राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।
सुरक्षित
अपील सं0-५१७/२००५
(जिला मंच, मुरादाबाद द्वारा परिवाद संख्या-२१०/२००३ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २१-०२-२००५ के विरूद्ध)
सीनियर सुपरिण्टेण्डेण्ट आफ पोस्ट आफिसेज, मुरादाबाद।
.............अपीलार्थी/विपक्षी।
बनाम
अजय कुमार गोयल द्वारा श्री सन्तोष कुमार वार्ष्णेय निवासी मो0 शक्ति नगर, चंदौसी, जिला मुरादाबाद।
............ प्रत्यर्थी/परिवादी।
समक्ष:-
१- मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य।
२- मा0 श्री गोवर्द्धन यादव, सदस्य।
अपीलार्थी की ओर से उपस्थित : डॉ0 उदय वीर सिंह विद्वान अधिवक्ता के सहयोगी
अधिवक्ता श्री कृष्ण पाठक।
प्रत्यर्थी की ओर से उपस्थित : कोई नहीं।
दिनांक :- ३१-०१-२०१८.
मा0 श्री उदय शंकर अवस्थी, पीठासीन सदस्य द्वारा उदघोषित
निर्णय
प्रस्तुत अपील, जिला मंच, मुरादाबाद द्वारा परिवाद संख्या-२१०/२००३ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २१-०२-२००५ के विरूद्ध योजित की गयी है।
संक्षेप में तथ्य इस प्रकार हैं प्रत्यर्थी/परिवादी के कथनानुसार परिवादी ने डाकघर चंदौसी से दिनांक ०७-०२-२००२ को अपने पुत्र को इन्दौर मध्य प्रदेश के लिए १४००/- रू० मनी आर्डर रसीद सं0-७४० द्वारा भेजा क्योंकि परिवादी का पुत्र तनुज गोयल इन्दौर में रह कर शिक्षा ग्रहण कर रहा था लेकिन मनी आर्डर इन्दौर नहीं पहुँचा और न ही परिवादी के पास वापस आया और न ही उक्त मनी आर्डर के सन्दर्भ में कोई सूचना परिवादी को डाकघर द्वारा प्रेषित की गई। दिनांक २७-०३-२००२ को परिवादी ने एक शिकायती प्रार्थना पत्र मनी आर्डर न पहुँचने के विषय में उप डाकपाल चंदौसी जिला मुरादाबाद को प्रेषित किया तथा मनी आर्डर गन्तव्य स्थान तक पहुँचने की सूचना मांगी लेकिन कोई उत्तर परिवादी को नहीं दिया गया। अपीलार्थी द्वारा कोई जबाब न दिए
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जाने पर परिवादी ने पुन: दिनांक १२-०४-२००२ उसके बाद १५-०४-२००२ को, तत्पश्चात् दिनांक २४-११-२००२ एवं दिनांक १०-०१-२००३ को शिकायती पत्र भेजे किन्तु अपीलार्थी द्वारा कोई जबाब नहीं दिया गया औ न कोई कार्यवाही की गई। दिनांक १४-०२-२००३ को परिवादी द्वारा एक विधिक नोटिस अपीलार्थी को भेजी गई किन्तु फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। अत: परिवाद जिला मंच के समक्ष मनी आर्डर द्वारा भेजे गये १४००/- रू० की मय ब्याज अदायगी एवं क्षतिपूर्ति की अदायगी हेतु योजित किया गया।
अपीलार्थी की ओर से प्रतिवाद पत्र जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत किया गया। अपीलार्थी ने प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा दिनांक ०७-०२-२००२ को १४००/- रू० चंदौसी उप डाकघर से मनी आर्डर किया जाना स्वीकार किया किन्तु अपीलार्थी का यह कथन है कि परिवादी की शिकायत के उत्तर में प्रत्यर्थी/परिवादी को विभाग द्वारा पत्र दिनांकित ११-०४-२००२ भेजा गया। परिवादी की शिकायत पर कार्यवाही की गई। विभागीय जांच कार्यवाही पूर्ण होने के उपरान्त डुप्लीकेट मनी आर्डर जारी करके परिवादी को मनी आर्डर की धनराशि वापस भुगतान हेतु उप डाकघर चंदौसी के माध्यम से भेजी गयी तथा इसकी सूचना रजिस्टर्ड डाक से परिवादी को भी भेजी गई किन्तु परिवादी ने रजिस्टर्ड पत्र तथा डुप्लीकेट मनी आर्डर का भुगतान लेने से इन्कार कर दिया। अपीलार्थी का यह भी कथन हे कि परिवाद इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-४८(सी) से बाधित है।
विद्वान जिला मंच ने अपीलार्थी द्वारा सेवा में त्रुटि किया जाना मानते हुए परिवादी का परिवाद इस प्रकार स्वीकार किया कि परिवादी, परिवाद के विपक्षीगण से १४००/- रू० मूल धनराशि तथा १०००/- रू० वाद व्यय के रूप में पाने का अधिकारी है। यह भी आदेशित किया गया कि विपक्षीगण एक माह के अन्दर सम्पूर्ण २४००/- रू० की धनराशि परिवादी को अदा करें।
इस निर्णय से क्षुब्ध होकर यह अपील योजित की गयी है।
हमने अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता डॉ0 उदय वीर सिंह के सहयोगी अधिवक्ता श्री कृष्ण पाठक के तर्क सुने तथा अभिलेखों का अवलोकन किया। प्रत्यर्थी को
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पंजीकृत डाक से नोटिस भेजी गई। आदेश दिनांक २२-१०-२०१७ द्वारा प्रत्यर्थी पर नोटिस तामील पर्याप्त मानी गई। प्रत्यर्थी की ओर से तर्क प्रस्तुत करने हेतु कोई उपस्थित नहीं हुआ।
अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्ता द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि विद्वान जिला मंच ने अपीलार्थी के प्रतिवाद पत्र के अभिकथनों पर ध्यान न देते हुए प्रश्नगत निर्णय पारित किया है। अपीलार्थी की ओर से यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा मनी आर्डर के माध्यम से भेजी गई १४००/- रू० की धनराशि गन्तव्य स्थान पर न पहुँचने पर एवं इस सन्दर्भ में परिवादी द्वारा सूचित किए जाने पर प्रत्यर्थी/परिवादी को १४००/- रू० मनी आर्डर द्वारा वापस भेजे गये किन्तु प्रत्यर्थी/परिवादी ने यह धनराशि प्राप्त करने से इन्कार कर दिया। अपीलार्थी का यह कथन है कि अपीलार्थी द्वारा सेवा में कोई त्रुटि नहीं की गई। अपीलार्थी की ओर से यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि परिवाद इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-४८(सी) से बाधित है। अपीलार्थी की ओर से इस सन्दर्भ में इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-४८(सी) अपने लिखित तर्क में उद्धरित किया गया है जिसे इस प्रकार वर्णित किया है :-
48- Exemption from liability in respect of money orders. – No suit or other legal proceeding shall be instituted against [the Government] or any officer or the Post Office in respect of-
(a) X X X
(b) X X X
(c) the payment of any money order being refused or delayed by, or on account of , any accidental neglect, omission or mistake, by, or on the part of, an officer of the Post Office, or for any other cause whatsoever, other than the fraud or wilful act or default of such officer; or
प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा जिला मंच के समक्ष प्रस्तुत परिवाद की प्रति अपीलार्थी ने अपील मेमो के साथ दाखिल की है जिसके अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने इन्दौर में शिक्षा ग्रहण कर रहे अपने पुत्र तनुज गोयल को मनी आर्डर द्वारा १४००/- रू० दिनांक ०७-०२-२००२ को भेजे किन्तु यह मनी आर्डर उसके पुत्र को
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प्राप्त नहीं हुआ और न ही उसे वापस प्राप्त हुआ। अत: प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपने उक्त भेजे गये मनी आर्डर के विषय में शिकायती प्रार्थना पत्र उप डाकपाल चंदौसी को दिनांक २७-०३-२००२ को प्रेषित किया किन्तु कोई सूचना न प्राप्त होने तथा इस सन्दर्भ में कोई कार्यवाही न किए जाने पर प्रत्यर्थी/परिवादी ने पुन: दिनांक १२-०४-२००२, १५-०४-२००२, २४-११-२००२ एवं दिनांक १०-०१-२००३ को शिकायती पत्र भेजे किन्तु परिवादी द्वारा भेजे गये उपरोक्त पत्रों के बाबजूद मनी आर्डर के विषय में कोई जानकारी परिवादी को उपलब्ध नहीं कराई गई। अन्तत: दिनांक १४-०२-२००३ को एक विधिक नोटिस परिवादी द्वारा भेजी गई किन्तु फिर भी कोई कार्यवाही अपीलार्थी द्वारा न किए जाने पर परिवाद जिला मंच के समक्ष प्रेषित किया गया। उक्त पत्रों के भेजे जाने के सन्दर्भ में जिला मंच के समक्ष साक्ष्य प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा प्रेषित की गई।
अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत किए गये प्रतिवाद पत्र में यह अभिकथित किया गया है कि परिवादी की शिकायत के उत्तर में दिनांक ११-०४-२००२ को अपीलार्थी द्वारा पत्र प्रेषित किया गया। प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी ने अपीलार्थी द्वारा कथित रूप से भेजे गये पत्र दिनांक ११-०४-२००२ को प्राप्त करने से इन्कार किया है। ऐसा कोई पत्र परिवादी द्वारा प्राप्त किए जाने के सनदर्भ में कोई साक्ष्य जिला मंच के समक्ष अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत नहीं की गई और न ही ऐसी कोई साक्ष्य अपीलीय स्तर पर अपीलार्थी की ओर से प्रस्तुत की गई।
अपीलार्थी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा की गई शिकायत की जांच के उपरान्त मनी आर्डर की धनराशि प्रत्यर्थी/परिवादी को मनी आर्डर द्वारा भेजी गई तथा इसकी सूचना पंजीकृत पत्र द्वारा परिवादी को भेजी गई किन्तु परिवादी ने यह धनराशि यह कह कर लेने से इन्कार कर दिया कि उसके द्वारा परिवाद योजित किया जा चुका है। ऐसी परिस्िथति में अपीलार्थी द्वारा सेवा में कोई त्रुटि न किया जाना अपीलार्थी की ओर से कहा गया। अपीलार्थी की ओर से यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया कि परिवाद इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-४८(सी) से बाधित है। प्रश्नगत निर्णय के अवलोकन से यह विदित होता है कि प्रत्यर्थी/परिवादी को मनी
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आर्डर की धनराशि १४००/- रू०, परिवाद योजित किए जाने के उपरान्त, प्रश्नगत मनी आर्डर परिवादी द्वारा भेजे जाने की तिथि से लगभग ०२ वर्ष बाद भेजी गई जबकि इस मध्य कई पत्र परिवाद योजित किए जाने से पूर्व परिवादी द्वारा अपीलार्थी को भेजे गये। विधिक नोटिस भी भेजी गई किन्तु अपीलार्थी द्वारा इस सन्दर्भ में कोई कार्यवाही नहीं की गई। अपीलार्थी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का यह आचरण उपभोक्ता के प्रति संवेदनहीनता को ही दर्शाता है। प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा मनी आर्डर दिनांक ०७-०२-२००२ को भेजा गया। इस सन्दर्भ में प्रत्यर्थी/परिवादी ने सर्वप्रथम शिकायत अपीलार्थी से दिनांक २७-०३-२००२ को की। अपीलार्थी के सम्बन्धित अधिकारी एवं कर्मचारियों से यह अपेक्षित था कि वस्तु स्थिति की जांच करके इस सन्दर्भ में प्रत्यर्थी/परिवादी को यथाशीघ्र सूचित किया जाता। मनी आर्डर गन्तव्य स्थान पर न पहुँच पाने के कारण उपभोक्ता को खेद प्रकट करते हुए मनी आर्डर की धनराशि उसे वापस की जाती तथा सम्बन्धित कर्मचारी के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाती। ऐसी कार्यवाही किए जाने की ऐसी स्थिति में अपीलार्थी को इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की धारा-४८(सी) के अन्तर्गत प्रदत्त सुरक्षा प्रदान की जा सकती थी किन्तु जहॉं तक प्रस्तुत प्रकरण का प्रश्न है प्रत्यर्थी/परिवादी द्वारा अपने मनी आर्डर की वस्तु स्थिति की जानकारी के लिए निरन्तर पत्राचार करने के बाबजूद तथा विधिक नोटिस भेजे जाने के उपरान्त भी उसे मनी आर्डर की वस्तु स्थिति से अवगत नहीं कराया गया।
अपीलार्थी के अधिकारी/कर्मचारियों के उपरोक्त संवेदनहीन आचरण को धारा-४८(सी) इण्डियन पोस्ट आफिस एक्ट की सुरक्षा प्रदान नहीं की जा सकती। विद्वान जिला मंच ने अपीलार्थी के इस आचरण को जानबूझकर डिफाल्ट किया जाना माना है। हमारे विचार से मामले की परिस्थितियों के आलोक में विद्वान जिला मंच का यह निष्कर्ष त्रुटिपूर्ण नहीं है।
पोस्ट आफिस बनाम अखिलेश ग्रोवर, IV (2017) CPJ 317 (NC) के मामले में स्पीड पोस्ट की समय से डिलीवरी न किये जाने तथा परिवादी द्वारा परिवाद योजित किए जाने के बाबजूद डाक विभाग द्वारा तुरन्त जांच न किया जाना तथा दोषी व्यक्तियों का दायित्व निर्धारित न किए जाने की स्थिति में मा0 राष्ट्रीय आयोग ने डाक
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विभाग को क्षतिपूर्ति की अदायगी का उत्तरदायी माना।
प्रश्नगत निर्णय द्वारा विद्वान जिला मंच ने १,०००/- रू० वाद व्यय दिए जाने हेतु भी निर्देशित किया है। उल्लेखनीय है कि प्रत्यर्थी/परिवादी का पुत्र इन्दौर में शिक्षा ग्रहण कर रहा था। उसके पिता परिवादी द्वारा अपने पुत्र के उपयोग हेतु १४००/- रू० की धनराशि भेजी गई। यह धनराशि डाक विभाग द्वारा प्रत्यर्थी/परिवादी के पुत्र को प्राप्त नहीं कराई गई। साथ ही परिवादी द्वारा निरन्तर पत्राचार करने, विधिक नोटिस भेजे जाने के बाबजूद कोई उत्तर प्राप्त न होने पर अन्तत: उसे परिवाद योजित करने के लिए बाध्य होना पड़ा। निश्चित रूप से अपीलार्थी के अधिकारी एवं कर्मचारियों के इस आचरण के कारण प्रत्यर्थी/परिवादी को आर्थिक, शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताडि़त होना पड़ा। विद्वान जिला मंच ने १४००/- रू० की उक्त धनराशि पर कोई ब्याज अदा करने हेतु निर्देशित नहीं किया है। ऐसी परिस्थिति में वाद व्यय के रूप में दिलायी गई १,०००/- रू० की धनराशि अनुचित नहीं मानी जा सकती। अपील में बल नहीं है। अपील तद्नुसार निरस्त किए जाने योग्य है।
आदेश
प्रस्तुत अपील निरस्त की जाती है। जिला मंच, मुरादाबाद द्वारा परिवाद संख्या-२१०/२००३ में पारित प्रश्नगत निर्णय एवं आदेश दिनांक २१-०२-२००५ की पुष्टि की जाती है।
इस अपील का व्यय-भार उभय पक्ष अपना-अपना स्वयं वहन करेंगे।
उभय पक्ष को इस निर्णय की प्रमाणित प्रति नियमानुसार उपलब्ध करायी जाय।
(उदय शंकर अवस्थी)
पीठासीन सदस्य
(गोवर्द्धन यादव)
सदस्य
प्रमोद कुमार,
वैय0सहा0ग्रेड-१,
कोर्ट नं.-३.