Uttar Pradesh

StateCommission

A/2010/1994

Kotak Mahindra Old Mutual Life Insurance - Complainant(s)

Versus

Anarasi Devi - Opp.Party(s)

Shikhar Srivastav

28 Feb 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2010/1994
( Date of Filing : 25 Nov 2010 )
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Kotak Mahindra Old Mutual Life Insurance
a
...........Appellant(s)
Versus
1. Anarasi Devi
a
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Gobardhan Yadav MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 28 Feb 2019
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

सुरक्षित

अपील संख्‍या-1994/2010

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, अम्‍बेडकरनगर द्वारा परिवाद संख्‍या 97/2003 में पारित निर्णय दिनांक 26.06.2009के विरूद्ध)

कोटेक महिन्‍द्रा ओल्‍ड म्‍यूच्‍युल लाइफ इं0लि0 9 वां तल, गोदरेज

कोलीसियम बिहाइन्‍ड एवरार्ड नगर मुम्‍बई 400022 द्वारा श्री आर.

महेश कुमार, एसोसिएट वाइस प्रेसीडेन्‍ट लीगल एण्‍ड कम्‍पलाइन्‍स। 

                                             .......अपीलार्थी/विपक्षी

बनाम्

1.अनारसी देवी पत्‍नी स्‍व0 रामदीन निवासी ग्राम गोविंदपुर काजी

पोस्‍ट धीवा दौलतपुर(केदार नगर) तहसील टाण्‍डा जनपद अम्‍बेडकरनगर।

2.महिन्‍द्रा एण्‍ड महिन्‍द्रा फाइनेन्सियल सर्विसेस लि0 साधना हाउस

द्वितीय तल, बिहाइन्‍ड महिन्‍द्रा टावर, 570 पी.वी. रोड वर्ली,

मुम्‍बई 400016

3.महिन्‍द्रा एण्‍ड महिन्‍द्रा फाइनेन्‍स कंपनी आशीर्वाद गेस्‍ट हाउस, तहसील

तिरखा अकबरपुर जिला अम्‍बेडकरनगर।        ......प्रत्‍यर्थीगण/परिवादिनी

समक्ष:-

1. मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य।

2. मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्‍य।

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित  : श्री शिखर श्रीवास्‍तव, विद्वान अधिवक्‍ता।

प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 की ओर से उपस्थित  : श्री अदील अहमद, विद्वान

                                      अधिवक्‍ता।

दिनांक 26.03.2019

मा0 श्री उदय शंकर अवस्‍थी, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय

     यह अपील जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम अम्‍बेडकरनगर  द्वारा परिवाद संख्‍या 87/2008 में पारित प्रश्‍नगत निर्णय एवं आदेश दि. 26.06.2009 के विरूद्ध योजित की गई है।

     संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार है कि प्रत्‍यर्थी/परिवादिनी के कथनानुसार परिवादिनी के पति स्‍व0 रामदीन ने 3 लाख रूपये ऋण प्राप्‍त करके तथा रू. 293102/- नगद जमा करके एक महिन्‍द्रा बोलेरो कार पंजीयन संख्‍या

 

-2-

यूपी 45/बी-1397 दि. 18.09.07 को अमित आटो सेल्‍स, अकबरपुर जनपद अम्‍बेडकरनगर से क्रय की थी। विपक्षी संख्‍या 2 व 3 द्वारा संविदा की कोई प्रति परिवादिनी के पति को प्राप्‍त नहीं कराई गइ्र। प्रत्‍यर्थी संख्‍या 3 द्वारा समस्‍त औपचारिकताओं को पूर्ण करवाते समय एक योजना के विषय में परिवादिनी के पति को अवगत कराया गया, जिसका नाम महिन्‍द्रा लोन सुरक्षा(एमएलएस) था। उक्‍त योजना के अंतर्गत प्रत्‍यर्थी संख्‍या 3 द्वारा यह बताया गया कि यह एक तरह का बीमा है, बीमाधार के जीवित न रहने पर शेष बची हुई किश्‍तों को ऋणी के परिवार वालों को नहीं देना होगा, क्‍योंकि बची किश्‍तें अपीलकर्ता बीमा कंपनी का कांट्रेक्‍ट होगा, तदनुसार किश्‍तें बीमा कंपनी द्वारा भुगतान की जाएगी। प्रत्‍यर्थी संख्‍या 3 के निर्देशानुसार परिवादिनी के पति ने एमएलएस फार्म पर हस्‍ताक्षर कर दिया तथा उसी दिन दि. 18.09.07 को बीमा की किश्‍त रू. 4701/- प्रत्‍यर्थी संख्‍या 3 को नगद प्रदान की गई तथा इस संदर्भ में रसीद एवं एग्रीमेन्‍ट संख्‍या 703336 प्रदान किया गया। दि. 16.12.2007 को परिवादिनी के पति के सीने में तेज दर्द उठा, जब तक उन्‍हें किसी चिकित्‍सक के यहां ले जाने का उपक्रम होता उनकी हृदय गति रूक जाने से मृत्‍यु हो गई। घटना की सूचना प्रत्‍यर्थी संख्‍या 3 को दी गई। इसके उपरांत अपीलकर्ता बीमा कंपनी द्वारा जांचकर्ता नियुक्‍त किया गया। अपीलकर्ता बीमा कंपनी द्वारा दि. 30.05.2008 को एक लिखित पत्र प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 के माध्‍यम से प्राप्‍त हुआ, जिसके तहत परिवादिनी को यह सूचित किया गया कि परिवादिनी का दावा अस्‍वीकार कर दिया गया है। परिवादिनी के पति को लगभग 16 वर्षों से डायबटीज से बीमार बताया गया, जबकि परिवादिनी के पति कभी भी ऐसी

 

 

-3-

किसी बीमारी से पीडि़त नहीं थे। परिवादिनी ने दावे पर पुनर्विचार की याचना अपीलकर्ता से की, किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई तथा ऋण की किश्‍तों की वसूली की धमकी दी गई, जिससे परिवादिनी को ही गाड़ी की किश्‍तें प्रतिमाह जमा करनी पड़ रही हैं, अत: परिवाद जिला मंच के समक्ष इस अनुतोष के साथ योजित किया गया कि प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 को आदेशित किया जाए कि दिसम्‍बर 2007 से लेकर शेष बची 20 किश्‍तों की धनराशि अपीलकर्ता बीमा कंपनी से वसूली तथा दिसम्‍बर 2007 से लेकर मार्च 2009 तक प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 द्वारा परिवादिनी से वसूली गई किश्‍त 18 प्रतिशत ब्‍याज सहित परिवादिनी को अदा करें और एक लाख रूपये आर्थिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करें तथा रू. 7700/- वाद व्‍यय के रूप में दिलाया जाए।   

     परिवाद के विपक्षीगण की ओर से जिला मंच के समक्ष कोई उपस्थित नहीं हुआ। जिला मंच ने परिवादिनी का परिवाद अपीलकर्ता एवं प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 के विरूद्ध एकपक्षीय रूप से स्‍वीकार करते हुए अपीलकर्ता को आदेशित किया कि वह परिवादिनी द्वारा बीमाधारक की मृत्‍यु के उपरांत जमा की गई धनराशि अंकन रू. 242860/- को 8 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज की दर से परिवादिनी को अदा करे। मृत्‍यु के उपरांत संबंधित 4 किश्‍तें जो बकाया हैं उसे प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 को अदा करें। अपीलकर्ता तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 मिलकर आर्थिक, मानसिक क्षति के रूप में रू. 1000/- तथा वाद व्‍यय के रूप में रू. 1000/- परिवादिनी को अदा करें। उक्‍त्‍ आदेश का अनुपालन आदेश की तिथि से 2 माह में किया जाए, अन्‍यथा परिवादिनी संपूर्ण रकम आदेश की तिथि से अदायगी तक 10 प्रतिशत साधारण वार्षिक

 

 

-4-

ब्‍याज की दर से विपक्षी संख्‍या 1, 2 व 3 से प्राप्‍त करेगी।

     इस निर्णय से क्षुब्‍ध होकर यह अपील योजित की गई।

हमने अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता श्री शिखर श्रीवास्‍तव तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 के विद्वान अधिवक्‍ता श्री अदील अहमद के तर्क सुने। प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 पर नोटिस की तामीला आदेश दि. 03.04.18 द्वारा पर्याप्‍त मानी गई। प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।

अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किय गया। अपीलकर्ता बीमा कंपनी तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 के मध्‍य ग्रुप इंश्‍योरेंस संविदा हुआ है। इस संविदा की शर्तों के अंतर्गत बीमाधारक से किसी व्‍यक्ति द्वारा ऋण लिए जाने पर तथा पालिसी के प्रभावी होने की तिथि पर ऋण की धनराशि देय होने की स्थिति में वह व्‍यक्ति वांछित प्रीमियम की अदायगी तथा वांछित अभिलेख प्रस्‍तुत करने के उपरांत सदस्‍य कहलाएगा। इस बीमा पालिसी का उद्देश्‍य किसी सदस्‍य की असामयिक मृत्‍यु होने की स्थिति में बीमाधारक के जोखिम को आच्‍छादित करना था। प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 रामदीन वर्मा(सदस्‍य) ने व्‍यावसायिक वाहन के क्रय हेतु तीन लाख रूपये प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 से ऋण प्राप्‍त किया था तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 द्वारा ली गई बीमा पालिसी में सम्मिलित होने का विकल्‍प भी चुना था। इस बीमा संविदा की शर्तों के अनुसार प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 ने परिवादिनी के पति से उसके अच्‍छे स्‍वास्‍थ्‍य के संदर्भ में घोषण पत्र प्राप्‍त किया था तथा इस घोषणा पत्र को अपीलकर्ता बीमा कंपनी को प्रस्‍तुत किया था। इस बीमा पालिसी के अंतर्गत परिवादिनी के पति को बीमा पालिसी का लाभ दि. 16.10.2017 से प्रदान किया गया था। दि. 14.03.2008 को अपीलकर्ता बीमा कंपनी को प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 द्वारा बीमा दावा की सूचना प्रेषित की गई, जिसके द्वारा यह

 

-5-

सूचित किया गया कि परिवादिनी के पति श्री रामदीन यादव सदस्‍य की मृत्‍यु दि. 18.12.2007 को हो गई, क्‍योंकि उक्‍त्‍ सदस्‍य की मृत्‍यु बीमा पालिसी प्रभावी होने की तिथि से लगभग 2 माह की अवधि के मध्‍य हो गई, अत: बीमा कंपनी द्वारा बीमा दावे की जांच कराई गई, जिनके द्वारा अपीलकर्ता बीमा कंपनी को आख्‍या दि. 07.05.2008 को प्रस्‍तुत की गई, जिससे यह ज्ञात हुआ कि परिवादिनी के पति( सदस्‍य) डायबटीज एवं हाइपरटेन्‍शन के रोग से पिछले 15 वर्षों से पीडि़त थे। उनका पंजीयन एसजीपीजीआई लखनऊ में पंजीकृत संख्‍या 2007432536 पर दर्ज किया गया। इस संस्‍थान में परिवादिनी के पति के इलाज के संदर्भ में अनुरक्षित केस फाइल में दि. 22.10.2007 को किए गए इन्‍दराज से यह विदित होता है कि परिवादिनी के पति पिछले 15 सालों से डायबटीज एवं हाइपरटेन्‍शन के रोग से पीडि़त थे तथा बीमा पालिसी प्रभावी होने की तिथि से एक माह पूर्व से ही उन्‍हें  डायलसिस प्रदान की जा रही थी। इस प्रकार परिवादिनी के पति ने अपने स्‍वास्‍थ्‍य के विषय में सारवान तथ्‍यों, अपनी किडनी की बीमारी, डायबटीज एवं हाइपरटेन्‍शन की बीमारी से बीमा पालिसी प्राप्‍त होने के पूर्व से ग्रसित होने के तथ्‍य को छिपाया था और इस तथ्‍य को छिपाते हुए बीमा संविदा के अंतर्गत सदस्‍य के रूप में सम्मिलित हुए थे, अत: परिवादिनी के पति द्वारा सारवान तथ्‍यों को छिपाते हुए बीमा पालिसी का लाभ प्राप्‍त करने का प्रयास किया गया, अत: बीमा दावा अस्‍वीकार करके अपीलकर्ता बीमा कंपनी द्वारा सेवा में कोई त्रुटि नहीं की गई।    

इस संदर्भ में अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्‍ता ने अपील मेमो के साथ संजय गांधी पोस्‍ट ग्रेजुएट इंडिया आफ मेडिकल साइंसेज, लखनऊ में परिवादिनी के पति के इलाज के संदर्भ में अनुरक्षित ओपीडी केस फाइल के

 

-6-

दि. 20.10.2007 के इन्‍दराज की फोटोप्रति दाखिल की, जिसमें यह तथ्‍य उल्लिखित है कि परिवादिनी के पति एक माह से डायलसिस पर थे तथा पिछले 16 वर्षों से वह डायबटीज रोग से पीडि़त थे। इसके अतिरिक्‍त वह हाइपरटेन्‍शन से भी पीडि़त थे।

     उल्‍लेखनीय है कि प्रश्‍नगत निर्णय अपीलकर्ता तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 के विरूद्ध एकपक्षीय पारित किया गया है। मामले की तथ्‍य एवं परिस्थितियों के आलोक में हमारे विचार से उभय पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए जाने के उपरांत गुणदोष के आधार पर परिवाद का निस्‍तारण कराया जाना न्‍यायोचित होगा। अत: परिवाद गुणदोष के आधार पर निस्‍तारण हेतु प्रतिप्रेषित किया जाना उपयुक्‍त होगा। तदनुसार अपील स्‍वीकार किए जाने योग्‍य है। 

आदेश

     प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार की जाती है। जिला मंच द्वारा पारित प्रश्‍नगत निर्णय दि. 26.06.2009 अपास्‍त किया जाता है। जिला मंच को निर्देशित किया जाता है कि उभय पक्ष को सुनवाई का अवसर प्रदान करते हुए परिवाद का निस्‍तारण गुणदोष के आधार पर यथासंभव आदेश की प्रति प्राप्‍त किए जाने की तिथि से 6 माह के अंदर किया जाना सुनिश्चित करें। अपीलकर्ता तथा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 2 व 3 को निर्देशित किया जाता है कि जिला मंच के समक्ष दि. 10.04.2019 को उपस्थित हों।

     उभय पक्ष अपना-अपना अपीलीय व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

     निर्णय की प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार उपलब्‍ध कराई जाए।

 

       (उदय शंकर अवस्‍थी)                        (गोवर्द्धन यादव)                                                                                                                                                पीठासीन सदस्‍य                               सदस्‍य         

राकेश, पी0ए0-2, कोर्ट-2

 

 

 

 

 

 

 
 
[HON'BLE MR. Udai Shanker Awasthi]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Gobardhan Yadav]
MEMBER

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