Uttar Pradesh

StateCommission

A/2002/2461

Post Office - Complainant(s)

Versus

A K Pandey - Opp.Party(s)

Dr U V Singh

17 May 2016

ORDER

STATE CONSUMER DISPUTES REDRESSAL COMMISSION, UP
C-1 Vikrant Khand 1 (Near Shaheed Path), Gomti Nagar Lucknow-226010
 
First Appeal No. A/2002/2461
(Arisen out of Order Dated in Case No. of District State Commission)
 
1. Post Office
a
...........Appellant(s)
Versus
1. A K Pandey
A
...........Respondent(s)
 
BEFORE: 
 HON'BLE MR. Alok Kumar Bose PRESIDING MEMBER
 HON'BLE MR. Sanjay Kumar MEMBER
 
For the Appellant:
For the Respondent:
Dated : 17 May 2016
Final Order / Judgement

राज्‍य उपभोक्‍ता विवाद प्रतितोष आयोग, उ0प्र0, लखनऊ।

(सुरक्षित)                                                                                  

अपील संख्‍या :2461/2002

(जिला मंच, प्रतापगढ़ द्धारा परिवाद सं0-106/1997 में पारित निर्णय/ आदेश दिनांक 05.9.2002 के विरूद्ध)

1        Union of India & Others through Secretary Postal Deptt. New Delhi.

2       Director General (Posts) Dak Bhawan New Delhi.

3       Post Master General Allahabad Region.

4       Sr. Suprintendent of Post Offices, Pratapgarh.

5       Branch Post Master Dahee (Amar Garh) Distt. Pratapgarh.

                                                       ........... Appellants/Opp. Parties

Versus    

1        Atul Kumar Pandey minor S/o Sri Ram Chandra Pandey, R/o Village and Post Office Dahee(Amargarh) Tehsil Patti, District Pratapgarh.

2       Ram Chandra Pandey, S/o Sri Ram Shiraomani Pandey, R/o Village and Post Dahee (Amargarh) District Pratapgarh.

……..…. Respondents/Complainants.

3       Smt. Sushma Devi Pandey W/o Umesh Chand Pandey, Branch Post Master, Dahee(Amargarh) District Pratapgarh.

                                        ……..…. Respondents/Opp. Party

समक्ष :-

मा0 श्री जितेन्‍द्र नाथ सिन्‍हा, पीठासीन सदस्‍य

मा0 श्री संजय कुमार, सदस्‍य

अपीलार्थी के अधिवक्‍ता :    डॉ0 उदय वीर सिंह

प्रत्‍यर्थी के अधिवक्‍ता  :    श्री शरद नंदन ओझा एवं

श्री मयंक सिन्‍हा

दिनांक :25-01-2017

मा0 श्री जे0एन0 सिन्‍हा, पीठासीन सदस्‍य द्वारा उदघोषित

निर्णय    

परिवाद सं0-106/1997 1- अतुल कुमार पाण्‍डेय व 2- राम चन्‍द्र पाण्‍डेय बनाम 1- महा निदेशक डाक, डाक भवन नई दिल्‍ली, 2- यूनियन आफ इण्डिया द्वारा सिक्रेटरी पोस्‍ट आफिस विभाग सेन्‍ट्रल सिक्रेटिएट, नई दिल्‍ली, 3- प्रधान डाक पाल महोदय उ0प्र0 कार्यालय पोस्‍ट मास्‍टर जनरल सिविल लाइन्‍स, इलाहाबाद 4- प्रवर अधीक्षक

-2-

डाक घर प्रधान डाक कार्यालय प्रतापगढ़, 5- शाखा पोस्‍ट मास्‍टर डाही द्वारा सब पोस्‍ट आफिस अमरगढ ग्राम व पोस्‍ट डाही परगना व तहसील पट्टी जिला प्रतापगढ़, 6- श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय पत्‍नी श्री उमेशचन्‍द्र पाण्‍डेय शाखा पोस्‍ट मास्‍टर, निवासी ग्राम व पोस्‍ट डाही परगना व तहसील पट्टी, जिला प्रतापगढ़ में जिला मंच, प्रतापगढ़ द्वारा दिनांक 05.9.2002 को निर्णय पारित करते हुए निम्‍नलिखित आदेश पारित किया गया कि,

"परिवाद आंशिक रूप से स्‍वीकार किया जाता है। विपक्षी सं0-4 एवं 6 क्रमश: श्री आर0एस0 यादव एवं श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय को निर्देशित किया जाता है कि वे परिवादीगण को क्षतिपूर्ति एवं लिखा पढ़ी में हुए व्‍यय रू0 250.00 (दो सौ पचास) एवं वाद व्‍यय के रूप में रू0 500.00 (पॉच सौ) आदेश तिथि से 30 दिनों के अन्‍दर भुगतान करें।"

उक्‍त वर्णित आदेश से क्षुब्‍ध होकर विपक्षी सं0-1 ता 5 /अपीलार्थी पक्ष की ओर से वर्तमान अपील योजित की गई है, जिसमें  प्रत्‍यर्थी सं0-3 श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय को भी प्रत्‍यर्थी के रूप में पक्षकार बनाया गया है।

वर्तमान प्रकरण में इस आशय का भी उल्‍लेख करना भी उचित प्रतीत होता है कि प्रश्‍नगत आदेश से क्षुब्‍ध होकर विपक्षी सं0-3 श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय द्वारा अलग से अपील सं0-2301/2002 योजित की गई थी, जो अपीलार्थी की अनुपस्थिति के कारण दिनांक 02.8.2011 को निरस्‍त की जा चुकी है।

अपीलार्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता डॉ0 उदय वीर सिंह तथा प्रत्‍यर्थी की ओर से विद्वान अधिवक्‍ता श्री शरद नन्‍दन ओझा एवं श्री मयंक सिन्‍हा को विस्‍तार पूर्वक सुना गया तथा प्रश्‍नगत निर्णय व उपलब्‍ध अभिलेखों का गम्‍भीरता से परिशीलन किया गया।

परिवाद पत्र का अभिवचन संक्षेप में इस प्रकार है किराम शिरोमणि पाण्‍डेय ने दिनांक 23.7.1996 को पार्लियामेण्‍ड स्‍ट्रीट नई

-3-

दिल्‍ली पोस्‍ट आफिस से रू0 1,000.00 का प्रश्‍नगत मनी आर्डर अपने पौत्र अतुल कुमार परिवादी के नाम भेजा जिस पर रू0 50.00 शुल्‍क लगा। परिवादी के अभिकथन के अनुसार मनी आर्डर की सूचना मिलने से परिवादी सं0-2 राम चन्‍द्र पाण्‍डेय विपक्षी सं0-5 शाखा पोस्‍ट मास्‍टर के कार्यालय पर मनी आर्डर का पता लगाने कई बार गया, परन्‍तु कोई पता नहीं चला एवं विपक्षी सं0-6 श्रीमती सुषमा पाण्‍डेय, शाखा पोस्‍ट मास्‍टर व उनके ससुर राम बोध पाण्‍डेय ने बताया कि मनी आर्डर फार्म डाकखाने में दिनांक 31.7.1996 को आ गया था, परन्‍तु पैसा अन्‍यत्र कहीं खर्च हो गया है और पैसे का इंतज़ाम हो जाने पर वापस कर दिया जायेगा। रामचन्‍द्र ने विपक्षी सं0-6 से दिनांक 06.8.1996 को पूंछा तो उसने व उसके ससुर ने मनी आर्डर वापस कर देने की धमकी दी। परिवादी रामचन्‍द्र ने दिनांक 07.8.1996 को विपक्षी 4 प्रवर अधीक्षक डाकघर, प्रतापगढ को तार भेजकर हस्‍तक्षेप की मॉग की, परन्‍तु कोई कार्यवाही नहीं की गई, अत: परिवादीगण द्वारा विपक्षीगण से मनी आर्डर समय से न मिलने के कारण धान की सिंचाई न हो पाने के फलस्‍वरूप हुई क्षति की बावत रू0 26,250.00 का अनुतोष दिलाये जाने हेतु जिला मंच के समक्ष परिवाद प्रस्‍तुत किया गया है।

विपक्षी सं0-1 ता 5/अपीलार्थीगण की ओर से जिला मंच के समक्ष परिवादी का अलग से विरोध किया गया एवं स्‍पष्‍ट रूप से लिखित आपत्ति प्रस्‍तुत की गई एवं विपक्षी सं0-6 द्वारा नोटिस लेने से इंकार किया गया, जिसके फलस्‍वरूप विपक्षी सं0-6 के विरूद्ध मुकदमें की कार्यवाही जिला मंच के समक्ष एक पक्षीय रूप से की गई।

जिला मंच द्वारा इस संदर्भ में निष्‍कर्ष दिया गया कि श्रीमती सुषमा पाण्‍डेय एवं पवर डाक अधीक्षक द्वारा लापरवाही एवं उपेक्षा पूर्ण कार्यवाही से मामला उत्‍पन्‍न हुआ, ऐसी स्थिति में श्री आर0एस0 यादव एवं श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय के संदर्भ में उपरोक्‍त वर्णित आदेश पारित किया गया है।

-4-

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा सर्वप्रथम मुख्‍य रूप से यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि अविवादित रूप से वर्तमान प्रकरण में मनी आर्डर नई दिल्‍ली से परिवादी/प्रत्‍यर्थी अतुल कुमार पाण्‍डेय के पक्ष में भेजा गया एवं मनी आर्डर भेजे जाने वाले व्‍यक्ति ने कोई परिवाद प्रस्‍तुत नहीं किया है एवं अविवादित रूप से मनी आर्डर भेजे जाने वाले व्‍यक्ति को मनी आर्डर की धनराशि भी प्राप्‍त हो गई है, ऐसी स्थिति में मनी आर्डर की धनराशि जिन्‍हें प्राप्‍त होनी थी वह अतुल कुमार पाण्‍डेय है, जो घटना के समय नाबालिग थे और प्रत्‍यर्थी सं0-2/परिवादी रामचन्‍द्र पाण्‍डेय के लडके है। मनी आर्डर की धनराशि जिन्‍हें प्राप्‍त होनी थी, उनकी ओर से वर्तमान परिवाद जनपद प्रतापगढ़ में प्रस्‍तुत किया गया और इस प्रकार मनी आर्डर जिनके द्वारा प्राप्‍त किया जाना था, वे उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आते हैं, क्‍योंकि मनी आर्डर भेजने वाले ने ही मनी आर्डर भेजने के संदर्भ में धनराशि अपीलार्थी/विपक्षी पोस्‍ट आफिस को दी थी, अत: उपभोक्‍ता की श्रेणी में मनी आर्डर भेजने वाले ही आते है और मनी आर्डर नई दिल्‍ली से भेजा गया, ऐसी स्थिति में परिवादीगण जहॉ मनी आर्डर की धनराशि जनपद प्रतापगढ में प्राप्‍त होनी थी, वह विपक्षीगण के संदर्भ में उपभोक्‍ता की श्रेणी में नहीं आता है, अत: जिला मंच द्वारा जो आदेश पारित किया गया, उसमें क्षेत्राधिकार सम्‍बन्‍धी त्रुटि है।

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्‍तुत कियागया कि धारा-6 पोस्‍ट आफिस एक्‍ट के प्राविधानों को देखते हुए भी वर्तमान प्रकरण में जिला मंच द्वारा पारित आदेश विधि अनुकूल नहीं है। अपने तर्क को आगे बढाते हुए अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क प्रस्‍तुत किया गया कि अविवादित रूप से विपक्षी सं0-6/प्रत्‍यर्थी सं0-3 श्रीमती सुषमा देवी घटनाके समय प्रश्‍नगत पोस्‍ट आफिस प्रतापगढ़ में शाखा पोस्‍ट मास्‍टर के रूप में तैनात थी एवं घटना के समय श्री आर0एस0 यादव, प्रवर अधीक्षक डाकघर प्रधान डाक कार्यालय में कार्यरत थे एवं यह दोनों व्‍यक्तियों

-5-

के विरूद्ध नाम से जिला मंच द्वारा आदेश पारित किया गया है, जबकि अविवादित रूप से यह दोनों व्‍यक्ति डाक विभाग के कर्मचारी थे और इस कारण भी जिला मंच द्वारा पारित आदेश विधि अनुकूल नहीं है।

प्रत्‍यर्थी पक्ष/परिवादीगण के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा पीठ का ध्‍यान मा0 राष्‍ट्रीय आयोग की नजीर Raghavendra Rao Vs. Director General Department of Post III (2006) CPJ 269 (NC) की ओर पीठ का ध्‍यान आकर्षित किया गया। उपरोक्‍त वर्णित नजीर में परिवाद उस व्‍यक्ति द्वारा प्रस्‍तुत किया गया था, जिसने मनी आर्डर किया था। वर्तमान प्रकरण में परिवाद उस व्‍यक्ति द्वारा प्रस्‍तुत किया गया जिसे मनी आर्डर की धनराशि प्राप्‍त की जानी थी, अत: उपरोक्‍त वर्णित नजीर में प्रतिपादित सिद्धांत का कोई लाभ परिवादी/प्रत्‍यर्थी को प्राप्‍त नहीं है।

परिवादी/प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा पीठ का ध्‍यान महाराष्‍ट्रा स्‍टेट कमीशन की नजीर Homai J. Shroff & Others Vs. Eastern Engineers II (1993) CPJ 1011 की ओर आकर्षित किया गया, जिसमें रू0 500.00 क्षतिपूर्ति को बढाये जाने हेतु अपील योजित की गई थी, उसे अपील में स्‍वीकार नहीं किया गया। इस नजीर का भी कोई लाभ वर्तमान प्रकरण में प्रत्‍यर्थी/परिवादी को प्राप्‍त नहीं है।

प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा यह तर्क भी प्रस्‍तुत किया गया कि उपरोक्‍त प्रकरण में विपक्षी सं0-6/ प्रत्‍यर्थी सं0-3 द्वारा अपील सं0-2301/2002  योजित की गई थी, जो अपीलार्थी की अनुपस्थिति के कारण खण्डित हो गई, ऐसी स्थिति में वर्तमान अपील भी खण्डित किये जाने योग्‍य है और रेसजुडिकेटा (Res Judicatga) का सिद्धांत प्रभावी माना जायेगा। इस संदर्भ में प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा मा0 राष्‍ट्रीय आयोग की नजीर Reliance Idustries Ltd. & Anr. Vs. Neera Maheshwari III (2006)

-6-

CPJ 67 (NC) की ओर पीठ का ध्‍यान आकर्षित किया गया, जिसमे समान अभिवचन के एक परिवाद को खण्डित होनेके कारण दूसरे परिवाद को रेसजुडिकेट के सिद्धात से बाधित माना गया। वर्तमान प्रकरण में विपक्षी सं0-6/प्रत्‍यर्थी सं0-3 की ओर से प्रस्‍तुत अपील उनकी अनुपस्थिति के कारण दिनांक 02.8.2011 को खण्डित हुई, ऐसी स्थिति में उक्‍त वर्णित अपील गुण-दोष के आधार पर निर्णीत नहीं हुई है, अत: रेसजुडिकेटा के सिद्धांत की बावत प्रत्‍यर्थी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क में बल नहीं पाया जाता है।

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता का यह भी तर्क है कि वर्तमान प्रकरण में उपभोक्‍ता मनी आर्डर करने वाला ही है और उसके द्वारा कोई परिवाद प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। अविवादित रूप से मनी आर्डर करने वाले को मनी आर्डर की धनराशि वापस प्राप्‍त हो गई है, अत: मनी आर्डर प्राप्‍त किये जाने वाले व्‍यक्ति उपभोक्‍ता की श्रेणी में स्‍वीकार किये जाने योग्‍य नहीं है, अत: जिला मंच द्वारा पारित आदेश विधि सम्‍मत होना नहीं पाया जाता है और इस संदर्भ में अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता के तर्क में बल पाया जाता है।

अपीलार्थी के विद्वान अधिवक्‍ता द्वारा भारतीय पोस्‍ट आफिस एक्‍ट, 1989 की धारा-6 की ओर पीठ का ध्‍यान आकर्षित कराया गया है:-

Section 6 of the Indian Post Office Act. 1989 reads as under :

 “6, Exemption from liability for loss, misdelivery, delay or damage - The Government shall not incur any liability by reason of the loss, misdelivery or delay of or damage to, any postal article in course of transmission by post, except insofar as such liability may in express terms be undertaken by the Central Government as hereinafter provided and no officer of the Post Office shall incur any liability by reason of any such

-7-

loss, misdelivery, delay or damage, unless he has caused the same fraudulently or by his willful act or default.”

सम्‍पूर्ण विवेचना के आधार पर हम इस निष्‍कर्ष पर पहुंचते है कि जिला मंच द्वारा पारित आदेश विधि अनुकूल नहीं है और अपास्‍त किये जाने योग्‍य है। तद्नुसार प्रस्‍तुत‍ अपील स्‍वीकार किये जाने योग्‍य है।

आदेश

     प्रस्‍तुत अपील स्‍वीकार करते हुए जिला मंच, प्रतापगढ़ द्वारा परिवाद सं0-106/1997 1- अतुल कुमार पाण्‍डेय व 2- राम चन्‍द्र पाण्‍डेय बनाम 1- महा निदेशक डाक, डाक भवन नई दिल्‍ली, 2- यूनियन आफ इण्डिया द्वारा सिक्रेटरी पोस्‍ट आफिस विभाग सेन्‍ट्रल सिक्रेटिएट, नई दिल्‍ली, 3- प्रधान डाक पाल महोदय उ0प्र0 कार्यालय पोस्‍ट मास्‍टर जनरल सिविल लाइन्‍स, इलाहाबाद 4- प्रवर अधीक्षक डाक घर प्रधान डाक कार्यालय प्रतापगढ़, 5- शाखा पोस्‍ट मास्‍टर डाही द्वारा सब पोस्‍ट आफिस अमरगढ ग्राम व पोस्‍ट डाही परगना व तहसील पट्टी जिला प्रतापगढ़, 6- श्रीमती सुषमा देवी पाण्‍डेय पत्‍नी श्री उमेशचन्‍द्र पाण्‍डेय शाखा पोस्‍ट मास्‍टर, निवासी ग्राम व पोस्‍ट डाही परगना व तहसील पट्टी, जिला प्रतापगढ़ में पारित निर्णय/आदेश दिनांक 05.9.2002 अपास्‍त किया जाता है। तद्नुसार परिवाद खण्डित किया जाता है।

 

     

         (जे0एन0 सिन्‍हा)                  (संजय कुमार)

         पीठासीन सदस्‍य                     सदस्‍य

हरीश आशु.,

कोर्ट सं0-2

 

 
 
[HON'BLE MR. Alok Kumar Bose]
PRESIDING MEMBER
 
[HON'BLE MR. Sanjay Kumar]
MEMBER

Consumer Court Lawyer

Best Law Firm for all your Consumer Court related cases.

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!
5.0 (615)

Bhanu Pratap

Featured Recomended
Highly recommended!

Experties

Consumer Court | Cheque Bounce | Civil Cases | Criminal Cases | Matrimonial Disputes

Phone Number

7982270319

Dedicated team of best lawyers for all your legal queries. Our lawyers can help you for you Consumer Court related cases at very affordable fee.