Uttar Pradesh

StateCommission

A/490/2018

Yashmin - Complainant(s)

Versus

Adhi. Abh. Vidyut Vitaran Khand - Opp.Party(s)

A.C. Trivedi & S.P. Pandey

03 May 2019

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/490/2018
( Date of Filing : 15 Mar 2018 )
(Arisen out of Order Dated 20/02/2018 in Case No. C/130/2017 of District Sitapur)
 
1. Yashmin
Sitapur
...........Appellant(s)
Versus
1. Adhi. Abh. Vidyut Vitaran Khand
Sitapur
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN PRESIDENT
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 03 May 2019
Final Order / Judgement

सुरक्षि‍त

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

 

                                                                                           अपील संख्‍या- 490/2018

 

(जिला उपभोक्‍ता फोरम, सीतापुर द्वारा परिवाद संख्‍या- 130/2017 में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 20-02-2018 के विरूद्ध)

 

यासमीन पुत्री श्री डेनियल स्‍ट्रीट उर्फ चुन्‍ना मिस्‍त्री निवासी- मकान नम्‍बर    314 क, निकट कोतवाली सदर, मो0 सिविल लाइन्‍स, शहर/पोस्‍ट तहसील व जिला सीतापुर।

                                                                                                                                                             अपीलार्थी/परिवादिनी

                                                                    बनाम 

1- अधिशाषी अभियन्‍ता, विद्युत वितरण खण्‍ड (प्रथम) निकट आंख का अस्‍पताल, सीतापुर, सरोजनी वाटिका के सामने, शहर/पोस्‍ट तहसील व जिला सीतापुर।

2- उ०प्र० पावर कारपोरेशन लि० शक्ति भवन लखनऊ, पोस्‍ट/शहर/ तहसील व जिला लखनऊ द्वारा अधिशाषी अभियन्‍ता, विद्युत वितरण खण्‍ड (प्रथम) निकट आंख का अस्‍पताल, सीतापुर शहर/पोस्‍ट/ तहसील व जिला सीतापुर।

                                                                                                                                                             प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण

मक्ष:-

 माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष

 

अपीलार्थी की ओर से उपस्थित :  विद्वान अधिवक्‍ता श्री एस०पी० पाण्‍डेय

प्रत्‍यर्थी की ओर से उपस्थित :   विद्वान अधिवक्‍ता श्री इशार हुसैन

 

दिनांक: 14-06-2019          

 

माननीय न्‍यायमूर्ति श्री अख्‍तर हुसैन खान, अध्‍यक्ष द्वारा उदघोषित

                                                                                                          निर्णय

 

परिवाद संख्‍या– 130 सन् 2017  यासमीन बनाम अधिशाषी अभियन्‍ता, विद्युत वितरण खण्‍ड (प्रथम) व एक अन्‍य में जिला उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष फोरम, सीतापुर द्वारा पारित निर्णय और आदेश दिनांक 20-02-2018 के विरूद्ध यह अपील धारा-15 उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत राज्‍य आयोग के समक्ष प्रस्‍तुत की गयी है।

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आक्षे‍पि‍त निर्णय और आदेश के द्वारा जिला फोरम ने परिवाद सक्षम न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किये जाने हेतु परिवादिनी को वापस कर दिया है जिससे क्षुब्‍ध होकर परिवाद की परिवादिनी यासमीन ने यह अपील प्रस्‍तुत की है।

अपील की सुनवाई के समय अपीलार्थी/परिवादिनी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री एस0पी0 पाण्‍डेय और प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण  की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री इशार हुसैन उपस्थित आए हैं।

मैंने उभय पक्ष के विद्वान अधिवक्‍तागण के तर्क को सुना है और आक्षेपित निर्णय और आदेश तथा पत्रावली का अवलोकन किया है।

     अपील के निर्णय हेतु संक्षिप्‍त सुसंगत तथ्‍य इस प्रकार हैं कि अपीलार्थी/परिवादिनी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के विरूद्ध इस कथन के साथ प्रस्‍तुत किया है कि उसके पिता श्री डेनियल स्‍ट्रीट पुत्र श्री ई.सी. स्‍ट्रीट के नाम विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या- 8897941000 है जिसका विद्युत भार एक किलो वाट है। अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता दिनांक 23-04-2011 से लापता हैं और उनका कोई पता नहीं चला है। अत: अपीलार्थी/परिवादिनी लगातार आर्थिक विपन्‍नता व मानसिक अवसाद से पीडि़त है। परिवाद पत्र के अनुसार माह मई 2011 में विगत माह का बिजली का बिल अचानक कई गुना अधिक राशि का आने पर अपीलार्थी/परिवादिनी ने विद्युत विभाग में जाकर अपने बढ़े हुए बिल के बारे में जानकारी चाहा तो उसे ज्ञात हुआ कि उसके पिता के नाम विद्युत कनेक्‍शन संख्‍या 8897941000 का भार दो किलो वाट कर दिया गया है जिसके कारण बिजली का बिल अधिक राशि का आ गया है। अपीलार्थी/परिवादिनी के प्रतिरोध किये जाने पर उसका बिल प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण ने यह कहकर ले लिया कि बिल सुधार कर पुन: जारी कर

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दिया जाएगा। अपीलार्थी/परिवादिनी अपने बढ़े हुए विद्युत भार दो किलो वाट को अपने आवास का परीक्षण कराकर एक किलो वाट का विद्युत भार करने हेतु प्रार्थना पत्र उप-खण्‍ड अधिकरी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर के समक्ष प्रस्‍तुत करें। तब परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादिनी ने अपने पिता की गुमशुदगी की स्थि‍ति में विद्युत भार कम करने हेतु उप-खण्‍ड अधिकरी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर के समक्ष प्रार्थना पत्र दिनांक 23-05-2011 को प्रस्‍तुत किया जिस पर तत्‍काल ही अपीलार्थी/परिवादिनी के आवासीय  परीक्षण व विद्युत भार का परीक्षण करने का आदेश उप-खण्‍ड अधिकरी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर द्वारा जारी किया गया परन्‍तु उप-खण्‍ड अधिकरी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर के आदेश दिनांक 23-05-2011 के उपरान्‍त भी न तो कभी अपीलार्थी/परिवादिनी के आवास का परीक्षण किया गया और न ही विद्युत के उपभोग का परीक्षण किया गया। अपीलार्थी/परिवादिनी द्वारा लगातार सम्‍पर्क और प्रयास करने पर विद्युत विभाग के कर्मचारियों द्वारा यह आश्‍वासन दिया जाता रहा कि जब तक अपीलार्थी/परिवादिनी के आवास का परीक्षण कर विद्युत के उपभोग के आधार पर विद्युत भार का निर्धारण नहीं कर दिया जाएगा तब तक उसके पास न तो किसी प्रकार का विद्युत बिल आएगा और न ही विद्युत उपभोग को बाधित किया जाएगा।

     परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादिनी का कथन है कि दिनांक 02-07-2017 को अचानक उसके पिता के नाम का विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित कर दिया गया। तब अपीलार्थी/परिवादिनी ने  विद्युत  विभाग  से सम्‍पर्क करके उक्‍त  विद्युत  कनेक्‍शन  के  सम्‍बन्‍ध  में  आवासीय  परीक्षण  के

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आधार पर विद्युत उपभोग के भार के निर्धारण के सम्‍बन्‍ध में बात करने का प्रयास किया तो उसे बताया गया कि अपीलार्थी/परिवादिनी का बिल बहुत बकाया हो गया है वह तत्‍काल 5000/-रू० जमा कर पुर्नसंयोजन की फीस 5550/-रू० जमा करके विद्युत कनेक्‍शन प्राप्‍त कर ले। शेष भुगतान अपीलार्थी/परिवादिनी  के आवास का यथाशीघ्र परीक्षण कर विद्युत उपभोग का परीक्षण करने के उपरान्‍त भार एक किलो वाट किये जाने पर अपीलार्थी/परिवादिनी से किस्‍तों में लिया जाएगा। अत: अपीलार्थी/परिवादिनी ने 5550/-रू० जमा किया फिर भी उसका विद्युत कनेक्‍शन नहीं जोड़ा गया और न ही विद्युत भार का निर्धारण एक किलो वाट किया गया।

     परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादिनी का कथन है कि दिनांक 10-08-2017 को सांय अचानक दो अज्ञात व्‍यक्ति उसके घर पहॅुचे और स्‍वयं को विद्युत कर्मी बताते हुए उस पर दबाव बनाते हुए धमकाने लगे कि अपीलार्थी/परिवादिनी पर बहुत विद्युत देय बकाया है इसलिए या तो वह तत्‍काल 10,000/-रू० दे दे या अथवा उसका विद्युत कनेक्‍शन काट दिया जाएगा। उसके बाद और ज्‍यादा रूपये विद्युत संयोजन में चले जाएंगे। इस पर अपीलार्थी/परिवादिनी ने प्रतिरोध किया तो उसे निकट कोतवाली पर चलने की बात कर इस धमकी के साथ वे लोग भाग गये कि इस बार विद्युत कनेक्‍शन कटेगा तो पुन: जोड़वा लेना तो बताना। परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादिनी का कथन है कि इस घटना के बाद वह भयभीत है और घटना की शिकायत उसने दिनांक 07-09-2017 को अधिशाषी अभियन्‍ता विद्युत वितरण खण्‍ड प्रथम सीतापुर से किया परन्‍तु कोई कार्यवाही नहीं हुयी।

    

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परिवाद पत्र के अनुसार अपीलार्थी/परिवादिनी द्वारा निरन्‍तर अपने आवास का परीक्षण कर विद्युत भार का निर्धारण किये जाने का अथक प्रयास किया गया परन्‍तु न तो विद्युत विभाग सीतापुर द्वारा उसके आवास का परीक्षण किया गया और न ही मीटर रीडर आया और न ही बिजली का बिल अपीलार्थी/परिवादिनी को अद्यतन प्राप्‍त हुआ है। अत: विवश होकर अपीलार्थी/परिवादिनी ने परिवाद जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया है।

     प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण उ०प्र० पावर कारपोरेशन की ओर से लिखित कथन जिला के समक्ष प्रस्‍तुत किया है और कहा है कि अपीलार्थी/परिवादिनी ने गलत कथन के साथ परिवाद प्रस्‍तुत किया है। प्रश्‍नगत कनेक्‍शन अपीलार्थी/परिवादिनी के नाम से नहीं है उसके पिता के नाम से है जिनके स्‍वर्गवास के सम्‍बन्‍ध में कोई मृत्‍यु प्रमाण पत्र प्रस्‍तुत नहीं किया गया है और भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम की धारा- 108 के अन्‍तर्गत उनकी मृत्‍यु के सम्‍बन्‍ध में कोई न्‍यायालय का उद्घोषणा आदेश नहीं है। ऐसी स्थिति में अपीलार्थी/परिवादिनी उपभोक्‍ता विधि के अनुसार नहीं है। अत: अपीलार्थी/परिवादिनी द्वारा प्रस्‍तुत परिवाद निरस्‍त किये जाने जाने योग्‍य है।

     लिखित कथन में प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि अपीलार्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन वाणिज्यिक/का‍मर्शिलय कनेक्‍शन  2 एम.वी.2 का है इस कारण परिवाद जिला उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत ग्राह्य नहीं है।

     लिखित कथन में प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण की ओर से कहा गया है कि  विद्युत उपभोग के अनुसार प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के सक्षम अधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण करने के उपरान्‍त ही विद्युत भार 1.50 किलो वाट स्‍वीकृत करते हुए

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विगत कई वर्षों से बिल भेजे जा रहे हैं। विद्युत का उपभोग डेनियल स्‍ट्रीट के आस-पास स्थित दुकान के लिए भी किया जा रहा है। लिखित कथन में प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण की ओर से यह भी कहा गया है कि बिल सत्‍य और सही भेजे जा रहे हैं। अपीलार्थी/परिवादिनी ने जानबूझकर बिलों का भुगतान नहीं किया है। दिनांक 31-05-2016 तक 52,543/-रू० बकाया है जिसे अदा करने का दायित्‍व अपीलार्थी/परिवादिनी का है। अपीलार्थी/परिवादिनी उक्‍त धनराशि जमा नहीं करना चाहती है और धनराशि जमा करने के बचने के लिए उसने बिना किसी अधिकार के परिवाद प्रस्‍तुत किया है।

     जिला फोरम ने उभय पक्ष के अभिकथन एवं उपलब्‍ध साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त यह माना है कि अपीलार्थी/परिवादिनी का प्रश्‍नगत कनेक्‍शन व्‍यावसायिक कनेक्‍शन है। विद्युत बिल बकाया है कनेक्‍शन एल०एम०वी० 2 का है। परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत ग्राह्य नहीं है और इसी आधार पर जिला फोरम ने परिवाद निरस्‍त किया है।

     अपीलार्थी/परिवादिनी के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि जिला फोरम का निर्णय दोषपूर्ण है। अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता के नाम का प्रश्‍नगत कनेक्‍शन कदापि व्‍यवसायिक उद्देश्‍य से नहीं लिया गया है और अपीलार्थी/परिवादिनी  के आवास में कोई व्‍यवसायिक गतिविधि होना नहीं बताया गया है। अत: जिला फोरम ने अपीलार्थी/परिवादिनी को उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत उपभोक्‍ता न मानते हुए जो परिवाद निरस्‍त किया है वह उचित नहीं है।

    

 

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प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के विद्वान अधिवक्‍ता का तर्क है कि अपीलार्थी/परिवादिनी का विद्युत कनेक्‍शन दो किलोवाट का है जो वाणिज्यिक कनेक्‍शन की श्रेणी में आता है। अत: परिवाद उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के

अन्‍तर्गत ग्राह्य नहीं है। जिला फोरम का निर्णय और आदेश साक्ष्‍य और विधि के अनुकूल है।

     मैंने उभय पक्ष के तर्क पर विचार किया है।

     परिवाद पत्र के कथन से स्‍पष्‍ट है कि अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता के नाम का प्रश्‍नगत कनेक्‍शन एक किलोवाट का था और मई 2011 में जब बिल अधिक आया तो अपीलार्थी/परिवादिनी ने प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के कार्यालय में पता किया तो उसे बताया गया कि‍ उसके विद्युत कनेक्‍शन का भार दो किलोवाट कर दिया गया है। तब उसने दिनांक 23-05-2011 को प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के उप-खण्‍ड अधिकारी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर के समक्ष आवेदन प्रत्र प्रस्‍तुत कर अपने आवासीय विद्युत उपभोग का परीक्षण करके इस कनेक्‍शन का भार संशोधित कर एक किलोवाट करने हेतु आवेदन पत्र दिया परन्‍तु प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के अधीनस्‍थ कर्मचारियों द्वारा उसके आवासीय विद्युत उपभोग का परीक्षण कर उसके प्रार्थना पत्र का निस्‍तारण नहीं किया गया। परिवाद पत्र के अनुसार इस बीच अपीलार्थी/परिवादिनी को प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण द्वारा कोई बिल नहीं भेजे गये और एकाएक दिनांक     02-07-2017 को  उसका विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित कर दिया गया। अपीलार्थी/परिवादिनी की ओर से अपील की पत्रावली में विद्युत मीटर रीडिंग सर्टिफिकेट दिनांक 11-03-2010 प्रस्‍तुत किया गया है जिसके द्वारा कथित रूप से अपीलार्थी/परिवादिनी  के यहॉं मीटर विद्युत विभाग द्वारा लगाया गया है। इसमें विद्युत भार एक किलोवाट अं‍कित है। प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण द्वारा

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अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता के नाम के प्रश्‍नगत कनेक्‍शन का भार  उनको सूचित कर या उन्‍हें नोटिस देकर बढ़ाए जाने का कथन नहीं किया गया है और न ही यह दर्शित्‍ किया गया है कि दो किलो वाट विद्युत भार  अपीलार्थी/परिवादिनी या उसके पिता के अनुरोध पर किया गया है। इसके विपरीत अपीलार्थी/परिवादिनी के कथन से स्‍पष्‍ट है कि उसने दिनांक        23-05-2011 को अपने आवासीय विद्युत उपभोग का परीक्षण कर विद्युत भार कम कर एक किलो वाट करने का आवेदन संबंधित उप-खण्‍ड अधिकरी, विद्युत वितरण खण्‍ड द्धितीय सीतापुर को दिया है जिसका निस्‍तारण प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण के कर्मचारियों द्वारा किया जाना नहीं बताया गया है। अत: सम्‍पूर्ण तथ्‍यों और साक्ष्‍यों पर विचार करने के उपरान्‍त यह स्‍पष्‍ट होता है कि अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता ने प्रश्‍नगत कनेक्‍शन एक किलोवाट का अपने आवासीय उपभोग हेतु लिया है जो आवासीय उपभोग के लिए है और परिवाद पत्र के अनुसार प्रत्‍यर्थी/विपक्षीगण द्वारा उसके कनेक्‍शन का भार दो किलोवाट गलत तौर पर किया गया है। ऐसी स्थिति में जिला फोरम ने अपीलार्थी/परिवादिनी  को जो धारा- 2 (1) (डी) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत  उपभोक्‍ता इस आधार पर नहीं माना है कि दो किलो वाट का कनेक्‍शन वाणिज्यिक कनेक्‍शन की श्रेणी में आता है वह उचित नहीं है। अपीलार्थी/परिवादिनी के पिता के नाम के कनेक्‍शन का भार अपीलार्थी/परिवादिनी या उसके पिता के अनुरोध पर या उन्‍हें सूचना देकर विधिवत दो किलोवाट किया गया है यह साक्ष्‍य का विषय है। अत: उभय पक्ष के साक्ष्‍य के बाद ही इस बिन्‍दु पर कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

    

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उपरोक्‍त सम्‍पूर्ण विवेचना एवं ऊपर निकाले गये निष्‍कर्ष के आधार पर मैं इस मत का हॅूं कि‍ जिला फोरम ने जो अपीलार्थी/परिवादिनी का परिवाद धारा- 2 (1) (डी) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत उसे उपभोक्‍ता न मानते हुए उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत ग्राह्य नहीं माना है वह उचित और विधि के अनुकूल नहीं है।

उपरोक्‍त निष्‍कर्ष के आधार पर अपील स्‍वीकार की जाती है और जिला फोरम द्वारा पारित निर्णय और आदेश अपास्‍त करते हुए पत्रावली जिला फोरम को इस निर्देश के साथ प्रत्‍यावर्तित की जाती है कि जिला फोरम उभय पक्ष को साक्ष्‍य और सुनवाई का अवसर प्रदान कर विधि के अनुसार निर्णय और आदेश गुण-दोष के आधार पर पारित करें।

     उभय पक्ष जिला फोरम के समक्ष दिनांक 25-07-2019 को उपस्थित हों।

     जिला फोरम परिवाद का निस्‍तारण यथाशीघ्र हाजिरी की तिथि से दो माह के अन्‍दर करने का प्रयास करें।

     यदि धारा- 13 (3) उपभोक्‍ता संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत अन्‍तरिम आदेश हेतु प्रार्थना पत्र जिला फोरम के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाता है तो जिला फोरम विधि के अनुसार आदेश पारित करने हेतु स्‍वतंत्र होगा।

     उभय पक्ष अपील में अपना-अपना वाद व्‍यय स्‍वयं वहन करेंगे।

 

                                                    (न्‍यायमूर्ति अख्‍तर हुसैन खान)

                                                                  अध्‍यक्ष              

कृष्‍णा, आशु0

कोर्ट नं01

 

 
 
[HON'BLE MR. JUSTICE AKHTAR HUSAIN KHAN]
PRESIDENT

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