍य।

2    मा0   संजय कुमार, सदस्‍य।

 

पुनरीक्षणकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता - श्री विकास अग्रवाल।

प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता- कोई नहीं ।      

 

दिनांक:  

 

    

श्री चन्‍द्रभाल श्रीवास्‍तव, सदस्‍य (न्‍यायिक) द्वारा उदघोषित ।

निर्णय

 

      प्रस्‍तुत पुनरीक्षण, जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, झांसी द्वारा निष्‍पादन वाद संख्‍या 41 सन 2012 में पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.09.2012. के विरूद्ध प्रस्‍तुत किया गया है जिसके द्वारा जिला फोरम ने एच0डी0एफ0सी0 बैंक को अग्रिम आदेश तक परिवादिनी द्वारा बैंक के पक्ष में बन्‍धक रखी गयी सम्‍पत्ति को बेंचने से मना कर दिया है।

हमने पुनरीक्षणकर्ता विद्वान अधिवक्‍तागण की बहस सुन ली है। नोटिस के बावजूद प्रत्‍यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है। अभिलेख का अनुशीलन किया गया ।

अभिलेख के अनुशीलन से स्‍पष्‍ट है कि श्रीमती अनीसा बानों ने परिवाद संख्‍या 284 सन 2009, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्‍स लि0 एवं अन्‍य के विरूद्ध जिला फोरम में दाखिल किया था जिसमें भारतीय जीवन बीमा निगम एवं अपीलार्थी हाउसिंग डिवलपमेंट फाइनेंस कार्पोरेशन लि0 भी पक्षकार था। परिवादिनी के पति ने एचडीएफसी बैंक से गृह निर्माण हेतु ऋण लिया था तथा भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा आवासीय बीमा भी बैंक द्वारा कराया गया था । परिवादिनी के पति की मृत्‍यु होने के कारण बीमा कम्‍पनी को आवश्‍यक प्रीमियम का भुगतान नहीं हुआ जिससे बीमा कम्‍पनी ने परिवादिनी का दावा खण्डित कर दिया । जिला फोरम ने अपने निर्णय में भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा सेवा में कमी पाते हुए परिवादिनी का परिवाद बीमा निगम के विरूद्ध स्‍वीकार करते हुए 2,83,995.00 रू0 ब्‍याज सहित भुगतान किए जाने हेतु निर्देश दिया, जिससे विक्षुबध होकर भारतीय जीवन बीमा निगम द्वारा अपील संख्‍या 1835 सन 12 राज्‍य उपभोक्‍ता आयोग में दाखिल की गयी जिसमें पारित आदेश दिनांक 14.8.2012 द्वारा प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश तथा निष्‍पादन कार्यवाही समाप्‍त कर दी गयी। ऐसा प्रतीत होता है कि जिला फोरम ने उक्‍त आदेश पर ध्‍यान न देते हुए निष्‍पादन वाद संख्‍या 41/।2 के द्वारा निष्‍पादन कार्यवाही प्रारम्‍भ की तथा पुनरीक्षणकर्ता एचडीएफसी बैंक के विरूद्ध प्रश्‍नगत आदेश पारित किया । पुनरीक्षणकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता का यह तर्क है कि संबंधित परिवाद संख्‍या 284 सन 09 में एचडीएफसी बैंक के विरूद्ध कोई आदेश पारित नहीं किया गया है, ऐसी स्थिति में एचडीएफसी बैंक को ऋण वसूल करने का अधिकार है और उसके द्वारा प्रश्‍नगत कार्यवाही सरफेसी एक्‍ट 2002 (SARFAESI  ACT 2002)  के अन्‍तर्गत प्रारम्‍भ की गयी थी, जिसके संबंध में जिला फोरम को कोई क्षेत्राधिकार नही है।

यह एक विधि का स्‍थापित सिद्धांत है कि सरफेसी के मामलों में उपभोक्‍ता फोरम को क्षेत्राधिकार नहीं है, ऐसी स्थिति में जिला फोरम द्वारा प्रश्‍नगत आदेश के माध्‍यम से एचडीएफसीबैंक द्वारा सरफेसी एक्‍ट के अन्‍तर्गत की गयी कार्यवाही अवरूद्ध की गयी है, जोकि विधिपूर्ण नहीं है।

परिणामत:, यह पुनरीक्षण तदनुसार स्‍वीकार किए जाने योग्‍य है।

                                                आदेश

 

            प्रस्‍तुत पुनरीक्षण स्‍वीकार करते हुए जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, झांसी द्वारा अपीलार्थी के विरूद्ध पारित प्रश्‍नगत आदेश दिनांक 06.09.2012 खण्डित किया जाता है।

उभय पक्ष इस पुनरीक्षण का अपना-अपना व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

      इस निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार नि:शुल्‍क उपलब्‍ध करा दी जाए।

 

 

(चन्‍द्र भाल श्रीवास्‍तव)                           (संजय कुमार)

पीठा0 सदस्‍य (न्‍यायिक)                                                     सदस्‍य

      कोर्ट-2

(S.K.Srivastav,PA)

 

 

 
 
[HON'BLE MR. Chandra Bhal Srivastava]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Sanjay Kumar]
MEMBER

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