(राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0 प्र0 लखनऊ)
सुरक्षित
अपील संख्या 554/2013
(जिला मंच लखीमपुर खीरी द्वारा परिवाद सं0 261/2008 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 14/02/2013 के विरूद्ध)
- सुपरिटेन्डेन्ट आफ पोस्ट आफिसेस, खीरी डिवीजन, लखीमपुर खीरी।
- सीनियर सुपरिटेन्डेन्ट आफ पोस्ट आफिसेस, इलाहाबाद डिवीजन इलाहाबाद।
…अपीलार्थीगण/विपक्षीगण
बनाम
अजय कुमार शुक्ला पुत्र श्री बी0एल0 शुक्ला निवासी- 359, सेठ घाट रोड, मोहल्ला अर्जुनपुरवा, सिटी व जिला लखीमपुर खीरी।
.........प्रत्यर्थी/परिवादी
समक्ष:
1. मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य ।
2. मा0 श्री महेश चन्द, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : विद्वान अधिवक्ता श्री उदय वीर सिंह।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक:- 19-04-2017.
मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठा0 सदस्य द्वारा उदघोषित ।
निर्णय
प्रस्तुत अपील जिला मंच लखीमपुर खीरी द्वारा परिवाद सं0 261/2008 में पारित निर्णय दिनांकित 14/02/2013 के विरूद्ध योजित की गई है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार है कि प्रत्यर्थी/परिवादी के कथनानुसार लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश सम्मिलित अवर अधीनस्थ एवं सामान्य/ विशेष चयन परीक्षा 2008 में सम्िमलित होने हेतु उसने आवेदन पत्र प्रधान डाकघर की शाखा बतौर पटल अधिवक्ता संघ से स्पीड पोस्ट द्वारा दिनांक 03/09/2008 को सचिव, लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश इलाहाबाद के पते पर भेजा था। उक्त आवेदन प्राप्त करने की अंतिम तिथि 05/09/2008 थी। प्रत्यर्थी को यह पत्र दिनांक 30/09/2008 को वापस प्राप्त हुआ जिस पर काल बाधित/अस्वीकृत की मुहर लगी थी जब कि आवेदन पत्र के पीछे इलाहाबाद डाकघर की दिनांक 05/09/2008 की मुहर लगी हुई थी। परिवादी के कथनानुसार दिनांक 03/09/2008 को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजा गया उसका आवेदन पत्र
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अपीलकर्ता की लापरवाही के कारण निर्धारित समयावधि के अंदर वितरित नहीं किया जा सका। प्रत्यर्थी/परिवादी की आयु शासकीय सेवा में भर्ती होने की निर्धारित आयु सीमा से अधिक हो चुकी है। प्रत्यर्थी/परिवादी के लिए उपरोक्त परीक्षा में सम्मिलित होने का अंतिम अवसर था। अपीलकर्ता की लापरवाही के कारण परिवादी को उसके जीवन का अंतिम अवसर भी खोना पड़ा। आवेदन पत्र समय से न पहुंच पाने के कारण परिवादी उक्त परीक्षा में बैंठने से वंचित रह गया। अत: क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु परिवाद जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
अपीलार्थी सं0 1 की ओर से जिला मंच के समक्ष प्रतिवाद पत्र प्रस्तुत किया गया। अपीलकर्ता के कथनानुसार प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित स्पीड पोस्ट पत्र दिनांक 05/09/2008 को दिये गये पते पर ही प्राप्त करा दिया गया था। मैनेजर स्पीड पोस्ट सेंटर इलाहाबाद ने अपने पत्र दिनांकित 04/12/2008 के द्वारा सूचित किया कि उक्त स्पीड पोस्ट पत्र दिनांक 05/09/2008 दिये गये पते पर वितरित कर दिया गया। परिवादी द्वारा स्पीड पोस्ट सेन्टर इलाहाबाद को पक्षकार नहीं बनाया गया जब कि आवश्यक पक्षकार था। परिवाद आवश्यक पक्षकार न बनाये जाने के कारण दोषपूर्ण है। अपीलकर्ता द्वारा परिवादी को कथित दिनांक 30/09/2008 को कोई स्पीड पोस्ट पत्र वापस नहीं कराया गया। परिवादी द्वारा परिवाद पत्र के साथ जो रजिस्ट्री पत्र दाखिल किया गया जिस पर लगी हुई मुहर काल बाधित/अस्वीकृत का उल्लेख किया गया है ऐसी कोई मुहर लगाने का कोई प्राविधान विभाग में नहीं है। विभाग में काली स्याही का प्रयोग होता है न कि नीली स्याही का। इससे इस तथ्य को बल मिलता है कि परिवादी द्वारा भेजे गये स्पीड पोस्ट पत्र को प्राप्त करने वाले संबंधित विभाग ने अस्वीकृत किया है न कि डाक विभाग ने।
विद्वान जिला मंच ने परिवादी का परिवाद स्वीकार करते हुए अपीलकर्ता को आदेशित किया है कि वह इस आदेश की दिनांक से एक माह के अंदर परिवादी को क्षतिपूर्ति के रूप में 15,000/- रू0 का भुगतान करें। इसके अतिरिक्त परिवादी को मानसिक कष्ट एवं वाद व्यय हेतु मु0 2000/- रू0 का भुगतान इसी एक माह के अंदर किया जाना सुनिश्चित करें।
इस निर्णय/आदेश से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गई है।
हमने अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता डा0 उदय वीर सिंह को सुना। प्रत्यर्थी को पंजीकृत डाक से आयोग द्वारा नोटिस प्रेषित की गई किन्तु प्रत्यर्थी की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
अपील विलंब प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत की गई है। इस विलंब प्रार्थना पत्र के साथ शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया है। इस शपथ पत्र के विरूद्ध प्रत्यर्थी द्वारा को प्रतिशपथ पत्र प्रस्तुत
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नहीं किया गया है। विलंब क्षमा प्रार्थना पत्र में संतोषजनक स्पष्टीकरण पाते हुए विलंब को क्षमा किया जाता है।
अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रश्नगत स्पीड पोस्ट के संदर्भ में स्पीड पोस्ट सेन्टर इलाहाबाद ने अपने पत्र दिनांक 04/12/2008 द्वारा सूचित किया है कि उक्त स्पीड पोस्ड दिनांक 05/08/2009 को ही प्राप्तकर्ता को प्राप्त करा दिया गया था। परिवादी द्वारा जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत किये गये स्पीड पोस्ट के लिफाफे पर भी स्पीड पोस्ट सेन्टर इलाहाबाद दिनांक 05/09/2008 को इस पत्र के पहुंचने का उल्लेख है। अपीलकर्ता की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि पत्र डाक विभाग द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी को वापस नहीं भेजा गया इस पत्र पर काल बाधित/अस्वीकृत की मुहर अपीलकर्ता विभाग द्वारा अंकित नहीं की गई है। संभवत: यह पत्र प्राप्तकर्ता द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी को वापस अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादी का जिला मंच के समक्ष यह कथन नहीं किया गया कि कर्मचारियों द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी के साथ कोई धोखाधड़ी की गई अथवा जानबूझकर प्रत्यर्थी/परिवादी की डाक वितरित नहीं की गई और न ही इस संदर्भ में कोई साक्ष्य जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत की गई। ऐसी परिस्िथतियों में धारा 06 इंडियन पोस्ट आफिस एक्ट के अंतर्गत क्षतिपूर्ति की अदायगी का दायित्व अपीलकर्ता को नहीं माना जा सकता।
इंडियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा 06 के अनुसार ‘’ Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage- The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of, or damage to, any postal article in course of transmission by post except in so far as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided; and no officer of the post office shall incur any liability by reason of any such loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default”
अपीलकर्ता द्वारा जिला मंच के समक्ष प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रस्तुत किया गया परिवाद पत्र की प्रति दाखिल की गई है। परिवाद पत्र एवं प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा इस संदर्भ में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं की गई है कि अपीलकर्ता के कर्मचारियों द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी के साथ कोई धोखाधड़ी की गई अथवा उसका डाक जानबूझकर वितरित नहीं की गयी।
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विद्वान जिला मंच ने इंडियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा 06 का उचित परिशीलन न करते हुए प्रश्नगत निर्णय पारित किया है। हमारे विचार से अपील स्वीकार किये जाने योग्य है तथा प्रश्नगत निर्णय अपास्त किये जाने योग्य है।
आदेश
अपील स्वीकार की जाती है। जिला मंच लखीमपुर खीरी द्वारा परिवाद सं0 261/2008 में पारित निर्णय/आदेश दिनांकित 14/02/2013 अपास्त किया जाता है। परिवाद निरस्त किया जाता है। निर्णय की प्रमाणित प्रतिलिपि पक्षकारों को नियमानुसार प्राप्त कराई जाय।
(उदय शंकर अवस्थी) (महेश चन्द)
पीठा0 सदस्य सदस्य
सुभाष आशु0 कोर्ट नं0 3